पहाड़गंज मार्केट में बादशाहत की लड़ाई: दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से समझिए बिल्डरों को कैसे बनाया जाता है निशाना

दिल्ली के पहाड़गंज मार्केट में सामने आए रंगदारी और फायरिंग केस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बड़े कारोबारी और बिल्डर अपराधियों के निशाने पर क्यों रहते हैं। इस केस के जरिए समझिए रंगदारी के नेटवर्क, पुलिस जांच की प्रक्रिया और कारोबारियों के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय।
पहाड़गंज मार्केट में रंगदारी और फायरिंग मामले पर दिल्ली पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस

बहादुरगढ़ अखाड़े से निकला एक पहलवान, बिल्डर और होटल संचालक ने पहाड़गंज मार्केट में बादशाहत कायम करने की खतरनाक साजिश रची थी। इसके तहत कम से कम 10 दिन से रेकी और साजिश के एक-एक पहलू का जाल बुना गया। एक दिन पहाड़गंज मार्केट के सबसे बड़े बिल्डर के ऑफिस में गोली चली। फायरिंग की इस घटना को instagram पर बढ़ा चढ़ा कर रील में दिखाया गया।

यह भी पढ़ेंः फाइनेंसर, प्रोपर्टी डीलरों को लूटने वाले गैंग का पर्दाफाश, कार सर्विस सेंटर चलाते थे बदमाश

मामाला दिल्ली पुलिस के पास पहुंचा आखिरकार इस साजिश की कलई खुल गई। दिल्ली के पहाड़गंज मार्केट में बिल्डरों और कारोबारियों के बीच दहशत का माहौल बनाकर प्रभाव बढ़ाने की कथित साजिश का दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस का दावा है कि यह कोई सामान्य फायरिंग की घटना नहीं थी बल्कि एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र था, जिसमें इंटरस्टेट गैंग के साथ स्थानीय स्तर पर भी सहयोग मिला। मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

यहां देखिए डीसीपी रोहित राजवीर सिंह की पूरी प्रैस कांफ्रेंस

₹30 लाख की रंगदारी मांगने के बाद हुई थी फायरिंग

सेंट्रल दिल्ली पुलिस उपायुक्त रोहित राजवीर सिंह के अनुसार 29 जून 2026 को पहाड़गंज के आर्य नगर स्थित एक बिल्डर के कार्यालय में हथियारबंद आरोपी पहुंचा और ₹30 लाख की रंगदारी मांगी। तत्काल ₹5 लाख देने का दबाव बनाया गया। रकम देने से इनकार करने पर आरोपी ने फायरिंग की और मौके से फरार हो गया। इसके बाद नबी करीम थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

डीसीपी रोहित राजवीर के मुताबिक जांच के लिए एसीपी सौरभ नरेन्द्र की निगरानी में पहली टीम नबी करीम एसएचओ गुलशन नागपाल के नेतृत्व में स्पेशल स्टाफ हवलदार मोहित यादव, इंस्पेक्टर मुर्तजा खान, एसआई शक्ति सिंह, हर्ष कुमार, हेडकांस्टेबल सीता राम की बनी।

दूसरी टीम एसआई अरविंद, हेडकांस्टेबल हीरा लाल और कांस्टेबल तरूण, जितेन्द्र की बनी। जबकि तीसरी टीम स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर इंस्पेक्टर संदीप यादव के नेतृत्व में एसआई विजय, नरेश, ओमवीर सिंह एएसआई प्रताप, हेडकांस्टेबल मोहित यादव, हेटकांस्टेबल विकास, राजबीर, कांस्टेबल लोकेश की बनी। इसके अलावा एक चौथी टीम भी थी जिसमें संगतराशां चौकी प्रभारी एस एन ओझा, ओएसआई महिपाल, हेडकांस्टेबल नरेन्द्र पुनिया, निरंजन, कांस्टेबल धीरज की थी इसके अलावा टेक्नीकल टीम एसआई कमलेश की थी।

CCTV, CDR और तकनीकी जांच से खुली पूरी साजिश

दिल्ली पुलिस की कई टीमों ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, होटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। जांच में सामने आया कि वारदात से पहले आरोपियों ने कई बैठकें की थीं और पूरे घटनाक्रम की योजना बनाई गई थी।

स्थानीय बिल्डर और होटल कारोबारी की कथित भूमिका

जांच में पुलिस ने दावा किया कि मुख्य आरोपी ने स्थानीय बिल्डर और होटल कारोबारी के साथ मिलकर पूरी साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर ठहरने की व्यवस्था, बैठकें और शिकायतकर्ता के परिवार की जानकारी उपलब्ध कराई गई ताकि वारदात को अंजाम देना आसान हो सके। पुलिस का कहना है कि उद्देश्य केवल रंगदारी वसूलना नहीं बल्कि इलाके में भय का माहौल बनाकर अपना प्रभाव बढ़ाना भी था।

कोलकाता से पकड़ा गया अहम साजिशकर्ता

मामले की जांच के दौरान एक प्रमुख आरोपी दिल्ली छोड़कर कोलकाता भाग गया था। दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने पश्चिम बंगाल में कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया और ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया। पुलिस के अनुसार इस गिरफ्तारी से पूरे षड्यंत्र की कड़ियां जुड़ गईं।

एनकाउंटर के बाद मुख्य आरोपी गिरफ्तार

मुख्य आरोपी लगातार गिरफ्तारी से बच रहा था। पुलिस के अनुसार विश्वसनीय सूचना मिलने पर आईपी एस्टेट क्षेत्र में उसे पकड़ने का प्रयास किया गया। आरोप है कि उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह दोनों पैरों में गोली लगने से घायल हो गया। उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सोशल मीडिया पर हथियार दिखाकर कर रहा था चुनौती

पुलिस का दावा है कि मुख्य आरोपी सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ वीडियो साझा कर रहा था और फायरिंग की घटना का श्रेय लेते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को खुली चुनौती दे रहा था। जांच एजेंसियां इन डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं।

अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार इस मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें मुख्य शूटर, एक प्रमुख साजिशकर्ता, एक स्थानीय बिल्डर, उसका सहयोगी और एक अन्य आरोपी शामिल है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन, हथियारों की बरामदगी तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

बरामदगी में क्या मिला

पुलिस ने मुख्य आरोपी के कब्जे से एक पिस्टल, जिंदा कारतूस, इस्तेमाल किए गए कारतूस और चोरी की एक मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा किया है। बरामद सामान को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।

Support India Vistar
Picture of Alok Verma
Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | Aadhaar Update: आधार में क्या बदल सकते हैं घर बैठे, फोटो और मोबाइल नंबर बदलने का क्या है तरीका | सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन से ठगी का नया ट्रेंड; भूलकर भी न करें ये गलती, जानें शिकायत का तरीका | PM Kisan 24th Installment: अगली ₹2000 की किस्त कब आएगी? किस्त रुकी है तो ऐसे करें जांच | Cyber Fraud: पैसा ट्रांसफर होने से पहले कैसे रुक सकती है साइबर ठगी, ₹5,043 करोड़ बचाने वाले सिस्टम को समझिए | बाबलू डेयरी में किसने चलवाई गोलियां? डिजिटल निगरानी से खुली गांजा, वसूली और बदले की कहानी | Online Fraud: नौकरी और निवेश के नाम पर ₹641 करोड़ की ठगी, आखिर कहां गया पैसा? | सात्विक भोजन क्या है, शरीर को स्वस्थ रखने में इसकी क्या भूमिका? डॉ. अरुण कुमार जायसवाल ने बताया सेहत का मंत्र | बॉटनेट क्या है? Sality Malware ने 23 साल तक कंप्यूटरों को कैसे बनाया साइबर हथियार | Digital Arrest Scam का पैसा कहां गया? CBI ने खोला APK और बैंक खातों का खेल | बिहार का विकास कैसे होगा? रोजगार, पलायन और सामाजिक बंटवारे पर उठे बड़े सवाल |
10-09-2026