ऑनलाइन ठगी होने के बाद सबसे बड़ी मुश्किल पैसा वापस पाने की होती है। लेकिन क्या हो अगर बैंक या UPI प्लेटफॉर्म को पैसे ट्रांसफर होने से पहले ही पता चल जाए कि जिस मोबाइल नंबर से लेनदेन जुड़ा है, उसके साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने का खतरा है? दूरसंचार विभाग का Financial Fraud Risk Indicator यानी FRI इसी सोच पर काम कर रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 तक इस व्यवस्था की मदद से ₹5,043.73 करोड़ की संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिली है।
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यानी साइबर फ्रॉड के खिलाफ लड़ाई अब ठगी होने के बाद अपराधियों और पैसे का पता लगाने तक सीमित नहीं है। कोशिश यह भी है कि संदिग्ध लेनदेन को पैसा निकलने से पहले पहचाना जाए।
Cyber Fraud रोकने वाला FRI क्या है?
Financial Fraud Risk Indicator को दूरसंचार विभाग ने 22 मई 2025 को शुरू किया था। यह किसी मोबाइल नंबर के वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े होने के खतरे का आकलन करता है।
FRI संदिग्ध मोबाइल नंबरों को तीन श्रेणियों में बांटता है।
| जोखिम | इसका मतलब |
|---|---|
| Medium | नंबर के साथ वित्तीय धोखाधड़ी का मध्यम जोखिम |
| High | नंबर के साथ धोखाधड़ी का उच्च जोखिम |
| Very High | नंबर के साथ धोखाधड़ी का बहुत अधिक जोखिम |
इसके बाद यह जानकारी बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और UPI सेवा देने वाली संस्थाओं तक पहुंच सकती है। इससे संबंधित संस्था संदिग्ध लेनदेन पर अतिरिक्त जांच, चेतावनी, देरी या जरूरत पड़ने पर रोक जैसे कदम उठा सकती है।
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15 महीने में ₹5,043.73 करोड़ का संदिग्ध नुकसान रोकने का दावा
FRI के असर को समझने के लिए इसके आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। शुरुआत के पहले छह महीनों में इसके जरिए करीब ₹660 करोड़ के संदिग्ध नुकसान को रोकने में मदद मिली थी।
अगस्त 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर ₹5,043.73 करोड़ पहुंच गया। अप्रैल 2026 के बाद की अवधि में ही ₹2,000 करोड़ से अधिक के संदिग्ध नुकसान को रोकने की जानकारी दी गई है। Digital Intelligence Platform यानी DIP से अब 1,600 से अधिक संगठन जुड़े हैं।
यहां एक बात समझना जरूरी है। ₹5,043.73 करोड़ को साइबर अपराधियों से बरामद की गई रकम कहना सही नहीं होगा। यह उन संदिग्ध साइबर फ्रॉड लेनदेन से जुड़ा नुकसान है जिसे FRI की मदद से रोकने का दावा किया गया है।
आखिर FRI को संदिग्ध मोबाइल नंबर का पता कैसे चलता है?
किसी मोबाइल नंबर को संदिग्ध घोषित करने के पीछे एक से अधिक स्रोतों से मिली जानकारी काम करती है। इसमें Sanchar Saathi के Chakshu पर नागरिकों की शिकायतें, National Cybercrime Reporting Portal यानी NCRP से मिले इनपुट, टेलीकॉम कंपनियों की जानकारी और बैंकों तथा दूसरे वित्तीय संस्थानों से मिले संकेत शामिल हो सकते हैं।
इन जानकारियों के आधार पर मोबाइल नंबर के जोखिम का स्तर तय किया जाता है। यह सूचना Digital Intelligence Platform के जरिए संबंधित संस्थाओं के साथ साझा की जाती है।
UPI Fraud में यह सिस्टम कैसे बचा सकता है पैसा?
मान लीजिए किसी व्यक्ति को फोन करके ठग खुद को बैंक अधिकारी बताता है। वह KYC अपडेट, खाता बंद होने या किसी दूसरे बहाने से पैसे ट्रांसफर करने को कहता है।
पीड़ित UPI से पैसा भेजने लगता है। यदि संबंधित मोबाइल नंबर पहले से FRI में उच्च जोखिम वाला चिह्नित है तो बैंक या भुगतान सेवा को उसका जोखिम संकेत मिल सकता है।
इसके बाद संस्था अपने नियमों के मुताबिक ग्राहक को चेतावनी दे सकती है, लेनदेन में देरी कर सकती है या संदिग्ध भुगतान को रोक सकती है। RBI भी बैंकों और Payment Service Operators को FRI को अपने सिस्टम में जोड़ने तथा रियल टाइम प्रतिक्रिया के उपाय अपनाने के संबंध में सलाह जारी कर चुका है।
साइबर ठगी रोकने की रणनीति में बड़ा बदलाव
ऑनलाइन फ्रॉड होने के बाद पीड़ित आमतौर पर बैंक, 1930 हेल्पलाइन, साइबर पुलिस और National Cybercrime Reporting Portal की मदद लेता है। तेजी से शिकायत होने पर रकम को फ्रीज कराने की संभावना बन सकती है, लेकिन पैसा कई खातों में पहुंच जाने के बाद उसे वापस पाना कठिन हो सकता है।
FRI का महत्व इसी जगह दिखाई देता है। इसका उद्देश्य जोखिम की जानकारी उस समय उपलब्ध कराना है जब संदिग्ध भुगतान होने वाला हो।
इसका अर्थ यह नहीं कि हर साइबर फ्रॉड अपने आप रुक जाएगा। अपराधी लगातार नए मोबाइल नंबर, बैंक खाते और तरीके इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए तकनीकी व्यवस्था के साथ नागरिक की सतर्कता भी जरूरी है।
बैंकिंग से आगे भी बढ़ रहा है FRI
इस व्यवस्था का इस्तेमाल बैंकिंग और UPI तक सीमित रखने के बजाय प्रतिभूति बाजार, बीमा और पेंशन व्यवस्था तक बढ़ाया जा रहा है।
इसमें RBI, NPCI, SEBI, बैंक, वित्तीय संस्थान, टेलीकॉम कंपनियां और दूसरे संबंधित संगठन शामिल हैं। शेयर ट्रेडिंग और डीमैट खातों से जुड़े फ्रॉड, बीमा पॉलिसी तथा क्लेम से जुड़ी धोखाधड़ी और पेंशन खातों की सुरक्षा में भी ऐसे जोखिम संकेतों का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी है।
Cyber Fraud होने पर आम आदमी क्या करे?
साइबर ठगी में सबसे महत्वपूर्ण चीज समय है। अगर पैसे की ठगी हो चुकी है तो तुरंत 1930 पर शिकायत करें और National Cybercrime Reporting Portal पर मामला दर्ज करें।
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अगर कोई संदिग्ध कॉल, SMS या WhatsApp संदेश मिला है लेकिन अभी आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है तो उसे Sanchar Saathi की Chakshu सुविधा पर रिपोर्ट किया जा सकता है।
अनजान व्यक्ति के कहने पर UPI से पैसे न भेजें। बैंक अधिकारी, पुलिस या सरकारी एजेंसी बताकर कोई व्यक्ति तुरंत पैसा ट्रांसफर करने का दबाव बनाए तो पहले उसकी पहचान स्वतंत्र माध्यम से जांचें।
आपके लिए इसका क्या मतलब है?
FRI की सबसे महत्वपूर्ण बात इसका नाम या तकनीक नहीं बल्कि इसका तरीका है। साइबर फ्रॉड में अब यह इंतजार जरूरी नहीं कि पहले पैसा चोरी हो, फिर शिकायत दर्ज हो और उसके बाद पैसा खोजा जाए।
मोबाइल नंबर से जुड़े जोखिम संकेत अगर बैंक और UPI सिस्टम तक समय रहते पहुंच जाते हैं तो संदिग्ध भुगतान को शुरुआत में ही रोकने का मौका मिल सकता है।
₹5,043.73 करोड़ का आंकड़ा इसी बदलाव का संकेत देता है। फिर भी कोई तकनीक नागरिक की अपनी सतर्कता की जगह नहीं ले सकती। अनजान कॉल पर भरोसा न करना, जल्दबाजी में UPI भुगतान न करना और धोखाधड़ी होते ही 1930 पर शिकायत करना अभी भी साइबर फ्रॉड से बचाव के सबसे जरूरी कदमों में शामिल है।










