बिहार के लोगों को अच्छी पढ़ाई, रोजगार और इलाज के लिए दूसरे राज्यों में क्यों जाना पड़ता है? क्या स्टार्टअप, शिक्षा और नागरिक भागीदारी के सहारे वर्ष 2047 तक बिहार की तस्वीर बदली जा सकती है? गोवा में आयोजित बिहार विकास सम्मेलन 2026 में इन सवालों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में कई बड़े लक्ष्य बताए गए, लेकिन उन्हें जमीन पर उतारने की चुनौतियां भी सामने आईं।
वास्को द गामा के रवींद्र भवन में आयोजित सम्मेलन का विषय “विकसित बिहार, विकसित भारत 2047” था। लेट्स इंस्पायर बिहार के मुताबिक कार्यक्रम में भारत और विदेश से आए 500 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें नीति निर्माता, उद्यमी, शिक्षाविद, पेशेवर, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रवासी बिहारी शामिल थे।
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कार्यक्रम का आयोजन आईपीएस अधिकारी विकास वैभव द्वारा शुरू किए गए अभियान लेट्स इंस्पायर बिहार ने किया। चर्चा का प्रमुख संदेश था कि बिहार के विकास की जिम्मेदारी सरकार के साथ नागरिकों, उद्यमियों और राज्य से बाहर रहने वाले बिहारियों को भी उठानी होगी।
2047 तक विकसित बिहार बनाने का दावा
लेट्स इंस्पायर बिहार के संस्थापक विकास वैभव ने कहा कि वर्ष 2047 तक बिहार को विकसित राज्य बनाने के लिए करीब 15 प्रतिशत की सतत आर्थिक वृद्धि की जरूरत होगी। उनके अनुसार विकास का मतलब ऐसा बदलाव होना चाहिए, जिसमें लोगों को शिक्षा, रोजगार और बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए बिहार छोड़ना न पड़े।
यह लक्ष्य बड़ा है क्योंकि बिहार से युवाओं का पलायन, रोजगार की कमी, कमजोर औद्योगिक ढांचा और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लंबे समय से सवालों में रही है। सम्मेलन में इन समस्याओं के समाधान के लिए नागरिक भागीदारी, उद्यमिता और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने पर जोर दिया गया।
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विकास वैभव ने दावा किया कि लेट्स इंस्पायर बिहार से करीब चार लाख लोग स्वेच्छा से जुड़े हैं। इनमें गोवा इकाई के लगभग 600 सहयोगी शामिल हैं। अभियान का लक्ष्य अगले वर्ष मार्च में अपनी छठी वर्षगांठ तक सहयोगियों की संख्या दस लाख तक पहुंचाने का है।
गांव और जिले से जुड़ने की अपील
विकास वैभव ने बिहार से बाहर रहने वाले लोगों से अपने गांव, कस्बे, प्रखंड और जिले के विकास में योगदान देने की अपील की। उन्होंने बताया कि अभियान के 104 सहयोगियों ने पुस्तकालय, छात्रवृत्ति, चिकित्सा शिविर और ऑनलाइन कक्षाओं जैसे काम शुरू किए हैं। कुछ लोगों ने अपने माता-पिता के नाम पर छात्रवृत्तियां भी शुरू की हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार में बदलाव के लिए सरकारी योजनाओं की अपनी भूमिका है, लेकिन समाज को भी पहल करनी होगी। हालांकि नागरिक भागीदारी सरकार की जिम्मेदारियों का विकल्प नहीं हो सकती। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, कानून व्यवस्था और निवेश के लिए भरोसेमंद माहौल तैयार करने का मुख्य दायित्व सरकार का ही है।
हर जिले में 100 रोजगार देने वाले स्टार्टअप का लक्ष्य
बिहार में रोजगार और पलायन का सीधा संबंध है। स्थानीय स्तर पर अवसर नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। सम्मेलन में युवाओं को नौकरी मांगने वाले के बजाय नौकरी देने वाला बनाने की बात कही गई।
विकास वैभव ने बताया कि करीब 600 स्टार्टअप लेट्स इंस्पायर बिहार से जुड़े हैं। संगठन ने वर्ष 2028 के अंत तक बिहार के प्रत्येक जिले में कम से कम एक ऐसा स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जो 100 या उससे अधिक लोगों को रोजगार दे सके।
कुछ स्टार्टअप ने इस दिशा में काम शुरू किया है। इस दावे की सफलता का आकलन इस बात से होगा कि कितने कारोबार टिकाऊ बने, उन्होंने वास्तविक निवेश कितना जुटाया और स्थानीय युवाओं को कितनी नौकरियां मिलीं।
“बिहारी” कहकर उपहास ने बदली विकास वैभव की सोच
विकास वैभव ने अपने स्कूली दिनों का एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता जब भोपाल में पदस्थ थे, तब वहां पढ़ाई के दौरान कुछ सहपाठी उन्हें “बिहारी” कहकर चिढ़ाते थे।
इस घटना ने उनके मन में सवाल पैदा किया कि नालंदा, विक्रमशिला और वैशाली जैसी ऐतिहासिक पहचान वाले बिहार के लिए “बिहारी” शब्द उपहास का कारण क्यों बना। इसके बाद उन्होंने बिहार के इतिहास का अध्ययन किया और राज्य के खोए गौरव को वापस लाने के लिए काम करने का निर्णय लिया।
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उनका कहना था कि बिहार कभी ज्ञान, उद्यमिता, वीरता और व्यापक सोच के लिए जाना जाता था। राज्य को अपने इतिहास से आत्मविश्वास लेते हुए आधुनिक शिक्षा, उद्योग और रोजगार पर काम करना होगा।
जातीय बंटवारे पर जताई चिंता
विकास वैभव ने बिहार में जाति आधारित बहस बढ़ने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अपराध की घटनाओं पर चर्चा भी आरोपी या पीड़ित की जाति को सामने रखकर की जाने लगी है। इससे समाज में दूरी बढ़ती है और विकास का साझा उद्देश्य पीछे छूट जाता है।
उन्होंने वैशाली गणराज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि आंतरिक मतभेद, स्वार्थ, ईर्ष्या और अहंकार ने कभी उसकी व्यवस्था को कमजोर किया था। उन्होंने मगध के रणनीतिकार वस्सकार का उल्लेख किया, जिन्होंने वैशाली के आंतरिक मतभेदों का लाभ उठाया था।
उनके मुताबिक बिहार के सामने आज सामाजिक एकता और सामाजिक विघटन की दो राहें हैं। बिहार की करीब 14 करोड़ आबादी में लगभग नौ करोड़ युवा हैं। यदि युवा राज्य को बदलने में सक्रिय भूमिका निभाएं तो बड़ा बदलाव संभव है।
उन्होंने बगहा और रोहतास का उदाहरण भी दिया। विकास वैभव का कहना था कि जिन स्थानों को पहले अपराध और पिछड़ेपन से जोड़कर देखा जाता था, वहां अब बदलाव दिखाई दे रहा है।
20 जिलों में 42 गार्गी पाठशालाएं
सम्मेलन में महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा के लिए चलाए जा रहे गार्गी चैप्टर के कार्यों की जानकारी दी गई। संगठन के मुताबिक बिहार के 20 जिलों में 42 गार्गी पाठशालाएं संचालित की जा रही हैं।
इनका उद्देश्य लड़कियों को शिक्षा से जोड़ना और महिलाओं को सामाजिक नेतृत्व के लिए तैयार करना है। अभियान शिक्षा, उद्यमिता, कौशल विकास और सामाजिक नेतृत्व से जुड़े दूसरे कार्यक्रम भी चला रहा है।
श्रेयसी सिंह ने नागरिक भागीदारी को बताया जरूरी
सम्मेलन की मुख्य अतिथि और बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने लेट्स इंस्पायर बिहार तथा इसके संस्थापक विकास वैभव की पहल की सराहना की।
श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार को बदलने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ नागरिकों, पेशेवरों, उद्यमियों, सामाजिक संगठनों और देश-विदेश में रहने वाले बिहारियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने बिहार की युवा आबादी, उद्यमशीलता, सांस्कृतिक विरासत और मानव संसाधन को राज्य की बड़ी ताकत बताया। उनके अनुसार असली जरूरत इन क्षमताओं को रोजगार और आर्थिक अवसरों में बदलने की है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि शिक्षा, उद्योग, नवाचार, रोजगार सृजन और सामाजिक सद्भाव पर काम करके बिहार वर्ष 2047 तक विकसित एवं समृद्ध राज्य बनने के लक्ष्य पर आगे बढ़ सकता है।
उद्यमिता सत्र में रोजगार पर चर्चा
सम्मेलन का पहला सत्र उद्यमिता पर था। इसका संचालन पंकज मणि ने किया। इसमें नेहा सिन्हा, रवि भारद्वाज, अभिषेक रवि, लिली झा, डॉ. विभय कुमार झा, रमेश कुमार सिंह, अशरफ जमाल, विजेता झा, मुकेश उपाध्याय और सोनम मिश्रा ने भाग लिया।
वक्ताओं ने उद्यमिता, रोजगार सृजन, नवाचार, निवेश के अवसर और बिहार में नए कारोबार के लिए जरूरी व्यवस्था पर विचार रखे। चर्चा का प्रमुख सवाल था कि बिहार के युवाओं को नौकरी मांगने वाले से रोजगार देने वाला कैसे बनाया जाए।
संस्कृति और पहचान को आर्थिक अवसरों से जोड़ने की बात
दूसरा सत्र “बिहार की संस्कृति, विरासत और पहचान” पर था। इसका संचालन इंद्रमोहन यादव ने किया।
इसमें गणेश कुमार, एलआईबी गया संयोजक समीर खान, अभिनव नारायण झा, पल्लवी रानी, ज्योति झा, संतोष मिश्रा, दीपक ठाकुर, ओमान से कौशलेन्द्र जी, अमित सिंह, डॉ. ए.ए. खान और कर्नल अजय सिंह शामिल हुए।
वक्ताओं ने बिहार की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक योगदान और पहचान पर चर्चा की। यह सवाल भी उठाया गया कि संस्कृति और विरासत को पर्यटन, रोजगार तथा स्थानीय आर्थिक अवसरों से कैसे जोड़ा जा सकता है।
बिहार @ 2047 सत्र में भविष्य का खाका
तीसरा सत्र “बिहार @ 2047” विषय पर हुआ। इसका संचालन लेट्स इंस्पायर बिहार के गोवा संयोजक संजीव लाल ने किया।
सत्र में शैलेंद्र मिश्रा, सुभाष सिंह, सुजीत, आशु कुमार झा, आयुष मल्ल, डॉ. मोहम्मद कमाल हुसैन, पारुल यूनिवर्सिटी गोवा की डीन डॉ. ललित लता झा, एमई सिमोनी स्पोर्ट्स के राकेश चंद, सोनू शर्मा और रवि राजहंस ने हिस्सा लिया।
इस दौरान आर्थिक विकास, शिक्षा, रोजगार, मानव संसाधन, नवाचार और नागरिकों की जिम्मेदारी पर विचार रखे गए।
महिला शिक्षा और नेतृत्व पर चौथा सत्र
चौथा सत्र “LIB मातृशक्ति @ 2047, सशक्त नारी, विकसित बिहार” विषय पर आयोजित हुआ। इसका संचालन पत्रकार और गोवा समाचार की संपादक एवं प्रकाशक नमिता शरण ने किया।
सत्र में रुचि सिंह, डॉ. रूपश्री, नूतन पांडे, बिनीता झा, मनीषा झा, रश्मि मल्ल, पूजा चंद्रा, सोनल कीर्ति और अमेरिका से सुनीता जी शामिल हुईं।
वक्ताओं ने महिला शिक्षा, उद्यमिता, नेतृत्व और बिहार के सामाजिक तथा आर्थिक विकास में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने पर चर्चा की।
बिहार प्रेरणास्रोत सम्मान पाने वालों के नाम
सम्मेलन में समाज और बिहार की प्रगति में योगदान देने वाले व्यक्तियों तथा संस्थानों को बिहार प्रेरणास्रोत सम्मान दिया गया।
सम्मान पाने वालों में अजीत कुमार आईआरएस, विशाल, सदर बायोटेक की ओर से सरफराज आलम और प्रशांत मिश्रा, शंकर ज्योति नेत्रालय पटना की ओर से मोहम्मद अख्तर, कमला प्रसाद, डॉ. विजय कुमार रंजन, संगीता वर्मा, आनंद सिंह, डॉ. लक्ष्य कुमार झा, पी.के. मंडल, सौम्या आईपीएस, पुष्पेंद्र मंडल, संजय सिन्हा, अखिलेश शर्मा, लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग गोवा के आशीष वर्मा और रिलायंस इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष अभिमन्यु सिंह शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इसके बाद ज्योति झा और पल्लवी रानी ने काव्य पाठ किया।
विदेशों से भी पहुंचे प्रवासी बिहारी
सम्मेलन में बिहार से बाहर रहने वाले लोगों की भूमिका पर खास चर्चा हुई। शशिकांत जी ऑस्ट्रेलिया से और सुनीता जी अमेरिका से कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचीं।
लेट्स इंस्पायर बिहार के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित कुमार ने कहा कि गोवा सम्मेलन से प्रवासी बिहारियों की भागीदारी और बिहार के बदलाव में योगदान देने की उनकी इच्छा सामने आई है। उन्होंने कहा कि संगठन विकसित बिहार के लक्ष्य के लिए लोगों, विचारों और अवसरों को जोड़ने का काम जारी रखेगा।
सम्मेलन में शामिल प्रमुख लोग
कार्यक्रम में वास्को के विधायक कृष्णा दाजी सालकर, सुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक, पत्रकार कन्हैया भेलारी, प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमाएल अहमद, पत्रकार एवं गोवा समाचार की संपादक और प्रकाशक नमिता शरण, अजीत कुमार आईआरएस, प्रो. अशमी रजा, संस्कृति मंत्रालय के सलाहकार एवं सामाजिक उद्यमी दीपक ठाकुर, लव कुमार और सोनू शर्मा सिंह उपस्थित रहे।
लेट्स इंस्पायर बिहार के राष्ट्रीय संयोजक मोहन झा, शैलेंद्र मिश्रा, सुजीत सिंह, सुभाष सिंह और संगठन के सोशल मीडिया संयोजक आशीष रंजन ने भी आयोजन में भाग लिया।












