Telegram Scam Toolkit: ₹2,000 में बिक रही Fraud-as-a-Service टूलकिट, AI की मदद से बढ़ रहा साइबर अपराध

Telegram पर Fraud-as-a-Service (FaaS) तेजी से फैल रहा है। कुछ हजार रुपये में मिलने वाली AI स्कैम टूलकिट्स साइबर अपराध को आसान बना रही हैं। जानिए यह मॉडल कैसे काम करता है और इससे बचने के लिए क्या करें।
Telegram Scam Toolkit Fraud as a Service AI Cyber Crime Awareness India

अगर कोई आपसे कहे कि अब साइबर ठगी करने के लिए हैकिंग सीखने की भी जरूरत नहीं रही, तो शायद यह बात सुनकर हैरानी होगी। लेकिन यही सच तेजी से सामने आ रहा है। Fraud-as-a-Service (FaaS) नाम का नया साइबर अपराध मॉडल ठगी को एक सब्सक्रिप्शन बिजनेस में बदल रहा है। कुछ हजार रुपये खर्च कर कोई भी व्यक्ति तैयार स्कैम टूलकिट हासिल कर सकता है और AI की मदद से बड़े पैमाने पर लोगों को निशाना बना सकता है।

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यही वजह है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे साइबर अपराध के औद्योगीकरण की नई शुरुआत मान रहे हैं।

Fraud-as-a-Service (FaaS) क्या है?

Fraud-as-a-Service या FaaS ऐसा आपराधिक मॉडल है, जिसमें साइबर अपराधी अपने फ्रॉड टूल्स और सेवाओं को उसी तरह उपलब्ध कराते हैं जैसे वैध कंपनियां Software-as-a-Service (SaaS) मॉडल पर सॉफ्टवेयर बेचती हैं।इस अवधारणा पर 2016-17 के दौरान साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने ध्यान दिया, जब अंडरग्राउंड फोरम और साइबर अपराध नेटवर्क पर फ्रॉड टूल्स को पैकेज बनाकर बेचा जाने लगा।

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आज स्थिति यह है कि डार्क वेब पर जाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। केवल एक Telegram अकाउंट और लगभग ₹2,000 से ₹5,000 खर्च करके कई अवैध ग्रुप्स में प्रवेश या स्कैम टूलकिट खरीदी जा सकती है।

Telegram पर कैसे बिक रही हैं फ्रॉड टूलकिट्स?

Telegram कई साइबर अपराधियों के लिए वितरण माध्यम बन चुका है। यहां अलग-अलग चैनलों और निजी ग्रुप्स के जरिए तैयार स्कैम किट्स बेची जाती हैं।

इनमें AI आधारित कई टूल्स के नाम सामने आए हैं, जैसे:

  • FraudGPT
  • WormGPT
  • EvilGPT
  • DarkBard
  • DarkWizardAI

ये टूल्स कथित तौर पर Telegram और अन्य अवैध ऑनलाइन मंचों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।

Fraud Toolkit में क्या-क्या मिलता है?

एक सामान्य Fraud-as-a-Service पैकेज में कई तरह के डिजिटल अपराध से जुड़े संसाधन शामिल हो सकते हैं।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • AI द्वारा तैयार किए गए फिशिंग ईमेल, जो व्यक्ति की नौकरी, शहर और वित्तीय व्यवहार के अनुसार बनाए जाते हैं।
  • डीपफेक KYC वीडियो और क्लोन की गई आवाजें, जिनका इस्तेमाल पहचान की नकल करने में किया जाता है।
  • डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest) स्कैम के लिए पुलिस या सरकारी अधिकारियों जैसी AI आवाजें।
  • रिश्तेदार बनकर की जाने वाली नकली इमरजेंसी कॉल्स।
  • स्कैम स्क्रिप्ट, मैसेज टेम्पलेट और ऑटोमेशन टूल्स।
  • कई मामलों में तकनीकी सहायता, नियमित अपडेट और ग्राहक सहायता जैसी सुविधाएं भी। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे “Cybercrime as a Subscription Business” भी कह रहे हैं।

साइबर अपराध में भी ‘कस्टमर सपोर्ट’

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ अवैध नेटवर्क अपने ग्राहकों को वैध कंपनियों की तरह सेवा देने का दावा करते हैं।

यदि खरीदार टूल से संतुष्ट नहीं होता तो कई मामलों में पैसे वापस करने जैसी बातें भी सामने आई हैं। इससे साफ है कि साइबर अपराध अब संगठित व्यवसाय का रूप लेता जा रहा है।

भारत में कितना बड़ा है खतरा?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से अब तक Telegram से जुड़े साइबर फ्रॉड के 6.8 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।

इन मामलों में करीब ₹71,017 करोड़ के अनुमानित वित्तीय नुकसान का उल्लेख किया गया है। यह दिखाता है कि ऑनलाइन फ्रॉड अब केवल तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुका है।

आम लोग कैसे बच सकते हैं?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कुछ आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं।

  • किसी भी अनजान Telegram या WhatsApp निवेश ग्रुप से दूर रहें।
  • केवल Google Play Store और Apple App Store जैसे आधिकारिक स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करें।
  • निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म और ब्रोकर की वैधता की पुष्टि करें।
  • किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या AI आवाज पर तुरंत भरोसा न करें।
  • साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) और स्थानीय साइबर पुलिस से संपर्क करें।
  • बैंकिंग या KYC से जुड़ी जानकारी कभी भी फोन या मैसेज के जरिए साझा न करें।

क्यों बढ़ रही है चिंता?

पहले साइबर अपराध करने के लिए तकनीकी जानकारी जरूरी होती थी। अब AI आधारित तैयार टूलकिट्स ने यह बाधा काफी हद तक समाप्त कर दी है। इससे ऐसे लोग भी ऑनलाइन ठगी कर सकते हैं जिनके पास हैकिंग का कोई विशेष अनुभव नहीं है।

इसी कारण Fraud-as-a-Service मॉडल आने वाले समय में साइबर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

निष्कर्ष

Fraud-as-a-Service साइबर अपराध के तरीके को तेजी से बदल रहा है। Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध अवैध स्कैम टूलकिट्स और AI आधारित सेवाएं ठगी को पहले से कहीं आसान बना रही हैं। ऐसे समय में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव, अनजान Telegram ग्रुप या AI आधारित कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। समय रहते रिपोर्ट करना न केवल आपके पैसे बचा सकता है, बल्कि दूसरे लोगों को भी साइबर अपराध का शिकार होने से रोक सकता है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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01-10-2026