ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले अब अनजान लिंक भेजकर सीधे पैसे मांगने के बजाय पहले भरोसा जीतते हैं। WhatsApp ग्रुप में सफल निवेशकों की कहानियां दिखाई जाती हैं। Telegram पर कथित विशेषज्ञ सलाह देते हैं और देखने में असली लगने वाला प्लेटफॉर्म हर निवेश पर मुनाफा दिखाता है।
दिल्ली में सामने आया करीब 30 लाख रुपये का मामला बताता है कि यह पूरा खेल कैसे चलता है। पीड़ित से पहले छोटी रकम निवेश कराई गई। स्क्रीन पर लाभ दिखाई दिया तो उसने बड़ी रकम लगानी शुरू कर दी। पैसे निकालने की बारी आई तो VIP मेंबरशिप, टैक्स, अकाउंट अपग्रेड और दूसरे शुल्क के नाम पर नई मांगें सामने आने लगीं।
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दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के मुताबिक यह किसी छोटे स्थानीय गिरोह का काम नहीं था। जांच में विदेशी ऑपरेटर, WhatsApp और Telegram संचालक, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग तथा USDT के जरिए रकम ठिकाने लगाने वालों का नेटवर्क सामने आया है।
WhatsApp ग्रुप से शुरू हुआ ऑनलाइन फ्रॉड
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के स्पेशल सीपी एचजीएस धालीवाल के अनुसार गौरव रुस्तोगी को WhatsApp ग्रुप, Telegram चैनल और फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश के लिए तैयार किया गया था। कथित आकर्षक कमाई के प्रस्तावों पर भरोसा करके उन्होंने अलग-अलग चरणों में करीब 30,06,000 रुपये जमा कर दिए।
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इस मामले में 18 नवंबर 2025 को क्राइम ब्रांच थाने में ई-एफआईआर संख्या 27/2025 दर्ज हुई थी। केस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319, 340 और 61(2) लगाई गईं।
जांच के दौरान “HO30” नाम का WhatsApp ग्रुप भी मिला। पुलिस का आरोप है कि बीकानेर निवासी हकम अली ने इस ग्रुप को बनाया और चलाया था। ग्रुप में कथित कमाई, मुनाफे और सफल निवेश के स्क्रीनशॉट दिखाकर लोगों का भरोसा जीता जाता था।
पहले छोटी रकम, फिर बड़ा निवेश
इस ऑनलाइन फ्रॉड की सबसे अहम चाल नकली मुनाफा था। पीड़ित को पहले छोटी रकम जमा करने के लिए कहा जाता था। फर्जी ऐप या वेबसाइट पर उस रकम के बदले लाभ दिखाई देता था। कई मामलों में भरोसा बढ़ाने के लिए शुरुआत में थोड़ी रकम निकालने भी दी जा सकती है।
इसके बाद पीड़ित से बड़ी रकम जमा कराई जाती है। ऐप पर उसका मुनाफा लगातार बढ़ता दिखाई देता है, लेकिन यह रकम वास्तविक नहीं होती। पुलिस जांच के मुताबिक स्क्रीन पर दिखाई देने वाली रकम को फ्रॉड नेटवर्क नियंत्रित करता था।
जब पीड़ित अपने पैसे निकालना चाहता था तो उससे इनमें से किसी बहाने भुगतान मांगा जाता था:
- VIP मेंबरशिप
- अकाउंट अपग्रेड
- रिपेयर टास्क
- प्रतिष्ठा अंक बढ़ाने का शुल्क
- निकासी शुल्क
- टैक्स क्लीयरेंस
- सिस्टम मेंटेनेंस
हर बार कहा जाता था कि यह अंतिम भुगतान है। रकम जमा होते ही एक नई समस्या और नया शुल्क सामने आ जाता था।
18 से अधिक बैंक खातों में घुमाई गई रकम
क्राइम ब्रांच के मुताबिक ठगी की रकम एक खाते में रखने के बजाय कई बैंक खातों में भेजी गई। जांच में 18 से अधिक प्रथम स्तर के खाते मिले हैं। रकम को ATM, चेक और बैंक ट्रांसफर के जरिए आगे बढ़ाया गया।
पीड़ित के पांच लाख रुपये मोनिश के नाम वाले Federal Bank खाते में पहुंचे थे। पुलिस का आरोप है कि यह खाता अनीश ने उपलब्ध कराया और अक्षत सिरोही तथा अनीश इसे संचालित कर रहे थे। इंटरनेट बैंकिंग के IP लॉग से खाते के इस्तेमाल की जानकारी मिली।
खाता उपलब्ध कराने वाले लोगों को कथित रूप से 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था। ऐसे खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
USDT से विदेश पहुंचाने का आरोप
पुलिस जांच में Telegram ग्रुपों के जरिए USDT और रुपये के लेनदेन का कथित तरीका भी सामने आया। इन ग्रुपों में विदेशी ऑपरेटर और भारतीय बिचौलिए USDT-INR की लाइव दर साझा करते थे।
कुछ लेनदेन में 5,000 से 10,000 USDT तक विदेशी ऑपरेटरों को दिए जाने और उसके बदले भारतीय खातों से रुपये भेजे जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब क्रिप्टो वॉलेट, विदेशी संपर्क और रकम की पूरी कड़ी तलाश रही है।
जयपुर एयरपोर्ट पर पकड़ा गया वांछित आरोपी
पुलिस के अनुसार मेरठ निवासी 26 वर्षीय उदित त्यागी मामले में वांछित था। नाम सामने आने के बाद वह थाईलैंड, मलेशिया और बाद में संयुक्त अरब अमीरात चला गया था। लुकआउट सर्कुलर के बाद जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचने पर Bureau of Immigration ने उसे पकड़ा।
उदित त्यागी का नाम राजकोट में दर्ज 8,16,742 रुपये के ऑनलाइन वित्तीय फ्रॉड मामले में भी संदिग्ध सहयोगी के रूप में सामने आया है। उसकी भूमिका और आरोपों की जांच अभी जारी है।
पुलिस ने अनीश, अक्षत सिरोही, हकम अली और मोनिश की अलग-अलग भूमिकाओं का भी उल्लेख किया है। मुख्य समन्वयक बताए गए एक अन्य संदिग्ध की तलाश जारी है।
35 से अधिक साइबर शिकायतों से मिला संबंध
NCRP और बैंक खातों के शुरुआती विश्लेषण में इस नेटवर्क से जुड़े खातों का संबंध अलग-अलग राज्यों की 35 से अधिक साइबर क्राइम शिकायतों से मिला है। प्रत्येक शिकायत और कुल रकम की पुष्टि अभी की जा रही है।
जांच का नेतृत्व इंस्पेक्टर सतीश मलिक ने किया। टीम में एसआई अनुज छिकारा, एएसआई श्रीओम, हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार, रविंदर सिंह, आजाद, भंवर सिंह, संजीत और महिला कांस्टेबल किरण चौधरी शामिल थे। कार्रवाई ACP राज पाल डबास की निगरानी और DCP क्राइम ब्रांच हर्ष इंदोरा के निर्देशन में हुई।
ऑनलाइन फ्रॉड से बचने का आसान नियम
यदि किसी ऐप पर भारी मुनाफा दिख रहा हो, लेकिन पैसे निकालने से पहले बार-बार भुगतान मांगा जा रहा हो तो और रकम बिल्कुल न भेजें। WhatsApp या Telegram पर मिले निवेश प्रस्ताव की जांच किए बिना बैंक ट्रांसफर न करें। स्क्रीनशॉट, ग्रुप में आई प्रशंसा और कथित कमाई को प्रमाण न मानें।
ठगी होने पर बैंक को तुरंत सूचना दें और 1930 पर कॉल करें। शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है। जल्दी शिकायत करने से रकम रोके जाने की संभावना बढ़ सकती है।










