नई दिल्ली के महिपालपुर स्थित CISF अस्पताल में मंगलवार को अधिकारी से लेकर जवान तक एक ही उद्देश्य के लिए जुटे। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और एम्स नई दिल्ली ने यहां बड़ा रक्तदान शिविर लगाया। CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने खुद रक्तदान कर अभियान की शुरुआत की। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों सहित करीब 500 कर्मी रक्तदान के लिए आगे आए।
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यह आयोजन इसलिए भी अहम है क्योंकि CISF की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 1,400 यूनिट खून की जरूरत पड़ती है, जबकि उपलब्धता करीब 960 यूनिट बताई गई है। इस हिसाब से राजधानी में रोज लगभग 440 यूनिट खून की कमी बनी हुई है।
पहले महानिदेशक ने किया रक्तदान
महिपालपुर के NHCC अस्पताल में आयोजित शिविर का उद्घाटन 2 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने स्वयं रक्तदान किया।
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महानिदेशक को रक्तदान करते देखकर CISF के वरिष्ठ अधिकारी भी अभियान से जुड़े। महानिरीक्षक नवज्योति गोगोई, महानिरीक्षक सोनिया नारंग और महानिरीक्षक विनय काजला ने रक्तदान किया।
शिविर में अतिरिक्त महानिदेशक मुख्यालय विजय प्रकाश, अतिरिक्त महानिदेशक एयरपोर्ट बिनीता ठाकुर और CISF की निदेशक चिकित्सा डॉ. शालिनी तिवारी भी मौजूद रहीं।
500 CISF कर्मी रक्तदान के लिए पहुंचे
इस अभियान में करीब 500 CISF अधिकारी और जवान स्वेच्छा से रक्तदान करने पहुंचे। प्रेस विज्ञप्ति में रक्तदान के लिए आगे आए कर्मियों की संख्या बताई गई है। वास्तव में कितनी यूनिट खून एकत्र हुआ, इसकी जानकारी जारी नहीं की गई।
रक्तदान से पहले प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य जांच होती है। डॉक्टर की अनुमति मिलने के बाद ही खून लिया जाता है। इसी कारण शिविर में पंजीकरण कराने वाले लोगों और रक्तदान करने वाले लोगों की संख्या अलग हो सकती है।
एम्स नई दिल्ली के ब्लड सेंटर की विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम कौशिक और चिकित्सा सामाजिक कल्याण अधिकारी अंजू एएस ने अपनी टीम के साथ शिविर की चिकित्सा व्यवस्था संभाली।
दिल्ली में रोज 440 यूनिट खून की कमी का दावा
CISF की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दिल्ली के अस्पतालों को प्रतिदिन करीब 1,400 यूनिट खून की जरूरत है। इसके मुकाबले लगभग 960 यूनिट खून उपलब्ध हो रहा है। इस आधार पर प्रतिदिन करीब 440 यूनिट की कमी बताई गई है।
हालांकि दिल्ली में रक्त की दैनिक मांग और उपलब्धता से जुड़ा यह आंकड़ा CISF की ओर से जारी सूचना पर आधारित है। किसी ताजा सार्वजनिक सरकारी रिपोर्ट में इसकी अलग से पुष्टि नहीं मिल सकी।
दुर्घटना में घायल लोगों, गर्भवती महिलाओं, कैंसर रोगियों, थैलेसीमिया पीड़ितों और गंभीर ऑपरेशन वाले मरीजों को नियमित रूप से खून की जरूरत पड़ती है। खून को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। इसलिए नियमित स्वैच्छिक रक्तदान जरूरी है।
रक्तदान कौन कर सकता है
रक्तदान करने वाले व्यक्ति का स्वस्थ होना जरूरी है। ई-रक्तकोष के अनुसार सामान्य रूप से 18 से 65 वर्ष की आयु और कम से कम 45 किलो वजन वाला स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। अंतिम निर्णय रक्तदान केंद्र का डॉक्टर जांच के बाद करता है।
रक्तदान से पहले ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, वजन और सामान्य स्वास्थ्य की जांच की जाती है। बुखार, संक्रमण, कम हीमोग्लोबिन, हाल की सर्जरी या कुछ दवाओं के सेवन की स्थिति में डॉक्टर रक्तदान को कुछ समय के लिए टाल सकता है।
एक यूनिट खून से कितनी जान बच सकती है
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ई-रक्तकोष के अनुसार एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकती है। रक्त को लाल रक्त कोशिकाओं, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा जैसे अलग-अलग हिस्सों में बांटकर जरूरतमंद मरीजों को दिया जा सकता है।
रक्तदान के बाद शरीर में तरल की कमी सामान्यतः जल्द पूरी हो जाती है। रक्तदाता को कुछ समय आराम करने, पर्याप्त पानी पीने और हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है।
CISF और AIIMS ने जनता से क्या कहा
महानिदेशक प्रवीर रंजन ने CISF कर्मियों की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि वर्दीधारी बल के सदस्यों को समाज सेवा के काम में आगे रहना चाहिए। उन्होंने भविष्य में भी अधिक भागीदारी के साथ ऐसे शिविर आयोजित करने पर जोर दिया।
CISF और एम्स ने लोगों से रक्तदान करने, मित्रों और सहकर्मियों को प्रेरित करने तथा नियमित स्वैच्छिक रक्तदाता बनने की अपील की।
कार्यक्रम के अंत में प्रवीर रंजन ने डॉ. पूनम कौशिक को स्मृति चिह्न भेंट किया। एम्स के डॉक्टरों ने महानिदेशक और अतिरिक्त महानिदेशक मुख्यालय को पौधे देकर सहयोग और जीवन रक्षा का संदेश दिया।











