Digital Arrest Scam का पैसा कहां गया? CBI ने खोला APK और बैंक खातों का खेल

CBI ने ऑपरेशन चक्र-VI में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तीन डिजिटल अरेस्ट मामलों में ₹42.36 करोड़ की ठगी, बैंक खातों में रकम की परतें बनाने और हानिकारक APK से बैंक SMS पकड़ने का आरोप सामने आया है।
Digital Arrest Scam में APK फाइल और बैंक खातों के जरिए ₹42.36 करोड़ की रकम भेजने का प्रतीकात्मक चित्र

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर किसी व्यक्ति को एक या दो घंटे नहीं, बल्कि लगातार तीन महीने तक डराकर रखा गया। पुलिस अधिकारी बनकर कॉल करने वाले जालसाजों ने तीन मामलों में पीड़ितों से कुल 42.36 करोड़ रुपये ठग लिए। रकम मिलने के बाद उसे कई बैंक खातों में भेजा गया, नकद निकाला गया और बैंक के SMS पकड़ने के लिए मोबाइल फोन में हानिकारक APK फाइल तक लगाई गई।

केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने डिजिटल अरेस्ट अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन चक्र-VI में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ इन मामलों में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।

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CBI ने यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू की थी। जांच एजेंसी के अनुसार डिजिटल अरेस्ट अपराधों से जुड़े तीन बड़े मामलों में देश के 20 राज्यों के 89 स्थानों पर एक साथ तलाशी ली गई थी

तीन मामलों में 42.36 करोड़ रुपये की ठगी

CBI जिन तीन मामलों की जांच कर रही है, उनमें पीड़ितों को लंबे समय तक डिजिटल अरेस्ट में रखने का डर दिखाया गया। अपराधियों ने पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को भरोसा दिलाया कि वे किसी गंभीर आपराधिक मामले में फंस गए हैं।

पहला मामला BITS Pilani से जुड़ा है। इसमें पीड़ित को कथित रूप से तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे 7.67 करोड़ रुपये ठग लिए गए।

दूसरा मामला गुजरात का है। इसमें भी पीड़ित को तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराया गया। जालसाजों ने उससे 19.24 करोड़ रुपये ठग लिए।

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तीसरा मामला कर्नाटक का है। यहां पीड़ित को करीब एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे 15.45 करोड़ रुपये की ठगी की गई।

पहले गिरफ्तार हुए थे तीन आरोपी

इन मामलों की जांच के दौरान CBI ने पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें हरियाणा का आकाश, कोलकाता का राजा कर्मकार और श्रीमती ज्योति रानी शामिल हैं।

CBI के अनुसार आकाश ने अपने नाम से खोले गए बैंक खाते में ठगी के 1.95 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। आरोप है कि रकम खाते में आने के दिन ही उसे आगे भेज दिया गया।

राजा कर्मकार की कंपनी के बैंक खाते में कथित रूप से ठगी के 1.50 करोड़ रुपये भेजे गए थे। श्रीमती ज्योति रानी पर खाते में आई रकम का एक हिस्सा नकद निकालने और बाकी रकम आगे भेजने का आरोप है।

जांच एजेंसी का कहना है कि इन लोगों की कथित भूमिका ठगी से मिली रकम को प्राप्त करने और उसका रास्ता बदलने में सामने आई।

अब गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी कौन हैं

जांच आगे बढ़ने पर CBI ने पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें इटारसी के संकेत बस्तवार और पंकज दमाडे शामिल हैं।

CBI का आरोप है कि दोनों ने धोखे से एक बैंक खाता हासिल किया। उस खाते में डिजिटल अरेस्ट से ठगी गई रकम स्वीकार की गई और फिर पैसे को अलग-अलग जगह भेजने में सक्रिय भूमिका निभाई गई। इसका मकसद रकम का पता लगाना कठिन बनाना था।

इसके अलावा आरिफ उर्फ किंग भाई, नई दिल्ली के हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के शशांक सिंह उर्फ रवि को भी गिरफ्तार किया गया है।

जांच एजेंसी के अनुसार इन तीनों ने वह बैंक खाता उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई, जिसमें डिजिटल अरेस्ट के पीड़ित से पैसा मंगाया गया था। बाद में इस रकम को कई अन्य खातों में भेजा गया।

फोन में APK डालकर बैंक के SMS पकड़ने का आरोप

CBI की कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला तथ्य एक हानिकारक APK फाइल से जुड़ा है। जांच एजेंसी के मुताबिक आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और शशांक सिंह उर्फ रवि ने बैंक खाता धारक के मोबाइल फोन में यह फाइल लगाई थी।

आरोप है कि इसकी मदद से बैंक की ओर से आने वाले SMS अलर्ट पकड़ लिए जाते थे। इसके बाद खाते को खाता धारक की जानकारी के बिना चलाया जा सकता था।

APK एंड्रॉयड फोन में एप लगाने वाली फाइल होती है। यदि ऐसी फाइल किसी अनजान व्यक्ति, WhatsApp संदेश या संदिग्ध लिंक के जरिए मिले तो उसे फोन में नहीं लगाना चाहिए। हानिकारक फाइल फोन के संदेश, बैंक की सूचना और दूसरी निजी जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है।

Digital Arrest Scam में पैसा कैसे छिपाया जाता है

इस कार्रवाई से पता चलता है कि डिजिटल अरेस्ट करने वाले जालसाज अकेले काम नहीं करते। पीड़ित को डराने वाले व्यक्ति और ठगी की रकम संभालने वाले लोग अलग हो सकते हैं।

पीड़ित से रकम मिलने के बाद उसे एक ही खाते में अधिक समय तक नहीं रखा जाता। पैसा दूसरे खातों में भेजा जाता है। वहां से रकम को और खातों में बांटा जा सकता है या उसका कुछ हिस्सा नकद निकाल लिया जाता है। इस प्रक्रिया को रकम की परतें बनाना कहा जाता है।

ऐसे बैंक खातों को आम तौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है। गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले I4C ने भी लोगों को अपना बैंक खाता किराये पर देने या बेचने से मना किया है। अवैध रकम खाते में आने पर खाता धारक को गिरफ्तारी समेत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

Digital Arrest क्या है

डिजिटल अरेस्ट जालसाजों की बनाई हुई एक कहानी है। अपराधी पुलिस, CBI, कस्टम, नारकोटिक्स विभाग या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन करते हैं। पीड़ित से कहा जाता है कि उसका आधार कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंक खाता किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है।

इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर उसे वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया जाता है। अपराधी नकली पहचान पत्र, गिरफ्तारी वारंट या पुलिस कार्यालय जैसा कमरा दिखा सकते हैं। फिर जांच, जमानत या रकम की पुष्टि के बहाने पैसा किसी कथित सुरक्षित खाते में भेजने को कहा जाता है।

कोई भी असली जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट करके बैंक खाते में पैसा भेजने के लिए नहीं कहती।

डिजिटल अरेस्ट की कॉल आए तो क्या करें

ऐसी कॉल आते ही घबराकर भुगतान न करें। कॉल काटकर परिवार के किसी सदस्य और स्थानीय पुलिस को जानकारी दें। कॉल करने वाले व्यक्ति के दिए नंबर पर वापस संपर्क करने के बजाय संबंधित एजेंसी का आधिकारिक नंबर तलाशकर पुष्टि करें।

किसी के कहने पर APK फाइल न लगाएं। अपना OTP, बैंक पासवर्ड, आधार विवरण, स्क्रीन शेयरिंग कोड या मोबाइल बैंकिंग की जानकारी साझा न करें। जालसाज जिसे “सुरक्षित खाता” बता रहे हों, उसमें कोई रकम न भेजें।

यदि पैसा ट्रांसफर हो चुका है तो तुरंत 1930 पर फोन करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। सरकार के अनुसार 1930 पर जल्द सूचना देने से संदिग्ध लेनदेन को रोकने या ठगी की रकम फ्रीज कराने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

आठ गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क की तलाश जारी

पांच नई गिरफ्तारियों के बाद इन मामलों में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या आठ हो गई है। CBI का कहना है कि जांच में एक संगठित नेटवर्क की जानकारी सामने आ रही है। यह नेटवर्क ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे कई खातों में बांटने और पैसे का पता छिपाने में शामिल था।

व्यापक नेटवर्क से जुड़े बाकी आरोपियों का पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। तीनों मामलों में आगे की जांच चल रही है।

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27-09-2026