बाबलू डेयरी में किसने चलवाई गोलियां? डिजिटल निगरानी से खुली गांजा, वसूली और बदले की कहानी

चाकूबाजी के मामले में पकड़े गए आरोपियों ने बाबलू डेयरी फायरिंग की कड़ी खोल दी। जानिए गोलियां चलने के पीछे पुलिस ने क्या वजह बताई।
दिल्ली फायरिंग केस

मदनपुर खादर की बाबलू डेयरी में रात के अंधेरे में चलीं गोलियां किसी अचानक हुए झगड़े का परिणाम नहीं थीं। दिल्ली पुलिस का दावा है कि इसके पीछे गांजा बेचने का दबाव, कथित प्रोटेक्शन मनी और बदला लेने के लिए बनाई गई योजना थी। कालिंदी कुंज पुलिस ने प्रत्यक्षदर्शी के बयान और डिजिटल निगरानी से सबसे पहले कथित साजिशकर्ता तक पहुंच बनाई। इसके बाद दक्षिण-पूर्व जिले के स्पेशल स्टाफ ने तीन अन्य आरोपियों को पकड़ लिया। फायरिंग करने के आरोपी बताए गए दो युवक बाद में बाहरी जिले की पुलिस के हाथ लगे।

बाबलू डेयरी के कार्यालय में चलीं गोलियां

दिल्ली क्राइम की यह वारदात 2 सितंबर 2026 की रात हुई। रात 11 बजकर 45 मिनट पर पुलिस को मदनपुर खादर की जेजे कॉलोनी स्थित बाबलू डेयरी में फायरिंग की सूचना मिली।

पुलिस के अनुसार, ढोलवाला के कार्यालय के अंदर दो से तीन गोलियां चलाई गई थीं। शिकायतकर्ता 23 वर्षीय रोहित के बाएं हाथ की बीच वाली उंगली में चोट लगी। घटनास्थल पर रोहित के साथ 25 वर्षीय तरुण उर्फ रंजन भी मिला।

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जांच में भूपेंद्र उर्फ गुड्डू उर्फ ढोलवाला, मोनू, दीपक भगत, रवि उर्फ बाबा और कुछ अन्य लोगों के नाम सामने आए। उसी इमारत के भूतल पर मौजूद एक स्वतंत्र गवाह ने झगड़े और उसके बाद हुई फायरिंग देखने की बात कही।

डिजिटल निगरानी से पकड़ा गया पहला आरोपी

सूचना मिलते ही कालिंदी कुंज थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। दक्षिण-पूर्व जिले के रात्रि जांच अधिकारी श्रीकेश कुमार राय, आईपीएस भी घटनास्थल पर पहुंचे।

पुलिस ने गवाह की जानकारी और डिजिटल निगरानी के बाद 33 वर्षीय भूपेंद्र उर्फ गुड्डू उर्फ ढोलवाला को गिरफ्तार किया। वह नन्नूमल का पुत्र है और मदनपुर खादर के बी-480 में रहता है। पुलिस ने उसे वारदात का साजिशकर्ता बताया और अदालत से तीन दिन की हिरासत ली।

तकनीकी निगरानी के आधार पर स्पेशल स्टाफ ने इसके बाद तीन अन्य आरोपियों को पकड़ा।

इनमें 30 वर्षीय दीपक उर्फ भगत शामिल है। हरि किशन का पुत्र दीपक मदनपुर खादर के चौहान मोहल्ले में मुकेश चौहान के मकान में रहता है। उसका मूल निवास गांव सबदलपुर, थाना नरसैना, जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश बताया गया है।

दूसरा आरोपी 23 वर्षीय अविनाश उर्फ राहुल है। वह इंदु भूषण का पुत्र है और बाबलू डेयरी, मदनपुर खादर एक्सटेंशन की गली नंबर एक स्थित मकान संख्या बी-7 में रहता है। पुलिस ने उसे सहरसा जिले का मूल निवासी बताया है।

तीसरा आरोपी 21 वर्षीय राज है। वह रजीत राम का पुत्र है और बाबलू डेयरी की गली नंबर एक स्थित मकान संख्या बी-57 में रहता है। प्रेस रिलीज में उसका मूल पता गांव कलवारी, थाना बस्ती, बिहार दर्ज किया गया है।

वीडियो देखेंः

तीन दिन बाद चाकूबाजी ने खोला फायरिंग का केस

इस दिल्ली क्राइम स्टोरी का सबसे अहम मोड़ 5 सितंबर को आया। बाहरी जिले के राज पार्क थाना क्षेत्र में चाकूबाजी की पीसीआर कॉल मिली। सूचना जीडी संख्या 6ए में दर्ज की गई।

जांच के दौरान पुलिस ने मोनू और अभिषेक उर्फ बचकंडा को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि अभिषेक ने पूछताछ में बाबलू डेयरी फायरिंग में अपनी और मोनू की भूमिका स्वीकार की।

मोनू, भीम सिंह का पुत्र है और नेब सराय के पास दुर्गा विहार स्थित ए-385 में रहता है। अभिषेक उर्फ बचकंडा, दिनेश कुमार का पुत्र है और पुल प्रह्लादपुर के पास सेवा भारती, लाल कुआं स्थित एफ-19ए का निवासी है।

दोनों की गिरफ्तारी राज पार्क थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 535/2026 में हुई। मुकदमा भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1), 3(5) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत दर्ज किया गया है।

गांजा बेचने से इनकार या प्रोटेक्शन मनी, क्या थी वजह?

पुलिस पूछताछ में भूपेंद्र उर्फ गुड्डू ने आरोप लगाया कि उसका ममेरा भाई दीपक उर्फ परचा उसे इलाके में गांजा बेचने के लिए कह रहा था। पुलिस के मुताबिक, गोविंदपुरी निवासी दीपक परचा गांजे के कारोबार और जुए से जुड़ा रहा है। उसके खिलाफ पहले से चार आपराधिक मामले बताए गए हैं।

भूपेंद्र के बयान के अनुसार, तरुण उर्फ रंजन ने गांजा बेचे जाने का विरोध किया। उसने कथित रूप से प्रोटेक्शन के नाम पर रकम मांगी और धमकी दी। पुलिस का दावा है कि इसके बाद दीपक परचा ने अपने साथियों के साथ जवाबी हमला करने की योजना बनाई, जिसके बाद बाबलू डेयरी के कार्यालय में गोलियां चलीं।

यह आरोप अभी पुलिस जांच का हिस्सा हैं। अदालत में साक्ष्य पेश होने और सुनवाई पूरी होने के बाद ही आरोपों की अंतिम पुष्टि होगी।

दो टीमों ने कैसे जोड़ीं बिखरी कड़ियां

पहली जांच टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह ने किया। इसमें इंस्पेक्टर किशोर, एसआई आशीष, रविंदर, अजय व प्रवीण, हेड कांस्टेबल कुलश्रेष्ठ, भरत, हरीश, मनीष व राहुल तथा कांस्टेबल दिनेश और अभय शामिल रहे।

दूसरी टीम इंस्पेक्टर राजेंद्र डागर के नेतृत्व में बनी। इसमें इंस्पेक्टर शुभम चौधरी, एसआई नागेंद्र कुमार, राजबीर सिंह, मुनेश व विनोद, एएसआई अनिल, हेड कांस्टेबल राजेश, विपिन, महेंद्र, रोशन व प्रवेश तथा कांस्टेबल छोटूराम और मोहित शामिल थे।

कार्रवाई एसीपी सरिता विहार अनिल कुमार शर्मा की निगरानी, डीसीपी दक्षिण-पूर्व जिला विनीत कुमार, आईपीएस की समग्र निगरानी और संयुक्त पुलिस आयुक्त दक्षिणी रेंज विजय कुमार, आईपीएस के नेतृत्व में हुई।

चारों गिरफ्तार आरोपी पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस मुख्य साजिशकर्ता बताए गए दीपक परचा, रवि उर्फ बाबा और अन्य फरार लोगों की तलाश कर रही है।

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Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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01-10-2026