ISRO के रॉकेट मिशनों से जुड़े रसायनी केंद्र की सुरक्षा CISF के हाथ, जानिए क्यों अहम है यह परिसर

CISF ने महाराष्ट्र के रसायनी स्थित ISRO प्रोपेलेंट कॉम्प्लेक्स की सुरक्षा संभाल ली है। यह परिसर PSLV, GSLV और LVM3 के लिए जरूरी ऑक्सीडाइजर उपलब्ध कराता है।
रसायनी प्रोपेलेंट कॉम्प्लेक्स के सुरक्षा ग्रहण समारोह में CISF और ISRO के अधिकारी

भारत के PSLV, GSLV और LVM3 जैसे प्रक्षेपण यानों के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने वाले एक अहम केंद्र की सुरक्षा अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल संभालेगा। CISF ने 1 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित इसरो के प्रोपेलेंट कॉम्प्लेक्स रसायनी की सुरक्षा औपचारिक रूप से अपने हाथों में ले ली।

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अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत आने वाला यह परिसर इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, SDSC SHAR की महत्वपूर्ण इकाई है। रसायनी केंद्र मुंबई से लगभग 80 किलोमीटर और पनवेल से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है।

महाराष्ट्र में CISF की सुरक्षा वाला 32वां महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान

रसायनी का प्रोपेलेंट कॉम्प्लेक्स महाराष्ट्र में CISF की सुरक्षा में आने वाला 32वां अति-महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान बन गया है। इस तैनाती के बाद प्रदेश में राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की सुरक्षा में CISF की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी इकाई होने के कारण इस परिसर की सुरक्षा सामान्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों से अलग मानी जाती है। यहां सुरक्षा के साथ कामकाज को बिना बाधा जारी रखने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने की व्यवस्था जरूरी है।

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CISF को देश के हवाई अड्डों, परमाणु प्रतिष्ठानों, अंतरिक्ष केंद्रों, बंदरगाहों, बिजली संयंत्रों और महत्वपूर्ण सरकारी भवनों की सुरक्षा का अनुभव है। रसायनी में तैनाती का उद्देश्य भी इसी अनुभव का इस्तेमाल करते हुए पेशेवर सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है।

PSLV, GSLV और LVM3 से कैसे जुड़ा है रसायनी केंद्र

प्रोपेलेंट कॉम्प्लेक्स रसायनी में पीएसएलवी, जीएसएलवी और एलवीएम3 जैसे प्रक्षेपण यानों के लिए जरूरी ‘अर्थ-स्टोरेबल ऑक्सीडाइजर’ उपलब्ध कराया जाता है। आसान भाषा में समझें तो ऑक्सीडाइजर रॉकेट के प्रणोदन तंत्र में ईंधन को जलने में मदद करता है।

अर्थ-स्टोरेबल का अर्थ ऐसी सामग्री से है जिसे सामान्य धरातलीय परिस्थितियों में तय अवधि तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके भंडारण, संचालन और आपूर्ति के दौरान तय सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी होता है।

PSLV ने भारत के कई उपग्रहों और अंतरिक्ष अभियानों को सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया है। GSLV भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण में इस्तेमाल होता है, जबकि LVM3 भारत का भारी प्रक्षेपण यान है। इन प्रक्षेपण यानों से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने के कारण रसायनी केंद्र की भूमिका राष्ट्रीय महत्व की हो जाती है।

समारोह में सौंपी गई ‘सुरक्षा कुंजी’

सुरक्षा कार्यभार ग्रहण समारोह में CISF के डीओएस-II के डीआईजी अजय कुमार खंडेलवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रोपेलेंट कॉम्प्लेक्स रसायनी के जनरल हेड संजय जैन ने CISF के असिस्टेंट कमांडेंट रवि तेजा आर. को औपचारिक रूप से ‘सुरक्षा कुंजी’ सौंपी।

यह सुरक्षा कुंजी CISF द्वारा परिसर की सुरक्षा जिम्मेदारी संभालने का प्रतीक है। समारोह की शुरुआत गार्ड ऑफ ऑनर, दीप प्रज्ज्वलन और CISF का झंडा फहराने के साथ हुई।

इस अवसर पर BARC मुंबई के सीनियर कमांडेंट कार्तिकेयन के., पीएंडजीए प्रमुख शारिक आलम और वरिष्ठ पीएंडएसओ आर. गोपाल भी मौजूद रहे। प्रोपेलेंट कॉम्प्लेक्स, अग्निशमन सेवा, डीजीआर सुरक्षा और CISF के लगभग 120 अधिकारियों तथा जवानों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

ISRO प्रबंधन के साथ मिलकर काम करेगी CISF

डीआईजी अजय कुमार खंडेलवाल ने कहा कि रसायनी के प्रोपेलेंट कॉम्प्लेक्स में CISF की तैनाती भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े अति-संवेदनशील प्रतिष्ठान की सुरक्षा के लिए अहम कदम है।

उन्होंने कहा कि केंद्र की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए उच्च स्तर की सतर्कता और विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है। CISF, इसरो प्रबंधन के साथ मिलकर ऐसे सुरक्षा इंतजाम करेगी जिनसे परिसर का काम सुचारू रूप से चलता रहे।

संजय जैन बोले, सुरक्षा को मिली नई ताकत

प्रोपेलेंट कॉम्प्लेक्स रसायनी के जनरल हेड संजय जैन ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में इस परिसर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए केंद्र का सुरक्षित तरीके से काम करना राष्ट्रीय महत्व का विषय है।

उनके मुताबिक CISF की तैनाती से परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत मिली है। इसरो और CISF पहले से कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में साथ काम करते रहे हैं। CISF के अनुभव और प्रबंधन के सहयोग से रसायनी परिसर की सुरक्षा तथा कामकाजी तैयारियों में सुधार आने की उम्मीद है।

रसायनी में CISF की तैनाती क्यों महत्वपूर्ण है

प्रोपेलेंट से जुड़ी इकाइयों में आग, रिसाव, अनधिकृत प्रवेश और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा जैसे कई पहलुओं पर नजर रखनी पड़ती है। CISF की तैनाती के बाद परिसर में प्रवेश नियंत्रण, निगरानी, आपात प्रतिक्रिया और संवेदनशील हिस्सों की सुरक्षा को एकीकृत रूप से संभाला जा सकेगा।

यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब भारत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है। ऐसे में प्रक्षेपण केंद्रों के साथ उन सहायक इकाइयों की सुरक्षा भी जरूरी है, जो रॉकेट अभियानों के लिए सामग्री और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराती हैं।

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21-09-2026