crime story : साधना जनवरी 2006 में जेल में बंद जानकी की मदद से पैरोल पर बाहर निकली थी। इसके बाद वह कभी जेल वापस नहीं लौटी। इस बीच उसने मंदिर में शादी की और पूजा बनकर हरिद्वार में रहने लगी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आखिरकार 20 साल से फरार उम्र कैद की सजा प्राप्त साधना उर्फ पूजा को गिरफ्तार कर लिया।
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मामला मासूम बच्चे के अपहरण और हत्या से जुड़ा हुआ है।
crime story : क्या था मामला
क्राइम ब्रांच के डीसीपी हर्ष इंदौरा के मुताबिक दिल्ली पुलिस के अनुसार 6 जनवरी 1990 को दिल्ली के आजादपुर टी-पॉइंट से 10 साल का एक बच्चा गायब हो गया था। डीसीपी के मुताबिक जगदीश चंद और वासुदेव नाम के दो गवाहों ने शाम करीब 5:30 बजे साधना को बच्चे का हाथ पकड़कर जीटी रोड पार करते हुए देखा था।
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जांच के दौरान साधना और उसके साथी राज कुमार को जहांगीरपुरी से पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक साधना और राज कुमार बिना शादी के पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे। बच्चे के पिता और शिकायतकर्ता बलवंत राम तथा उनके परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया था। इसी बात का बदला लेने के लिए साधना और राजकुमार ने उनके बच्चे को किडनैप किया।
ट्रायल के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि साधना वह आखिरी व्यक्ति थी जिसे बच्चे के साथ देखा गया था। पुलिस के अनुसार उसने राज कुमार की मौजूदगी के बारे में भी जानकारी छिपाई थी और साजिश में उसकी भूमिका पाई गई। इसके बाद अदालत ने साधना को उम्रकैद की सजा सुनाई।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक अपीलीय अदालत ने भी उसकी सजा को बरकरार रखा।
crime story : 2005 में मिली पैरोल, 2006 में नहीं किया सरेंडर
साधना 9 जनवरी 1990 से केंद्रीय जेल में बंद थी। 27 दिसंबर 2005 को उसे पैरोल पर रिहा किया गया। बाद में मेडिकल आधार पर उसकी पैरोल तीन सप्ताह के लिए बढ़ाई गई। उसे 18 जनवरी 2006 को वापस जेल में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन वह नहीं पहुंची यहीं से उसकी फरारी शुरू हुई।
साधना से पूजा बन गई पहचान
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी से बचने के लिए साधना ने अपना नाम बदलकर पूजा रख लिया। पुलिस के मुताबिक उसकी आखिरी पैरोल का इंतजाम दिल्ली के तिलक नगर निवासी राज कुमार ने किया था। यह व्यवस्था जानकी के कहने पर की गई थी। जानकी साधना के साथ जेल में रह चुकी थी और पहले भी पैरोल दिलाने में उसकी मदद कर चुकी थी।
पैरोल के दौरान साधना राज कुमार के साथ रही। इसके बाद उसने दिल्ली छोड़कर दूसरी जगह रहने का फैसला किया। नोएडा में नौकरी के दौरान हुई केशव से मुलाकात साधना ने बाद में नोएडा की एक निजी कंपनी में काम करना शुरू किया। वहीं उसकी मुलाकात केशव नाम के एक कारपेंटर से हुई। इसके बाद वह केशव के साथ रहने लगी। इसके बाद दोनों दिल्ली के मुकुंदपुर चले गए।
मुकुंदपुर में वे करीब पांच साल तक रहे। इसके बाद दोनों हरिद्वार चले गए।
हरिद्वार में मंदिर में शादी
पुलिस के अनुसार हरिद्वार पहुंचने के बाद साधना ने केशव से मंदिर में शादी की। उसने अपने दस्तावेजों में केशव को पति बताया और पूजा नाम का इस्तेमाल जारी रखा। इस दौरान उसकी पुरानी पहचान साधना के रूप में सामने नहीं आई और वह लंबे समय तक पुलिस की पहुंच से बाहर रही।
पुराने संपर्कों से मिला हरिद्वार का सुराग
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के इंटर-स्टेट सेल ने साधना की तलाश के लिए पुराने संपर्कों और उसके परिवार से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई। इस जांच में ASI सुरेश गुप्ता की अहम भूमिका रही। पुलिस को आखिरकार जानकारी मिली कि साधना हरिद्वार में दूसरी पहचान के साथ रह रही है।
इसके बाद वहां उसकी मौजूदगी की पुष्टि की गई।
इंटर-स्टेट सेल की टीम पहुंची हरिद्वार
जानकारी की पुष्टि होने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम हरिद्वार गई। इस टीम में SI अमित कुमार, ASI सुरेश गुप्ता, HC बृजेश कुमार, HC दिनेश कुमार, W/HC मनीषा और W/Ct. हीरा शामिल थे।
टीम ने इंस्पेक्टर पंकज मलिक और ACP/ISC रमेश चंद्र लांबा की देखरेख में कार्रवाई की।
पुलिस का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने और निगरानी के बाद यह पुष्टि हो गई कि पूजा नाम से रह रही महिला वही साधना है जिसे 1990 के मामले में उम्रकैद की सजा हुई थी। इसके बाद उसे हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया गया।












