क्या आप जानते हैं कि गूगल का डिजीकवच कैसे आपको फ्रॉड से बचाता है

Google DigiKavach और Circle to Search जैसे फीचर संदिग्ध मैसेज, लिंक और ऑनलाइन ऑफर की जांच आसान बना सकते हैं। दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह से जानिए इसका इस्तेमाल कैसे करें और साइबर फ्रॉड के किन संकेतों से सतर्क रहें।
गूगल डिजीकवच कैसे फ्राड से बचाता है

साइबर फ्रॉड से बचने की लड़ाई में गूगल भी आपके साथ है। गूगल का डिजीकवच कार्यक्रम और Circle to Search जैसे फीचर संदिग्ध टेक्स्ट, लिंक और ऑफर की पहचान करने में यूजर्स की मदद कर सकते हैं। इसका फायदा यह है कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले ही उसके बारे में जानकारी खोजी जा सकती है। खासकर एसएमएस, व्हाट्सएप्प मैसेज, फर्जी निवेश ऑफर और संदिग्ध वेबसाइट लिंक की जांच में यह तरीका उपयोगी हो सकता है।

और जानेंः गूगल का बार्ड -सारी जानकारी सिर्फ यहां

गूगल डिजीकवच क्या है

डिजीकवच गूगल का भारत केंद्रित ऑनलाइन फ्रॉड रोकथाम कार्यक्रम है। इसे 2023 में शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम का मकसद लोगों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी लोन ऐप, निवेश धोखाधड़ी, म्यूल अकाउंट और दूसरे ऑनलाइन घोटालों के बारे में जागरूक करना है।डिजिकवच के तहत गूगल बैंकों, नियामक संस्थाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करता है। इसमें तकनीक, जागरूकता अभियान और ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े संकेतों की जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है।

और जानेंः साइबर फ्रॉड कैसे रोकें: बैंक, पुलिस और DoT मिलकर कैसे बचा सकते हैं आपका पैसा

आज ज्यादातर साइबर ठगी किसी तकनीकी कमजोरी से नहीं बल्कि डर, लालच और जल्दबाजी पैदा करके शुरू होती है। ठग मैसेज भेजकर कहते हैं कि आपका बैंक खाता बंद हो जाएगा, सिम ब्लॉक हो जाएगा, केवाईसी तुरंत अपडेट करनी होगी या किसी मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे भेजने होंगे।

इसी तरह शेयर बाजार, क्रिप्टो, आईपीओ और ट्रेडिंग के नाम पर कई गुना रिटर्न देने का दावा भी किया जाता है।

Circle to Search से संदिग्ध लिंक कैसे जांचें

Circle to Search सपोर्ट करने वाले एंड्रायड फोन में स्क्रीन पर दिखाई दे रहे टेक्स्ट, लिंक, फोटो या किसी ऑफर के बारे में वहीं से जानकारी खोजी जा सकती है। यूजर होम बटन या नेविगेशन बार को कुछ देर दबाकर Circle to Search सक्रिय कर सकता है। इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई दे रहे संदिग्ध टेक्स्ट, लिंक या ऑफर को घेरा या हाइलाइट किया जा सकता है।

गूगल उससे जुड़ी जानकारी खोजता है। इससे यूजर यह समझ सकता है कि सामने दिख रहा दावा, वेबसाइट या ऑफर भरोसेमंद है या उसमें साइबर फ्रॉड के संकेत मौजूद हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि जांच के लिए संदिग्ध लिंक को पहले खोलना जरूरी नहीं है।

WhatsApp और SMS स्कैम में कैसे मिल सकती है मदद

बड़ी संख्या में साइबर ठगी SMS, WhatsApp, Telegram और सोशल मीडिया के जरिए शुरू होती है। मैसेज को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह बैंक, सरकारी विभाग, कूरियर कंपनी, पुलिस या किसी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म का लगे। अगर यूजर ऐसे मैसेज में दिए लिंक पर सीधे क्लिक करने की बजाय पहले उसके टेक्स्ट, वेबसाइट नाम या ऑफर की जांच करे तो धोखाधड़ी का खतरा कम किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए किसी मैसेज में लिखा हो कि अगले 10 मिनट में भुगतान नहीं किया तो बैंक खाता बंद हो जाएगा, तो यह तुरंत सतर्क होने का संकेत है। इसी तरह बहुत कम समय में असामान्य मुनाफे का दावा करने वाले निवेश ऑफर को भी बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए।

फर्जी लिंक पहचानने में क्या देखें

साइबर अपराधी अक्सर असली वेबसाइट जैसे दिखने वाले लिंक बनाते हैं। इनमें बैंक, ई-कॉमर्स कंपनी, सरकारी पोर्टल या दूसरी जानी-पहचानी कंपनी का नाम शामिल हो सकता है। लिंक को देखकर वेबसाइट का पूरा नाम पढ़ें। स्पेलिंग में छोटी सी गलती भी फर्जी वेबसाइट का संकेत हो सकती है।

अचानक मिले मैसेज में अगर OTP, UPI PIN, कार्ड नंबर, CVV या बैंक पासवर्ड मांगा जा रहा है तो ऐसी जानकारी बिल्कुल साझा न करें। किसी भी बैंक या वैध सरकारी एजेंसी को इन गोपनीय जानकारियों की जरूरत फोन या WhatsApp पर नहीं होती।

iPhone यूजर कैसे कर सकते हैं जांच

Circle to Search मुख्य रूप से सपोर्टेड Android डिवाइस पर उपलब्ध है। iPhone यूजर संदिग्ध मैसेज या लिंक का स्क्रीनशॉट लेकर Google Lens के जरिए टेक्स्ट, वेबसाइट या दूसरी जानकारी खोज सकते हैं। टैबलेट पर भी Google ऐप और Lens की मदद से संदिग्ध कंटेंट की जांच की जा सकती है।

फीचर की उपलब्धता डिवाइस और सॉफ्टवेयर वर्जन के अनुसार अलग हो सकती है।

इन संकेतों पर तुरंत सतर्क हो जाएं

किसी मैसेज में तुरंत भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है तो पहले उसकी जांच करें। अगर कहा जा रहा है कि आपका खाता, सिम या क्रेडिट कार्ड तुरंत बंद हो जाएगा तो संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर खुद संपर्क करें। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए निवेश ऑफर में असामान्य रिटर्न का दावा किया जा रहा हो तो पैसे ट्रांसफर करने से बचें।

अनजान मोबाइल नंबर से आए लिंक, गलत स्पेलिंग वाले वेबसाइट पते और व्यक्तिगत बैंक जानकारी मांगने वाले फॉर्म साइबर फ्रॉड का संकेत हो सकते हैं।

AI या सर्च रिजल्ट को अंतिम प्रमाण न मानें

Circle to Search और Google Lens जैसे टूल संदिग्ध कंटेंट के बारे में जानकारी खोजने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी लिंक या ऑफर के सुरक्षित होने का अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए। अगर मैसेज बैंक, पुलिस, सरकारी योजना, लोन, निवेश या केवाईसी से जुड़ा है तो आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या हेल्पलाइन से पुष्टि करें।

यही आदत कई तरह के साइबर फ्रॉड से बचा सकती है।

क्षेत्रीय भाषाओं में आने वाले स्कैम भी बड़ी समस्या

भारत में साइबर अपराधी हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी मैसेज भेज रहे हैं। स्थानीय भाषा में आया मैसेज लोगों को ज्यादा भरोसेमंद लग सकता है। इसलिए भाषा देखकर किसी संदेश पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

फोन पर आया हर संदिग्ध लिंक, निवेश ऑफर या भुगतान अनुरोध पहले जांचना बेहतर है।

मोबाइल को साइबर फ्रॉड से बचाने की तीन जरूरी आदतें

संदिग्ध लिंक को तुरंत न खोलें। पहले उसके बारे में जानकारी खोजें। OTP, UPI PIN, कार्ड CVV और बैंक पासवर्ड किसी व्यक्ति से साझा न करें। अगर पैसे की साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत कार्रवाई करें। वित्तीय साइबर फ्रॉड की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/Webform/Accept.aspx पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

एक छोटी जांच बचा सकती है बड़ी रकम

डिजीकवच, Circle to Search और Google Lens जैसे फीचर मोबाइल पर आए संदिग्ध कंटेंट की शुरुआती जांच आसान बना सकते हैं। लेकिन सबसे प्रभावी सुरक्षा अभी भी यूजर की अपनी सतर्कता है।

अगर किसी मैसेज में डर दिखाया जा रहा है, बहुत ज्यादा लालच दिया जा रहा है या तत्काल फैसला लेने के लिए कहा जा रहा है, तो भुगतान या क्लिक करने से पहले उसकी जांच जरूर करें।

साइबर अपराधी चाहते हैं कि आप सोचने से पहले क्लिक करें। इसलिए ऑनलाइन सुरक्षा का आसान नियम है कि पहले जांचें, फिर फैसला करें।

Support India Vistar
Picture of inspector raman kumar
inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | क्या आप जानते हैं कि गूगल का डिजीकवच कैसे आपको फ्रॉड से बचाता है | PM Kisan Verification 2026: यूपी के 15.35 लाख किसानों की किस्त क्यों रुकी? 30 सितंबर की तारीख का सच जानिए | IND vs AFG Asian Games 2026: एक गेंद भी नहीं फेंकी गई, फिर भारत सेमीफाइनल में कैसे पहुंचा? | WhatsApp Investment Scam से कैसे बचें: Fake Trading App और फर्जी निवेश वेबसाइट की पहचान | वरिष्ठ नागरिकों का Heart Health कैसे रखें बेहतर? लखनऊ में GSCC और Max Hospital ने शुरू की नई सुविधा | सोशल मीडिया का बच्चों पर असरः हिंसक reels को lika-share करना क्यों पड़ सकता है भारी | सपने में छिपकली दिख जाए तो क्या है इसका मतलब समझ लीजिए | Asian Games 2026: भारत की महिला कबड्डी टीम ने जीता Gold, CISF की ऋतु श्योराण ने फिर रचा इतिहास | फोन का Wi-Fi और Bluetooth कब बंद रखें? बाहर निकलते ही बदलें ये सेटिंग, वरना बढ़ सकता है प्राइवेसी का खतरा | CISF जवानों के तनाव और मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा कदम, IHBAS से 3 साल का समझौता |
29-09-2026