सोशल मीडिया का बच्चों पर असरः हिंसक reels को lika-share करना क्यों पड़ सकता है भारी

बच्चों और किशोरों की Feed में हिंसक Reels पहुंचना क्यों चिंता का विषय है? दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह से जानिए Reels की लत, Crowd Rejection और नुकसानदेह कंटेंट को Report करने का तरीका।
सोशल मीडिया का बच्चों पर असर: हिंसक Reels क्यों बढ़ा रही हैं चिंता?

मोबाइल खोले नहीं कि reels, shorts की भारमार सामने होती है। स्क्रालिंग शुरू हो जाती है लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि बच्चों, किशोरों औऱ युवाओं की फीड में मनोरंजन के साथ साथ ऐसे वीडियो भी पहुंच रहे हैं, जिनमें हिंसा, अपराध, बदला या कानून तोड़नेवाली छवि को प्रभावशाली तरीके से ताकत औऱ लोकप्रियता से जोड़कर दिखाया जाता है। अब बड़ा सवाल ये है कि ऐसे वीडियो का क्या असर पड़ रहा है ? इस तरह के Reels या shorts को बार-बार देखना, Like करना या Share करना क्या इसी तरह के और कंटेंट को उनकी Feed तक पहुंचाने में मदद करता है?

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यहीं Crowd Rejection यानी सामूहिक अस्वीकृति का विचार महत्वपूर्ण हो जाता है। इसका आसान मतलब है कि समाज हिंसा और अपराध को आकर्षक बनाकर पेश करने वाले कंटेंट को लोकप्रिय बनाने में अपनी भूमिका न निभाए। ऐसे वीडियो को Like, Share और अनावश्यक Comment देने के बजाय जरूरत पड़ने पर Report किया जाए।

सोशल मीडिया का बच्चों पर असर क्यों बना चिंता का विषय ?

बच्चों, किशोरों या युवाओं के लिए मोबाइल अब केवल पढ़ाई और बातचीत का साधन ही नहीं है, रील्स, शार्ट्स और दूसरे वीडियो उनके खाली समय का बड़ा हिस्सा ले रहे हैं। समस्या सिर्फ ज्यादा मोबाइल देखने तक सीमित नहीं है बल्कि फीड में किस तरह का कंटेंट आ रहा है वो ज्यादा अहम हो जाता है।

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अगर कोई किशोर अपराध, हिंसा, हथियार या बदले से जुड़े वीडियो लगातार देखता है और उनके साथ प्रतिक्रिया करता है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उसकी रुचि के संकेतों के आधार पर उसी तरह की सामग्री और दिखा सकते हैं। इसलिए सवाल सिर्फ रील्स की लत का नहीं है। सवाल उस कंटेंट का भी है जिसे किशोर लगातार देख रहा है।

हिंसक रील्स को शेयर करना क्यों उल्टा पड़ सकता है ?

अक्सर कोई आपत्तिजनक वीडियो दिखने पर लोग उसे यह कहते हुए दूसरों को भेज देते हैं कि “देखिए सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है।” लेकिन यही Share उस वीडियो की पहुंच को और बढ़ा सकता है।

Like, Comment, Share और वीडियो पर होने वाली दूसरी गतिविधियां किसी पोस्ट के Engagement का हिस्सा होती हैं। इसलिए हिंसक या घृणास्पद सामग्री का विरोध करते हुए भी उसे अनावश्यक रूप से फैलाना सही रणनीति नहीं है। बेहतर तरीका है कि गंभीर नियम उल्लंघन दिखाई देने पर उस पोस्ट को Report किया जाए।

“धारा 302” गाने का उदाहरण

इस मुद्दे को समझाने के लिए अमित सैनी रोहतकिया द्वारा गाया गया लोकप्रिय हरियाणवी गाना “धारा 302” एक उदाहरण के रूप में सामने रखा गया है। इस गाने का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर Reels और दूसरे छोटे वीडियो बनाने में किया जाता रहा है। यहां मुद्दा किसी कलाकार या गाने को सीधे अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराने का नहीं है।

चिंता उस तरीके को लेकर है जिसमें किसी गाने, संवाद या दृश्य का इस्तेमाल करते हुए अपराध, हिंसा या कानून तोड़ने वाली छवि को लोकप्रियता और ताकत के प्रतीक की तरह प्रस्तुत किया जाता है। किसी एक गाने या Reel को देखकर कोई किशोर अपराधी बन जाता है, ऐसा सीधा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

लेकिन अपराध को आकर्षक बनाने वाले कंटेंट के लगातार संपर्क और उसके सामाजिक प्रभाव पर चर्चा जरूरी है।

Crowd Rejection क्या है?

Crowd Rejection का अर्थ है कि सोशल मीडिया उपयोगकर्ता नुकसानदेह कंटेंट को अपनी गतिविधियों से लोकप्रिय न बनाएं।

अगर किसी Reel या Video में हिंसा के लिए उकसाया जा रहा है, अपराध का महिमामंडन किया जा रहा है या घृणा फैलाने का प्रयास दिखाई देता है तो उपयोगकर्ता उस सामग्री को आगे भेजने के बजाय प्लेटफॉर्म के Report विकल्प का इस्तेमाल कर सकता है।

बच्चों में Reels की लत के साथ कंटेंट भी देखें

माता-पिता अक्सर इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि बच्चा घंटों मोबाइल चला रहा है। लेकिन सिर्फ Screen Time देखना पर्याप्त नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है। अगर उसकी Feed में लगातार लड़ाई, अपराध, हथियार, धमकी या बदले वाले वीडियो दिखाई दे रहे हैं तो उससे खुलकर बात करना जरूरी है।

सिर्फ मोबाइल छीन देना या डांटना समाधान नहीं है। बच्चे से पूछा जा सकता है कि उसे ऐसा कंटेंट क्यों पसंद आ रहा है। उसे यह समझाना भी जरूरी है कि Reel में दिखाई देने वाली लोकप्रियता वास्तविक जीवन की पूरी तस्वीर नहीं है।

अपराध को ‘कूल’ दिखाने वाली Reels का खतरा

कुछ सेकंड के वीडियो में अक्सर किसी घटना का सिर्फ आकर्षक हिस्सा दिखाई देता है। अगर किसी व्यक्ति को हथियार, महंगी गाड़ी या आक्रामक अंदाज के साथ दिखाया गया है तो Reel देखने वाले किशोर को उसके पीछे की वास्तविक कहानी दिखाई नहीं देती। उसे गिरफ्तारी, मुकदमा, पीड़ित की स्थिति या उस व्यक्ति के परिवार पर पड़े असर की जानकारी नहीं मिलती।

यही अंतर समझाना जरूरी है। सोशल मीडिया की लोकप्रियता वास्तविक जीवन की सफलता का प्रमाण नहीं है।

Disclaimer से हर जिम्मेदारी खत्म नहीं होती

कई वीडियो बनाने वाले शुरुआत या आखिर में Disclaimer लगा देते हैं कि सामग्री केवल मनोरंजन के लिए है। लेकिन सिर्फ Disclaimer लिख देने से हर तरह का कंटेंट अपने आप स्वीकार्य नहीं हो जाता। प्लेटफॉर्म की अपनी Community Guidelines होती हैं। किसी वीडियो की स्थिति उसके वास्तविक कंटेंट, संदर्भ और उद्देश्य पर निर्भर करती है।

समाचार, शिक्षा और किसी घटना के बारे में जानकारी देने वाले वीडियो तथा हिंसा को बढ़ावा देने वाले वीडियो को एक ही तरीके से नहीं देखा जा सकता।

सोशल मीडिया पेट्रोलिंग पुलिस के लिए क्यों जरूरी है?

अपराध से जुड़ी धमकी या हिंसा अब किसी स्थानीय समूह तक सीमित नहीं रहती। कोई पोस्ट या Reel बहुत कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है। यही कारण है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए सार्वजनिक सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

ऐसी निगरानी से धमकी, हिंसा के लिए उकसाने, संभावित अपराध या तनाव पैदा करने वाले वायरल कंटेंट की जानकारी समय रहते मिल सकती है। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और लागू कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस क्या कर सकती है?

कानून प्रवर्तन एजेंसियां सोशल मीडिया निगरानी के लिए समर्पित टीम बना सकती हैं। तकनीक की मदद से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध संदिग्ध कंटेंट की पहचान की जा सकती है। नागरिकों के लिए रिपोर्टिंग चैनल आसान बनाए जा सकते हैं ताकि गंभीर पोस्ट के बारे में तुरंत सूचना मिल सके।

अफवाह या गलत सूचना फैलने की स्थिति में सत्यापित जानकारी भी जल्दी जारी की जा सकती है। ऐसी निगरानी कानून और नागरिकों के वैध अधिकारों के दायरे में होनी चाहिए।

माता-पिता क्या करें?

बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर चार सामान्य कदम उपयोगी हो सकते हैं। सबसे पहले बातचीत करें। बच्चा क्या देख रहा है और क्यों देख रहा है, इसे समझें। दूसरा, उसकी Feed में लगातार आने वाले कंटेंट पर ध्यान दें। तीसरा, आपत्तिजनक Accounts को Block और नुकसानदेह वीडियो को Not Interested किया जा सकता है। चौथा, बच्चे को समझाएं कि सोशल मीडिया पर वायरल होना किसी काम के सही होने का प्रमाण नहीं है।

हिंसक Reel दिखे तो तुरंत क्या करें?

अगर कोई हिंसक Reel दिखाई देती है तो पहले उसका संदर्भ समझें। अगर वीडियो समाचार या किसी घटना की जानकारी दे रहा है तो उसका संदर्भ अलग हो सकता है। लेकिन अगर सामग्री हिंसा के लिए उकसाती दिखाई दे, किसी को सीधी धमकी देती हो या अपराध को बढ़ावा देती हो तो प्लेटफॉर्म के Report विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है।

जरूरत पड़ने पर पोस्ट का लिंक और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखा जा सकता है। गंभीर खतरे या संभावित अपराध की स्थिति में संबंधित पुलिस या कानून प्रवर्तन एजेंसी से संपर्क किया जा सकता है।

आपके Like और Share की भी भूमिका है

सोशल मीडिया पर क्या वायरल होगा, इसमें उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों की भी भूमिका होती है। इसीलिए हिंसक और घृणास्पद सामग्री के मामले में एक सामान्य उपयोगकर्ता का फैसला भी मायने रखता है। हर आपत्तिजनक Reel को दूसरों तक पहुंचाना जरूरी नहीं है।

देखें, समझें, जरूरत हो तो Report करें, लेकिन नुकसानदेह कंटेंट को आगे बढ़ाने का माध्यम न बनें। यही Crowd Rejection का सबसे आसान अर्थ है।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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27-09-2026