साइबर ठगी में गया पैसा वापस कैसे पाएं ? NCRP पोर्टल से समझें पूरा तरीका

अगर साइबर ठगी में आपका पैसा चला गया है, तो NCRP मनी रेस्टोरेशन पोर्टल के जरिए उसे वापस पाने का तरीका जानिए इस आसान गाइड में।
NCRP पोर्टल से साइबर ठगी का पैसा वापस पाने की प्रक्रियाः प्रतीकात्मक चित्र एआई

आज के समय में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई लोग UPI, कार्ड या फर्जी कॉल के जरिए ठगी का शिकार हो जाते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि लोगों को पता ही नहीं होता कि पैसा वापस पाने के लिए क्या किया जाए। गृह मंत्रालय द्वारा संचालित
NCRP मनी रेस्टोरेशन पोर्टल
इसी समस्या का समाधान देता है। यह एक ऐसा सिस्टम है जो बैंकों और जांच एजेंसियों के साथ मिलकर ठगी वाले ट्रांजैक्शन को ट्रैक करता है और सही मामलों में पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू करता है।

साइबर ठगी में गया पैसा वापस पाने में यह पोर्टल कैसे मदद करता है

जब आप यहां शिकायत दर्ज करते हैं, तो आपकी जानकारी सीधे बैंक और साइबर जांच एजेंसियों तक पहुंचती है। इसके बाद संदिग्ध खाते को चिन्हित किया जाता है। कई मामलों में बैंक उस खाते को फ्रीज भी कर देता है ताकि पैसा आगे ट्रांसफर न हो सके।

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साथ ही, जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि पैसा किन खातों में गया है। अगर पैसा अभी भी सिस्टम के भीतर ट्रैक हो सकता है, तो उसे वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

पैसा वापस पाने की प्रक्रिया कैसी होती है

सबसे पहले आपको पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन करना होता है। OTP के जरिए आपका नंबर सत्यापित होता है। इसके बाद आप रिफंड के लिए आवेदन दर्ज कर सकते हैं।

इस दौरान आपको ठगी से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होती है। जैसे किस तरह का फ्रॉड हुआ, कितनी रकम गई, ट्रांजैक्शन आईडी क्या है, और आपका बैंक खाता कौन सा है। इसके साथ स्क्रीनशॉट, मैसेज या ईमेल जैसे सबूत भी अपलोड करने होते हैं।

एक बार यह जानकारी जमा हो जाती है, तो मामला जांच के लिए आगे बढ़ता है। बैंक अपनी तरफ से ट्रांजैक्शन की जांच करता है और जरूरत पड़ने पर खाते को रोक देता है। वहीं पुलिस और साइबर टीमें पैसों की ट्रेल को समझने की कोशिश करती हैं।

क्या आप अपनी शिकायत की स्थिति देख सकते हैं

हां, यह सुविधा भी पोर्टल में दी गई है। आप लॉगिन करके देख सकते हैं कि आपका केस किस चरण में है। कभी यह समीक्षा में होता है, कभी बैंक की जांच में और कभी पुलिस कार्रवाई के तहत। अंतिम स्थिति में इसे स्वीकृत या अस्वीकृत बताया जाता है।

किन बातों का खास ध्यान रखें

सही और पूरी जानकारी देना बहुत जरूरी है। छोटी सी गलती भी आपके केस को कमजोर कर सकती है। हमेशा ट्रांजैक्शन से जुड़े सभी सबूत संभालकर रखें। अगर मामला बड़ा है, तो नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में जाकर FIR दर्ज कराना भी सही कदम होता है। इससे जांच को मजबूती मिलती है।

साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें

भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। OTP, PIN या बैंक डिटेल किसी के साथ साझा न करें। KYC या बैंक अपडेट के नाम पर आने वाली कॉल से सावधान रहें।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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31-08-2026