कोयला खदान से निकला कोयला बिजलीघर और उद्योग तक पहुंचने से पहले चोरी हो जाए तो नुकसान किसी एक कंपनी का नहीं होता। इसका सीधा संबंध सरकारी राजस्व, बिजली उत्पादन और देश की ऊर्जा जरूरतों से जुड़ता है। इसी वजह से झारखंड और पश्चिम बंगाल के बड़े कोयला क्षेत्रों में CISF की भूमिका अब सामान्य सुरक्षा से आगे बढ़ रही है।
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CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने 16 से 18 सितंबर 2026 के बीच झारखंड और पश्चिम बंगाल के ECL और BCCL कोयला क्षेत्रों का दौरा किया। CISF की आधिकारिक वेबसाइट भी प्रवीर रंजन को वर्तमान महानिदेशक के रूप में सूचीबद्ध करती है।
दौरे में बड़ा मुद्दा था ‘Zero Coal Leakage’, यानी खदान से कोयले की चोरी, अवैध निकासी और गैरकानूनी ढुलाई को रोकना।
कोयला चोरी रोकने के लिए CISF को मिली बड़ी जिम्मेदारी
कोयला क्षेत्रों में CISF लंबे समय से सुरक्षा में तैनात है, लेकिन अब उसकी भूमिका में कानूनी कार्रवाई का पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है।
जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने अवैध कोयला खनन और चोरी की स्थिति की समीक्षा की थी। बैठक में गृह मंत्रालय, कोयला मंत्रालय, CISF, Coal India और BCCL के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे।
इसके बाद CISF ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 यानी MMDR Act के तहत कार्रवाई तेज की। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक CISF के नामित अधिकारियों को इस कानून की धारा 22, 23B और 24 के तहत अधिकार दिए गए हैं।
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इसका असर जमीन पर भी दिखाई दिया। 4 से 8 जुलाई 2026 के दौरान BCCL, ECL और CCL क्षेत्रों में CISF ने 428 मीट्रिक टन से अधिक अवैध कोयला बरामद किया था। ये अभियान झारखंड और पश्चिम बंगाल में चलाए गए थे।
Zero Coal Leakage क्या है?
आसान भाषा में समझें तो Zero Coal Leakage का लक्ष्य खदान और कोयला परिवहन व्यवस्था से होने वाली चोरी और अवैध निकासी को न्यूनतम स्तर तक पहुंचाना है।
इसके लिए खदानों की निगरानी, संवेदनशील रास्तों पर नजर, खुफिया सूचना के आधार पर छापेमारी, अवैध भंडारण की पहचान और स्थानीय पुलिस तथा कोयला कंपनियों के साथ संयुक्त कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है।
CISF की कार्रवाइयों में तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। जुलाई में बल की आधिकारिक समाचार सूची में BCCL क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी के जरिए अवैध खनन रोकने की कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया था।
ECL सीतलपुर में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
16 सितंबर को महानिदेशक प्रवीर रंजन ने एडीजी उत्तर विनीता ठाकुर और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पश्चिम बंगाल में ECL सीतलपुर का दौरा किया।
CISF की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र में ECL प्रबंधन और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में अवैध खनन, MMDR Act के इस्तेमाल और CISF, स्थानीय पुलिस तथा प्रबंधन के तालमेल पर चर्चा हुई।
महानिदेशक ने जवानों से भी संवाद किया। कोयला क्षेत्र की सुरक्षा के साथ उन्हें साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े जोखिमों के प्रति सतर्क रहने के लिए कहा गया।
धनबाद में ‘Zero Coal Leakage’ पर फोकस
17 और 18 सितंबर को महानिदेशक ने BCCL धनबाद का दौरा किया।
कोयला नगर परिसर में वृक्षारोपण के बाद आयोजित सैनिक सम्मेलन में करीब 400 जवान शामिल हुए। प्रवीर रंजन ने जवानों से सीधे बातचीत की और महिला बल सदस्यों की भूमिका की भी सराहना की।
इस दौरे की एक अलग तस्वीर भी सामने आई। महानिदेशक ने जवानों के साथ भोजन किया और अनौपचारिक बातचीत में उनकी समस्याएं तथा सुझाव सुने।
इसके बाद BCCL के CMD मनोज अग्रवाल, धनबाद के SSP और दूसरे अधिकारियों के साथ बैठक में Zero Coal Leakage से जुड़े उपायों पर चर्चा हुई।
IIT ISM धनबाद से क्यों जुड़ रही CISF?
दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़ा था।
18 सितंबर को महानिदेशक ने IIT (ISM) धनबाद का दौरा किया। CISF की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक संस्थान और बल के बीच भविष्य में MoU पर चर्चा हुई है।
इसका उद्देश्य CISF कर्मियों के लिए Mining Safety and Security और Cyber Security जैसे विषयों पर शॉर्ट टर्म कोर्स तैयार करना है।
अगर यह व्यवस्था आगे बढ़ती है तो कोयला खदानों की सुरक्षा में जवानों को पारंपरिक सुरक्षा प्रशिक्षण के साथ खनन तकनीक और आधुनिक डिजिटल खतरों को समझने में भी मदद मिल सकती है।
आम आदमी के लिए कोयला चोरी का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
कोयला चोरी को सामान्य कानून-व्यवस्था की घटना समझना ठीक नहीं होगा। भारत में बड़ी मात्रा में बिजली उत्पादन अभी भी कोयले पर निर्भर है। कोयले की उपलब्धता का बिजली संयंत्रों के संचालन से सीधा संबंध है। सितंबर 2026 में भी कोयला मंत्रालय बिजली क्षेत्र के लिए कोयला आपूर्ति और रेक लोडिंग की लगातार निगरानी कर रहा है।
इसी वजह से खदान से निकले कोयले की सुरक्षा राष्ट्रीय संसाधनों की सुरक्षा का भी सवाल है।
CISF की नई रणनीति में कानून, स्थानीय पुलिस और कोयला कंपनियों के साथ समन्वय तथा तकनीक का इस्तेमाल एक साथ दिखाई देता है। झारखंड और पश्चिम बंगाल में चल रही कार्रवाई से आने वाले समय में यह भी पता चलेगा कि Zero Coal Leakage का लक्ष्य जमीन पर कितना असर दिखाता है।













