CISF Training: ड्रोन, साइबर सुरक्षा और कमांडो ट्रेनिंग से कैसे तैयार होते हैं अधिकारी?

हैदराबाद स्थित CISF Training Academy देश के सुरक्षा अधिकारियों को आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार कर रही है। ड्रोन, साइबर सुरक्षा और कमांडो प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं इसे देश के प्रमुख सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल करती हैं।
CISF Training Academy NISA Hyderabad में दीक्षांत परेड के दौरान सलामी लेते तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और CISF महानिदेशक प्रवीर रंजन

देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयों, हवाई अड्डों, मेट्रो नेटवर्क, बंदरगाहों और अन्य रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए प्रशिक्षित अधिकारियों और जवानों की आवश्यकता भी बढ़ी है। इसी आवश्यकता को पूरा करने में CISF Training की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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हैदराबाद स्थित नेशनल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एकेडमी (NISA) CISF का प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है, जहां अधिकारियों को आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जाता है। यहां प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल सुरक्षा प्रक्रियाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, त्वरित निर्णय लेने की योग्यता और तकनीकी दक्षता विकसित करना भी है।

दीक्षांत परेड ने दिखाई प्रशिक्षण व्यवस्था की झलक

CISF Training की क्षमता का ताजा उदाहरण हैदराबाद के NISA परिसर में आयोजित दीक्षांत परेड में देखने को मिला, जहां 39वें बैच के 76 असिस्टेंट कमांडेंट और 09वें बैच के 124 सब-इंस्पेक्टर (पूर्व सैनिक) समेत कुल 200 प्रशिक्षित अधिकारी औपचारिक रूप से बल का हिस्सा बने।

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समारोह में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन और बल के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

परेड का नेतृत्व असिस्टेंट कमांडेंट मनीष कुमार राय ने किया, जबकि असिस्टेंट कमांडेंट रोशनी देवी ने परेड 2-I/C की जिम्मेदारी संभाली। प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए असिस्टेंट कमांडेंट सुमित लाठवाल को ‘ऑल राउंड बेस्ट’ चुना गया और प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया।

CISF Training Academy में कैसी होती है ट्रेनिंग?

असिस्टेंट कमांडेंट अधिकारियों को लगभग 57 सप्ताह का व्यापक प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान उन्हें औद्योगिक सुरक्षा, विमानन सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, वीआईपी सुरक्षा, शहरी सुरक्षा अभियान और आधुनिक हथियार संचालन की जानकारी दी जाती है।

वहीं सब-इंस्पेक्टर (पूर्व सैनिक) बैच के लिए 21 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाता है। प्रशिक्षण में कॉम्पीटेंसी बेस्ड ट्रेनिंग (CBT) पद्धति का उपयोग किया जाता है, जिससे अधिकारी कठिन परिस्थितियों में भी त्वरित और सटीक निर्णय लेने में सक्षम बन सकें।

देश की आर्थिक प्रगति की सुरक्षा से जुड़ी है जिम्मेदारी

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि CISF आज भारत के सुरक्षा ढांचे का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है और देश की आर्थिक प्रगति तथा जनता के भरोसे की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने नए अधिकारियों से कहा कि उनके कंधों पर लगे सितारे केवल रैंक का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि देश के विश्वास और जिम्मेदारी का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने अधिकारियों से चरित्र, ईमानदारी और साहस के साथ सेवा करने का आह्वान किया।

यह संदेश उस व्यापक भूमिका को भी रेखांकित करता है जिसे CISF Training Academy अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से विकसित करने का प्रयास करती है।

साइबर सुरक्षा और तकनीक पर विशेष फोकस

आधुनिक दौर में सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। पारंपरिक सुरक्षा खतरों के साथ-साथ साइबर हमले, डिजिटल घुसपैठ और ड्रोन आधारित जोखिम भी बढ़े हैं। CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन के अनुसार, बल वर्तमान में देशभर के 359 से अधिक संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर रहा है।

उन्होंने कहा कि CISF को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तकनीक-सक्षम सुरक्षा बल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी सोच के तहत साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण, डिजिटल निगरानी प्रणाली और नई तकनीकों को प्रशिक्षण ढांचे का हिस्सा बनाया गया है।

ड्रोन और कमांडो ट्रेनिंग की नई पहल

गृह मंत्रालय द्वारा राजस्थान के बहरोड़ स्थित प्रशिक्षण केंद्र को रिमोट पायलट ट्रेनिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया गया है। यहां ड्रोन संचालन और उससे जुड़ी सुरक्षा प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा बेंगलुरु स्थित 10वीं रिजर्व बटालियन को महिला कमांडो और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) प्रशिक्षण के लिए समर्पित केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।

इन पहलों का उद्देश्य सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है

सेना और विशेषज्ञ संस्थानों के साथ प्रशिक्षण

सुरक्षा प्रशिक्षण को और बेहतर बनाने के लिए CISF भारतीय सेना और NSG के साथ मिलकर बैटल हार्डनिंग कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इस पहल के तहत हजारों जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही NIT, NFSU, IIT Madras और IIDM Kanchipuram जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौते कर साइबर सुरक्षा और उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, साइबर सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए 1,600 साइबर कमांडो भी तैयार किए गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुका है NISA

हैदराबाद स्थित NISA आज केवल CISF का प्रशिक्षण केंद्र नहीं बल्कि एक प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थान के रूप में भी स्थापित हो चुका है। यहां श्रीलंका और नेपाल के अधिकारियों को भी बुनियादी ढांचा सुरक्षा और सीमा सुरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्थान को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में दो बार केंद्रीय गृह मंत्री ट्रॉफी फॉर बेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2024 में इसे “उत्कृष्ट” संस्थान के रूप में भी मान्यता मिली।

इसके साथ ही बिहार के किशनगंज में सातवें क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (RTC) की स्थापना की दिशा में भी काम किया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षण ढांचे को और मजबूत किया जा सके।

भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो रहा सुरक्षा बल

बदलते सुरक्षा वातावरण में प्रशिक्षित मानव संसाधन किसी भी सुरक्षा बल की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। CISF Training Academy आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा और नेतृत्व विकास को एक साथ जोड़कर अधिकारियों को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार कर रही है।

हालिया दीक्षांत परेड में शामिल हुए 200 नए अधिकारियों ने इस बात का संकेत दिया है कि CISF केवल सुरक्षा कर्मियों को ही नहीं, बल्कि ऐसे प्रशिक्षित नेतृत्वकर्ताओं को तैयार कर रहा है जो देश की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों और संस्थानों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सामान्य प्रश्न

CISF Training Academy कहां स्थित है?

CISF का प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान नेशनल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एकेडमी (NISA) हकीमपेट, हैदराबाद में स्थित है।

NISA में किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता है?

यहां औद्योगिक सुरक्षा, विमानन सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, वीआईपी सुरक्षा, ड्रोन संचालन और आधुनिक सुरक्षा प्रबंधन से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है।

हालिया दीक्षांत परेड में कितने अधिकारी शामिल हुए?

हालिया दीक्षांत परेड में कुल 200 अधिकारी CISF में शामिल हुए, जिनमें 76 असिस्टेंट कमांडेंट और 124 सब-इंस्पेक्टर (पूर्व सैनिक) शामिल थे।

CISF साइबर सुरक्षा पर कितना ध्यान दे रहा है?

CISF ने साइबर सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं और साइबर कमांडो भी तैयार किए हैं।

NISA को कौन-कौन से सम्मान प्राप्त हुए हैं?

NISA को दो बार केंद्रीय गृह मंत्री ट्रॉफी फॉर बेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से सम्मानित किया जा चुका है और वर्ष 2024 में इसे उत्कृष्ट संस्थान के रूप में मान्यता मिली थी।

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04-07-2026