Cyber Security पर BRICS में बड़ी चिंता, PM Modi ने बताया Technology के गलत इस्तेमाल का खतरा

BRICS Summit में PM Modi ने Technology के weaponisation पर चिंता जताई। दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह से समझिए Cyber Security, Cyber Crime, Deepfake और आम इंटरनेट यूजर से इसका क्या संबंध है।
BRICS Summit 2026 में Cyber Security और Technology के खतरे पर PM Modi

Cyber Crime, Deepfake, Online Fraud और Cyber Attack के बढ़ते खतरे के बीच BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Technology के weaponisation पर चिंता जताई है। सवाल यह है कि तकनीक का हथियार की तरह इस्तेमाल आखिर कैसे हो सकता है और इसका आम मोबाइल तथा इंटरनेट यूजर की Cyber Security से क्या संबंध है?

नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी चेतावनी दी है जिसका संबंध सरकारों और बड़ी टेक कंपनियों के साथ आम मोबाइल और इंटरनेट यूजर की सुरक्षा से भी जुड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि Technology और Critical Minerals का weaponisation साझा प्रगति में बाधा बन सकता है।

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सवाल है कि Technology Weaponisation आखिर है क्या? क्या कोई सामान्य इंटरनेट यूजर भी इसके असर में आ सकता है? साइबर अपराध, डेटा चोरी, Deepfake, गलत सूचना और महत्वपूर्ण सेवाओं पर साइबर हमले के दौर में यह सवाल पहले से अधिक अहम हो गया है।

PM Modi ने BRICS Summit में क्या कहा?

18वें BRICS Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability पर बोलते हुए कहा कि आज दुनिया आपस में इतनी जुड़ी हुई है कि कोई संकट किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रहता।

उन्होंने Technology और Critical Minerals के weaponisation को साझा प्रगति में बाधा बनने वाला खतरा बताया। प्रधानमंत्री ने नई तकनीक तक समावेशी पहुंच पर भी जोर दिया।

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यहां Technology Weaponisation का सामान्य अर्थ किसी तकनीक, डिजिटल सिस्टम, डेटा, नेटवर्क या तकनीकी निर्भरता को दबाव, नुकसान, नियंत्रण या व्यवधान पैदा करने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने से समझा जा सकता है।

Technology Weaponisation क्या है?

इसे आसान उदाहरण से समझिए। इंटरनेट, Artificial Intelligence, मोबाइल नेटवर्क और डिजिटल भुगतान लोगों की जिंदगी आसान करते हैं। लेकिन इन्हीं तकनीकों का गलत इस्तेमाल साइबर हमला, डेटा चोरी, Deepfake, ऑनलाइन ठगी या बड़े पैमाने पर गलत सूचना फैलाने के लिए किया जा सकता है।

यही तकनीक की दोहरी भूमिका है।

एक तरफ तकनीक बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और कारोबार को तेज करती है। दूसरी तरफ गलत हाथों में पहुंचने पर इसी तकनीक का इस्तेमाल आर्थिक नुकसान, सेवाएं बाधित करने या लोगों को भ्रमित करने के लिए हो सकता है।

BRICS Declaration में Cyber Crime पर क्या कहा गया?

BRICS New Delhi Declaration में डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को जगह दी गई है। इसमें सुरक्षित, स्थिर और शांतिपूर्ण ICT व्यवस्था के समर्थन के साथ BRICS देशों के बीच सहयोग की बात कही गई है।

घोषणापत्र में Computer Emergency Response Teams यानी CERTs के बीच बेहतर सहयोग, कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सहयोग और संयुक्त शोध का भी उल्लेख है।

इसके साथ कई डिजिटल खतरों का नाम लिया गया है, जिनमें शामिल हैं:

Cybercrime, malicious software, data security से जुड़े खतरे, misinformation, disinformation और deepfakes.

यानी BRICS में तकनीक पर चर्चा विकास तक सीमित नहीं रही। उसके गलत इस्तेमाल और सुरक्षा से जुड़े सवाल भी एजेंडे में हैं।

आम इंटरनेट यूजर के लिए इसका क्या मतलब है?

बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठकों में होने वाली साइबर सुरक्षा की चर्चा कई बार आम आदमी से बहुत दूर की चीज लगती है। वास्तविकता में इसका असर मोबाइल फोन तक पहुंच सकता है।

आज एक व्यक्ति बैंकिंग ऐप, UPI, WhatsApp, ईमेल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शॉपिंग और सरकारी सेवाओं के लिए इंटरनेट पर निर्भर है। इनमें से किसी भी माध्यम में सुरक्षा की कमी अपराधियों को मौका दे सकती है।

उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति की तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल करके Deepfake बनाया जा सकता है। किसी कंपनी या अधिकारी की पहचान की नकल करके कर्मचारी से पैसे ट्रांसफर कराए जा सकते हैं। नकली वेबसाइट और APK File के जरिए मोबाइल का डेटा चुराया जा सकता है।

यही कारण है कि साइबर सुरक्षा अब पासवर्ड बदलने तक सीमित विषय नहीं है।

Cyber Crime अब सीमा क्यों नहीं देखता?

ऑनलाइन ठगी करने वाला व्यक्ति किसी दूसरे राज्य या देश में बैठा हो सकता है। पीड़ित भारत में हो सकता है, बैंक खाता किसी तीसरे स्थान पर और अपराध में इस्तेमाल होने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म कहीं और संचालित हो सकता है।

Phishing, investment scam, fake trading app, ransomware और दूसरे ऑनलाइन अपराधों में तकनीक अपराधियों को बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने की सुविधा देती है।

इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना साझा करना, CERT के बीच सहयोग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का तालमेल महत्वपूर्ण हो जाता है।

Deepfake और गलत सूचना भी बड़ी चिंता

Artificial Intelligence के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ Deepfake की समस्या भी सामने आई है। किसी व्यक्ति की नकली आवाज, तस्वीर या वीडियो तैयार करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

इसका इस्तेमाल आर्थिक धोखाधड़ी में भी किया जा सकता है।

यदि किसी परिचित, अधिकारी या कंपनी के वरिष्ठ व्यक्ति की आवाज में अचानक पैसे भेजने का संदेश मिले तो आवाज सुनकर ही भरोसा करना सुरक्षित तरीका नहीं है। दूसरे माध्यम से उसकी पुष्टि करना जरूरी है।

BRICS New Delhi Declaration में Deepfakes और misinformation तथा disinformation का उल्लेख इसी व्यापक चिंता को दिखाता है।

महत्वपूर्ण सेवाओं की Cyber Security क्यों जरूरी है?

बैंक, दूरसंचार नेटवर्क, डिजिटल भुगतान व्यवस्था, परिवहन और दूसरी आवश्यक सेवाएं आज कंप्यूटर नेटवर्क पर निर्भर हैं।

ऐसे सिस्टम पर सफल साइबर हमला किसी एक व्यक्ति के मोबाइल या बैंक खाते तक सीमित नुकसान नहीं करता। इससे बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने वाली सेवाएं बाधित हो सकती हैं।

इसी वजह से Cyber Resilience महत्वपूर्ण बनती है। इसका सीधा अर्थ है कि साइबर हमला या तकनीकी संकट आने पर सिस्टम नुकसान को सीमित कर सके, जरूरी सेवाएं चालू रख सके और जल्द सामान्य स्थिति में लौट सके।

BRICS देशों का सहयोग क्यों मायने रखता है?

BRICS New Delhi Declaration में ICT सुरक्षा पर सदस्य देशों के सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। CERTs के बीच अनुभव साझा करने और कानून प्रवर्तन सहयोग का उल्लेख खास तौर पर महत्वपूर्ण है।

साइबर अपराध की प्रकृति सीमा पार होने के कारण किसी एक देश की पुलिस, बैंक या साइबर एजेंसी हर मामले को अकेले हल नहीं कर सकती।

अपराधियों के डिजिटल निशान, सर्वर, बैंकिंग चैनल और दूसरे तकनीकी संसाधन कई देशों में फैले हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में देशों के बीच समय पर सूचना साझा करना जांच और रोकथाम दोनों में मदद कर सकता है।

आपके मोबाइल तक पहुंचती है BRICS की यह बड़ी बहस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Technology Weaponisation संबंधी चेतावनी को आम इंटरनेट यूजर के संदर्भ में देखें तो इसका एक साफ संदेश निकलता है।

तकनीक जितनी शक्तिशाली होगी, उसका सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल उतना ही जरूरी होगा।

आम यूजर के स्तर पर इसका मतलब है कि अनजान APK File इंस्टॉल न करें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, बैंक OTP और PIN साझा न करें, Deepfake या असामान्य कॉल पर तुरंत भरोसा न करें और पैसे भेजने से पहले दूसरे माध्यम से पहचान की पुष्टि करें।

सरकारों और तकनीकी संस्थानों के स्तर पर जिम्मेदारी कहीं बड़ी है। उन्हें ऐसे सिस्टम तैयार करने होंगे जिनमें सुरक्षा, जवाबदेही और संकट के समय तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता हो।

BRICS Summit की यह चर्चा इसी वजह से साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। तकनीक विकास का साधन बनी रहे, लेकिन अपराध, दबाव और व्यवधान का हथियार न बने, आने वाले वर्षों में यह वैश्विक साइबर नीति की बड़ी परीक्षा होगी।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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16-09-2026