दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में एक सुनसान कंटेनर के भीतर अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। सिर पर चोट थी और पास में खून जैसे धब्बों वाला कंक्रीट का पत्थर पड़ा था। मृतक कौन था, वहां कैसे पहुंचा और उसकी हत्या किसने की, शुरुआत में पुलिस के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं था।
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कई दिनों तक कैमरों की रिकॉर्डिंग जोड़ने पर तस्वीर साफ हुई। मृतक दो लोगों के साथ कंटेनर तक जाता दिखाई दिया, लेकिन वहां से वापस नहीं लौटा। यही वह सुराग था, जिसने पुलिस को गोविंदपुरी की एक सिलाई फैक्ट्री और फिर मृतक के पिता तक पहुंचा दिया।
बाबलू के कंटेनर में मिला अज्ञात शव
दिल्ली पुलिस साउथ ईस्ट दिल्ली डीसीपी विनीत कुमार के अनुसार, 23 अगस्त 2026 की शाम करीब 7:13 बजे कालिंदी कुंज थाना पुलिस को एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने की सूचना मिली। शव कच्ची कॉलोनी की गली नंबर एक के पास, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से करीब 500 मीटर पूर्व और एनटीपीसी की दीवार से सटे एक लावारिस कंटेनर में पड़ा था। स्थानीय लोग इस जगह को “बाबलू का कंटेनर” कहते हैं।
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सूचना मिलते ही कालिंदी कुंज के एसएचओ इंस्पेक्टर रमन कुमार सिंह पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। कंटेनर के अंदर एक पुरुष का शव मिला, जिसके सिर के बाएं हिस्से पर चोट दिखाई दे रही थी। शव के पास मिले कंक्रीट के पत्थर पर खून जैसे निशान थे।
शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि सिर पर चोट इसी पत्थर से मारी गई थी। मृतक के पास ऐसी कोई चीज नहीं मिली, जिससे तत्काल उसकी पहचान हो सके। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर सबसे पहले अज्ञात शव की पहचान खोजनी शुरू की।
चार टीमों के सामने पहला सवाल, मृतक कौन है
ब्लाइंड मर्डर की जांच के लिए दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस की चार टीमें बनाई गईं। इनकी निगरानी सरिता विहार एसीपी अनिल शर्मा कर रहे थे। कालिंदी कुंज थाने की टीम का नेतृत्व एसएचओ इंस्पेक्टर रमन कुमार सिंह ने किया। उनके साथ इंस्पेक्टर किशोर कुमार, इंस्पेक्टर अमित, एसआई सत्यप्रीत, हेड कांस्टेबल कुलश्रेष्ठ, भारत और हरीश तथा कांस्टेबल बालकिशन, दिनेश और अभय शामिल थे।
स्पेशल स्टाफ की टीम में इंस्पेक्टर राजेंद्र डागर के साथ एसआई नागेंद्र, एएसआई अनिल, हेड कांस्टेबल महेंद्र, राजेश, प्रेम, दिनेश और संदीप तथा कांस्टेबल छोटू राम थे। नारकोटिक्स सेल की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर विष्णु को दी गई। उनके साथ एएसआई करमवीर, हेड कांस्टेबल कुलदीप और नवीन तथा कांस्टेबल शुभम लगाए गए।
एएटीएस की टीम में इंस्पेक्टर अजय दलाल, एएसआई शरवन और हेड कांस्टेबल किशन शामिल थे। जांच एसीपी सरिता विहार अनिल कुमार शर्मा के नेतृत्व में हुई। डीसीपी दक्षिण-पूर्वी जिला विनीत कुमार की समग्र निगरानी और दक्षिणी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त विजय कुमार के मार्गदर्शन में चारों टीमों ने अलग-अलग सुरागों पर काम किया।
कैमरे से कैमरे तक जोड़ी गई मृतक की आखिरी यात्रा
घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देखना जांच का अहम हिस्सा बना। पुलिस ने पास के रास्तों, गलियों और संपर्क मार्गों के कैमरे खंगाले। एक कैमरे में दिखाई देने वाले व्यक्ति को अगले कैमरे में खोजते हुए उसकी आवाजाही की पूरी कड़ी बनाई गई।
कई दिनों की रिकॉर्डिंग देखने के बाद मृतक दो व्यक्तियों के साथ चलता दिखाई दिया। तीनों उसी दिशा में गए, जहां लावारिस कंटेनर था। रिकॉर्डिंग में दोनों संदिग्ध वहां से लौटते दिखाई दिए, लेकिन उनके साथ गया व्यक्ति वापस आता नजर नहीं आया।
इस एक अंतर ने जांच की दिशा तय कर दी। तकनीकी निगरानी, स्थानीय पूछताछ और मौके पर मिली सूचनाओं से दोनों संदिग्धों का संबंध गोविंदपुरी की एक सिलाई फैक्ट्री से मिला। पुलिस ने वहां पहुंचकर 64 वर्षीय तालुकदार अंसारी और 49 वर्षीय मोहम्मद वसीम उर्फ अकरम को पकड़ लिया।
इसके बाद अज्ञात मृतक की पहचान 38 वर्षीय गुल हसन के रूप में हुई। वह गिरफ्तार तालुकदार अंसारी का बेटा था।
डॉक्टर के पास ले जाने के बहाने बुलाने का आरोप
पुलिस का कहना है कि पूछताछ में गुल हसन के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या, सिजोफ्रेनिया से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई। जांच में अब तक मिले तथ्यों के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से डॉक्टर के पास ले जाने के बहाने उसे अपने साथ लिया था।
पुलिस का आरोप है कि सुनसान कंटेनर में पहुंचने के बाद मोहम्मद वसीम उर्फ अकरम ने गुल हसन पर पत्थर से हमला किया। इसके बाद तालुकदार अंसारी ने भी कथित रूप से उसे चोट पहुंचाई। आरोप है कि कपड़े की कतरनों से बनी रस्सी से उसका गला घोंटा गया और शव कंटेनर में छोड़कर दोनों वहां से निकल गए।
हत्या का पूरा मकसद अभी सामने नहीं आया है। इसलिए मानसिक बीमारी को वारदात का कारण मानना उचित नहीं होगा। पुलिस मकसद, घटनाक्रम और आरोपियों के दावों की अलग-अलग जांच कर रही है।
पत्थर, कपड़े और रस्सी बरामद
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में कथित रूप से इस्तेमाल किया गया कंक्रीट का पत्थर बरामद किया है। वारदात के समय पहने गए बताए जा रहे खून के धब्बों वाले कपड़े और गला घोंटने में प्रयुक्त कपड़े की रस्सी भी बरामद होने का दावा किया गया है।
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अब फोरेंसिक जांच से यह तय होगा कि बरामद वस्तुओं का हत्या से क्या संबंध है। अंतिम मेडिकल रिपोर्ट, जैविक नमूनों की जांच, CCTV रिकॉर्डिंग और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि की जाएगी। पुलिस वारदात के पीछे के पूरे कारण का पता लगाने का प्रयास भी कर रही है।
इस मामले में किसी प्रत्यक्षदर्शी ने पुलिस को हत्या करते नहीं देखा था। अज्ञात शव, सुनसान जगह और शुरुआत में आरोपियों की पहचान न होने के बावजूद कैमरों में दर्ज मृतक की आखिरी यात्रा ने पूरी जांच को जोड़ दिया। कंटेनर तक साथ गए तीन लोगों में एक का वापस नहीं लौटना आखिरकार इस ब्लाइंड मर्डर की सबसे अहम कड़ी बना।












