किसी साइबर हमले के तार कई राज्यों, विदेशी सर्वरों, फर्जी मोबाइल नंबरों और अलग-अलग बैंक खातों से जुड़े हों तो एक एजेंसी के लिए पूरी तस्वीर समझना आसान नहीं होता। जांच में देरी का लाभ साइबर अपराधियों को मिलता है। इसी समस्या को कम करने के लिए भारत में Cyber Multi Agency Centre यानी CyMAC बनाया गया है।
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CyMAC पुलिस, खुफिया इकाइयों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों के बीच जरूरी सूचना साझा करने का सरकारी मंच है। इसका उपयोग आम लोग सीधे शिकायत दर्ज कराने के लिए नहीं कर सकते, लेकिन इससे मिलने वाली सूचनाएं साइबर हमले रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में एजेंसियों की कार्रवाई तेज कर सकती हैं।
CyMAC क्या है और इसकी स्थापना कब हुई
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 22 जनवरी 2025 को Multi Agency Centre यानी MAC के तहत CyMAC की स्थापना की थी। MAC खुफिया सूचना साझा करने वाला पुराना सरकारी तंत्र है, जिसे साइबर खतरों से निपटने की नई जरूरतों के अनुसार CyMAC से जोड़ा गया।
सरकार के मुताबिक CyMAC का उद्देश्य साइबर सुरक्षा खतरों, साइबर जासूसी, उभरती तकनीक के गलत इस्तेमाल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े साइबर मामलों पर अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल बनाना है।
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इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी IB, CERT-In, Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C, National Critical Information Infrastructure Protection Centre यानी NCIIPC, National Informatics Centre यानी NIC और दूरसंचार विभाग सहित कई एजेंसियां भाग लेती हैं।
CyMAC बनाने की जरूरत क्यों पड़ी
साइबर अपराध अब एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं रहते। अपराधी किसी एक राज्य से मोबाइल सिम ले सकता है, दूसरे राज्य में खुला बैंक खाता इस्तेमाल कर सकता है और विदेश में मौजूद सर्वर से हमला चला सकता है। मामला साइबर जासूसी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो तो जांच और भी संवेदनशील हो जाती है।
पहले किसी साइबर खतरे से जुड़ी जानकारी अलग-अलग एजेंसियों के पास टुकड़ों में मौजूद हो सकती थी। एक एजेंसी के पास संदिग्ध इंटरनेट गतिविधि की सूचना होती, दूसरी के पास मोबाइल नंबर का रिकॉर्ड और तीसरी के पास किसी साइबर हमले का तकनीकी संकेत।
CyMAC ऐसे संकेतों और सूचनाओं को संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने में मदद करता है। इससे किसी खतरे की बड़ी तस्वीर समझने और जिम्मेदारी तय करने में आसानी हो सकती है।
पुलिस को CyMAC से क्या मदद मिल सकती है
कई राज्यों में फैले साइबर अपराध की जांच करने वाली पुलिस को अलग-अलग संस्थानों और एजेंसियों से जानकारी लेनी पड़ती है। साइबर अपराधियों के मोबाइल नंबर, इंटरनेट पते, डिजिटल उपकरण और विदेशी संपर्क अलग स्थानों पर मिल सकते हैं।
CyMAC का मंच राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े साइबर मामलों में कानून प्रवर्तन, खुफिया और तकनीकी एजेंसियों के बीच सूचना के आदान-प्रदान में मदद करता है। यदि एक जैसी संदिग्ध गतिविधि अलग-अलग राज्यों में दिखाई देती है तो साझा जानकारी से उसका संबंध पहचानना आसान हो सकता है।
हालांकि CyMAC को सामान्य थाने या प्रत्येक साइबर ठगी की जांच करने वाली इकाई समझना सही नहीं होगा। इसका प्रमुख काम एजेंसियों के बीच साइबर खतरे की सूचना और प्रतिक्रिया का समन्वय करना है। किसी मामले की जांच और गिरफ्तारी संबंधित पुलिस या अधिकृत जांच एजेंसी ही करती है।
CyMAC से आम जनता को क्या लाभ होगा
आम नागरिक CyMAC की वेबसाइट पर जाकर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज नहीं करता। इसके बावजूद इसका काम जनता की डिजिटल सुरक्षा से जुड़ा है।
यदि सरकारी विभाग, जरूरी डिजिटल सेवाएं या अहम कंप्यूटर नेटवर्क साइबर हमले का निशाना बनते हैं तो उसका असर बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ सकता है। समय पर सूचना साझा होने से संबंधित एजेंसियां हमले को पहचानने, नुकसान रोकने और प्रभावित व्यवस्था को सामान्य करने के उपाय कर सकती हैं।
किसी नागरिक के साथ ऑनलाइन आर्थिक ठगी हो तो उसे तुरंत 1930 पर कॉल करना चाहिए। शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है। जल्दी शिकायत करने से संदिग्ध लेनदेन रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
क्या CyMAC हर ऑनलाइन ठगी की जांच करेगा
नहीं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश ऐप, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया अपराध या बैंकिंग फ्रॉड की शिकायत संबंधित राज्य अथवा केंद्रशासित प्रदेश की पुलिस संभालती है। संविधान के तहत पुलिस और लोक व्यवस्था राज्यों के विषय हैं।
केंद्र सरकार I4C, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और दूसरी व्यवस्थाओं के जरिए राज्यों की मदद करती है। CyMAC की भूमिका साइबर सुरक्षा, जासूसी, नई तकनीक के दुरुपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में एजेंसियों के बीच तालमेल पर केंद्रित है।
इसलिए किसी पीड़ित को CyMAC से संपर्क खोजने में समय गंवाने के बजाय 1930, साइबर क्राइम पोर्टल या स्थानीय पुलिस से तुरंत शिकायत करनी चाहिए।
AI और डीपफेक जैसे खतरों में CyMAC की भूमिका
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल फर्जी आवाज, डीपफेक वीडियो, भ्रामक संदेश और बड़े स्तर पर ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है। सरकार ने CyMAC के उद्देश्यों में उभरती तकनीक के दुरुपयोग से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों को शामिल किया है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाला प्रत्येक डीपफेक मामला सीधे CyMAC संभालेगा। लेकिन यदि AI से जुड़ी गतिविधि बड़े साइबर हमले, जासूसी या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनती है तो संबंधित एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने में यह मंच उपयोगी हो सकता है।
CyMAC क्यों अहम है
भारत में डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं और जरूरी ढांचों का कंप्यूटर नेटवर्क पर निर्भर रहना बढ़ा है। इसी के साथ साइबर हमलों का स्वरूप भी बदल रहा है। कई मामलों में पुलिस, खुफिया संस्थाओं, तकनीकी एजेंसियों और दूरसंचार विभाग को एक साथ काम करना पड़ता है।
CyMAC इस साझा कार्रवाई के लिए बनाया गया मंच है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एजेंसियां कितनी तेजी से उपयोगी सूचना साझा करती हैं और प्राप्त चेतावनी पर समय रहते कार्रवाई होती है।
आम जनता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि CyMAC शिकायत पोर्टल नहीं है। आर्थिक साइबर ठगी होने पर पहला कदम 1930 पर कॉल और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करना ही रहेगा।











