Property fraud: रिटायरमेंट के ₹1.75 करोड़ फंसे, जमीन खरीदने से पहले इन कागजात की जांच क्यों जरूरी, आप भी जान लें

दिल्ली में रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी से ₹1.75 करोड़ की कथित Property Fraud का मामला सामने आया है। ₹50 हजार के इनामी आरोपी की गिरफ्तारी के साथ जानिए जमीन खरीदने से पहले कौन से दस्तावेज जरूर जांचें।
दिल्ली में ₹1.75 करोड़ Property Fraud मामले में आरोपी के साथ AATS Dwarka Police

जिंदगी भर कमा कर जमा की गई रकम अगर जमीन खरीदने में लगा दी जाए और बाद में पता लगे कि जो जमीन खरीदी गई है उसके कागजात ही फर्जी थे, तो जरा सोचिए नुकसान कितना बड़ा हो सकता है? दिल्ली में सामने आया ₹1.75 करोड़ का मामला Property Fraud के इसी खतरे की ओर ध्यान खींचता है।

दिल्ली के द्वारका डीसीपी कुशलपाल सिंह के मुताबिक, रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी से कई प्लॉट की खरीद-बिक्री के नाम पर करीब ₹1.75 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में AATS द्वारका ने 67 वर्षीय ब्रह्म स्वरूप भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उस पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया था और वह करीब एक साल से फरार बताया गया है।

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यह मामला किसी एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जमीन या प्लॉट खरीदने जा रहे लोगों के लिए बड़ा सवाल है कि Property Documents की जांच आखिर कैसे की जाए ताकि जिंदगी भर की बचत खतरे में न पड़े?

रिटायरमेंट की रकम से खरीदे गए थे प्लॉट

पुलिस के मुताबिक पीड़ित वरिष्ठ नागरिक सरकारी सेवा से रिटायर हुए थे और तिहाड़ जेल में फार्मासिस्ट रह चुके हैं। आरोप है कि 2024-25 के दौरान उन्हें कई प्लॉट खरीदने के लिए तैयार किया गया और इस प्रक्रिया में करीब ₹1.75 करोड़ की रकम का नुकसान हुआ। बाद में शिकायत दर्ज की गई।

मामले की पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक पीड़ित को छह प्लॉट खरीदने के लिए राजी किया गया था और पुलिस का आरोप है कि इनके सौदे में फर्जी या जाली दस्तावेज इस्तेमाल किए गए।

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यही वजह है कि यह मामला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है जो रिटायरमेंट फंड, जीवन भर की बचत या दूसरी बड़ी रकम प्रॉपर्टी में लगाने की योजना बना रहे हैं।

सात दिन की निगरानी के बाद सोनीपत से गिरफ्तारी

द्वारका जिले के डीसीपी कुशल पाल सिंह, आईपीएस के निर्देश पर फरार और इनामी आरोपियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत AATS द्वारका को इस मामले के आरोपी की तलाश की जिम्मेदारी दी गई थी।

वीडियो देखेंः

पुलिस के मुताबिक इसके लिए एसआई जितेंद्र, हेड कांस्टेबल सोनू, हेड कांस्टेबल मनोज और महिला हेड कांस्टेबल ममता की टीम बनाई गई। टीम ने करीब सात दिन तक तकनीकी जानकारी जुटाने के साथ जमीनी स्तर पर भी आरोपी की तलाश की। मिले सुरागों की पुष्टि के बाद आरोपी की लोकेशन हरियाणा के सोनीपत में मिली।

इसके बाद AATS द्वारका की टीम ने 67 वर्षीय ब्रह्म स्वरूप भारद्वाज को 13 सितंबर 2026 को पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार वह करीब एक साल से फरार था और उस पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया गया था।

पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व AATS द्वारका के इंस्पेक्टर मनीष यादव ने किया। कार्रवाई एसीपी ऑपरेशंस सुभाष मलिक की निगरानी और डीसीपी द्वारका कुशल पाल सिंह के निर्देशन में की गई।

कौन है गिरफ्तार आरोपी?

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी की पहचान ब्रह्म स्वरूप भारद्वाज, उम्र 67 वर्ष, के रूप में की है। वह प्रॉपर्टी डीलर बताया गया है। पुलिस का आरोप है कि उसने पुरुष और महिला रिश्तेदारों तथा सहयोगियों के साथ मिलकर प्रॉपर्टी सौदों और कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाया।

पीड़ित भी इस कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पुलिस ने उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन बताया है कि वह तिहाड़ जेल में फार्मासिस्ट रह चुके रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं। इसलिए हम अपनी तरफ से उनका नाम जोड़ने की कोशिश नहीं करेंगे।

मामले में FIR संख्या 730/25, थाना रणहौला दर्ज है। फरार आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट लिए गए थे और 3 सितंबर 2026 के आदेश के तहत पांच वांछित आरोपियों पर ₹50,000-₹50,000 का इनाम घोषित किया गया था।

Property Fraud से बचने के लिए जमीन खरीदने से पहले क्या जांचें?

यह केस एक जरूरी सबक देता है। बड़ी रकम का भुगतान सिर्फ प्रॉपर्टी डीलर या परिचित व्यक्ति के भरोसे पर नहीं किया जाना चाहिए।

मालिकाना हक की जांच करें: जिस व्यक्ति से जमीन खरीदी जा रही है, क्या वास्तव में उसी के नाम पर संपत्ति दर्ज है, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि कराएं।

मूल दस्तावेज देखें: केवल फोटोकॉपी, मोबाइल पर भेजी गई PDF या स्कैन कॉपी देखकर बड़ी रकम का भुगतान न करें। मूल दस्तावेजों को देखकर उनकी प्रामाणिकता की जांच जरूरी है।

पुराने लेनदेन की कड़ी देखें: जमीन पहले किन लोगों के नाम रही और वर्तमान विक्रेता तक मालिकाना हक कैसे पहुंचा, इसकी पूरी श्रृंखला की जांच कराना उपयोगी है।

रजिस्ट्री की स्वतंत्र जांच कराएं: विक्रेता या उसके प्रॉपर्टी डीलर की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से जानकारी की पुष्टि करें।

एक साथ पूरी रकम देने से बचें: दस्तावेजों और मालिकाना हक की पुष्टि पूरी होने से पहले बड़ी रकम के भुगतान का निर्णय जोखिम बढ़ा सकता है।

स्वतंत्र कानूनी राय लें: करोड़ों या लाखों रुपये के सौदे में दस्तावेजों की जांच ऐसे वकील से कराना बेहतर है जिसका विक्रेता या ब्रोकर से संबंध न हो।

वरिष्ठ नागरिक क्यों हो सकते हैं आसान निशाना?

रिटायरमेंट के बाद कई लोगों को एकमुश्त बड़ी रकम मिलती है। यह पैसा अक्सर सुरक्षित निवेश, मकान या जमीन में लगाने की योजना बनाई जाती है।

धोखाधड़ी करने वाला व्यक्ति यदि पीड़ित की आर्थिक स्थिति, रिटायरमेंट और उपलब्ध रकम के बारे में जान जाए तो भरोसा जीतकर निवेश का प्रस्ताव दे सकता है। दिल्ली के इस मामले में भी पुलिस का आरोप है कि रिटायरमेंट की बचत को प्रॉपर्टी में लगाने के लिए पीड़ित को तैयार किया गया था। पहले की पुलिस जानकारी में कहा गया था कि आरोपियों को पीड़ित के बारे में एक प्रॉपर्टी डीलर के माध्यम से जानकारी मिली थी।

इसलिए जमीन खरीदते समय सबसे महत्वपूर्ण नियम है, व्यक्ति पर नहीं, सत्यापित दस्तावेजों पर भरोसा करें।

दिल्ली पुलिस के इस मामले में आगे की जांच जारी है। लेकिन ₹1.75 करोड़ का यह केस जमीन खरीदने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जरूर है कि एक गलत प्रॉपर्टी डील जिंदगी भर की बचत पर भारी पड़ सकती है।

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Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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04-11-2026