CISF का खस रोपण अभियान: यमुना किनारे मिट्टी के कटाव से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक

CISF ने यमुना तट पर एक लाख खस स्लिप्स के साथ पौधारोपण अभियान का विस्तार किया है। जानिए खस मिट्टी के कटाव और पर्यावरण संरक्षण में क्यों महत्वपूर्ण है।
CISF DG Praveer Ranjan खस रोपण अभियान यमुना तट

क्या एक घास नदी के किनारों को मजबूत करने और मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद कर सकती है? खस यानी Vetiver को लेकर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का देशव्यापी अभियान इसी सवाल का एक व्यावहारिक जवाब सामने रखता है।

दिल्ली के गंगा विहार, सराय काले खां के पास यमुना तट पर CISF ने खस रोपण और पौधारोपण अभियान का विस्तार किया है। CISF के महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस अभियान का नेतृत्व किया।

यह भी पढ़ेंः अब हिंदी के इस्तेमाल के लिए भी सीआईएसएफ की हुई प्रशंसा जाने कैसे

इस पहल में पेड़ों के साथ बड़ी संख्या में खस की स्लिप्स लगाई गई हैं। इसका मकसद हरियाली बढ़ाने के साथ मिट्टी के कटाव को रोकना और नदी किनारे के कमजोर हिस्सों को प्राकृतिक तरीके से स्थिर करना है।

यमुना किनारे क्यों लगाया गया खस?

यमुना के किनारे मिट्टी का कटाव पर्यावरण से जुड़ी एक बड़ी चिंता है। नदी के बहाव और बारिश के दौरान किनारे की मिट्टी के खिसकने से जमीन का क्षरण बढ़ सकता है।

खस की जड़ें जमीन में गहराई तक जाती हैं और मिट्टी को पकड़ने में मदद करती हैं। इसी वजह से CISF इसे नदी किनारों, ढलानों और मिट्टी के कटाव वाले इलाकों के लिए उपयोगी पौधे के रूप में बढ़ावा दे रहा है।

दिल्ली में शुरू किया गया यह अभियान इसी सोच का हिस्सा है। यमुना रिवरफ्रंट पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने करीब 6 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई, जबकि दिल्ली वन विभाग ने 1,000 पौधे उपलब्ध कराए।

इस अभियान में सेमल, करंज, आंवला, जंगल जलेबी, अर्जुन, कचनार और मोरिंगा यानी सहजन के पौधों के साथ खस की एक लाख स्लिप्स लगाई गईं।

खस क्या है और पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

खस एक देशी और बारहमासी घास है। इसकी जड़ें जमीन में करीब 3 से 5 मीटर तक गहराई में जा सकती हैं।

CISF के अनुसार, खस मिट्टी की पकड़ क्षमता को करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। इसकी जड़ें मिट्टी को बांधने में मदद करती हैं, जिससे कटाव कम करने में सहायता मिल सकती है।

खस की एक खासियत यह भी है कि इसका इस्तेमाल प्रदूषण और भारी धातुओं से प्रभावित मिट्टी के उपचार में किया जा सकता है। इसके अलावा यह प्राकृतिक शीतलन और औषधीय गुणों के लिए भी जानी जाती है।

वीडियो देखेंः

यही कारण है कि खस का इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी संरक्षण और नदी किनारे हरित पट्टी तैयार करने के लिए किया जा रहा है।

पेड़ों के साथ खस से बनेगी हरित पट्टी

CISF की इस पहल में खस को पेड़ों के साथ लगाया गया है। इसका उद्देश्य एक ऐसी ग्रीन बैरियर तैयार करना है, जो मिट्टी को पकड़ने में मदद करे और लगाए गए पेड़ों की वृद्धि के लिए बेहतर परिस्थितियां बनाए।

यमुना तट जैसे संवेदनशील इलाके में इस तरह की हरित पट्टी मिट्टी के कटाव को कम करने और किनारे की जमीन को स्थिर रखने में उपयोगी हो सकती है।

यह पहल पौधारोपण को सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित रखने के बजाय मिट्टी, पानी और वनस्पति को एक साथ देखने का प्रयास है।

CISF का देशभर में खस रोपण अभियान

दिल्ली का यमुना तट CISF के खस अभियान का एक हिस्सा है। धनबाद स्थित BCCL में ओवरबर्डन डंप को हरित क्षेत्र में बदलने से जुड़े इको-रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट्स के अनुभव के बाद CISF खस के इस्तेमाल को देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की तैयारी कर रहा है।

‘CISF खस रोपण पहल 2026’ के तहत विभिन्न CISF यूनिट्स और नर्सरियों में करीब 15 से 20 लाख खस के पौधे लगाए जा रहे हैं।

समर शैल फार्म, पूर्णिया से प्राप्त पांच लाख खस के पौधों को यमुना बैंक, 8वीं रिजर्व बटालियन जयपुर, SSG नोएडा, 5वीं रिजर्व बटालियन गाजियाबाद और RTC देवली, टोंक में वितरित किया जा रहा है।

इसके अलावा सांबा, किश्तवाड़ और इडुक्की सहित अन्य स्थानों पर भी खस का रोपण और नर्सरी विकसित करने का काम किया जा रहा है।

CISF की योजना आने वाले समय में नदी किनारों और भूस्खलन प्रभावित इलाकों में भी खस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की है।

CISF ने लगाए 40 लाख से ज्यादा पेड़

CISF की हरित पहल खस तक सीमित नहीं है। बल के अनुसार नियमित वृक्षारोपण अभियान शुरू होने के बाद देशभर में अब तक 40 लाख से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं।

अब खस को इस अभियान से जोड़ने का मकसद ऐसे इलाकों में प्राकृतिक सुरक्षा तैयार करना है, जहां मिट्टी का कटाव, ढलान और नदी किनारे का क्षरण बड़ी समस्या बन सकता है।

CISF DG प्रवीर रंजन ने क्या कहा?

CISF के महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन के मुताबिक यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को लेकर सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ना जरूरी है और CISF अपने देशव्यापी अनुभव का इस्तेमाल इस जिम्मेदारी को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है। उनके अनुसार खस मिट्टी, नदी के किनारों और ढलानों की सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक और प्राकृतिक समाधान के रूप में उपयोगी हो सकती है।

यमुना और पर्यावरण संरक्षण के लिए क्यों अहम है यह पहल?

यमुना जैसे नदी तंत्र के संरक्षण में पानी की गुणवत्ता के साथ नदी किनारे की जमीन का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। किनारों पर वनस्पति बढ़ने से मिट्टी को पकड़ने में मदद मिल सकती है और हरित क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं।

CISF का खस अभियान इसी दिशा में एक प्रयोग है। अगर इस मॉडल को अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में सफलतापूर्वक अपनाया जाता है, तो नदी किनारों, ढलानों और मिट्टी के कटाव से प्रभावित जमीन के संरक्षण में इसका इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।

निष्कर्ष

CISF का खस रोपण अभियान पर्यावरण संरक्षण की ऐसी पहल है जिसमें पौधारोपण, मिट्टी संरक्षण और नदी किनारे की हरियाली को एक साथ जोड़ा गया है।

दिल्ली के यमुना तट पर लगाई गई एक लाख खस स्लिप्स इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। देश के अलग-अलग CISF केंद्रों में लाखों खस पौधे लगाने और भविष्य में नदी किनारों तथा भूस्खलन प्रभावित इलाकों तक इसे ले जाने की योजना इस पहल को व्यापक रूप देती है।

Support India Vistar
Picture of Alok Verma
Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | CISF का खस रोपण अभियान: यमुना किनारे मिट्टी के कटाव से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक | Meta पर मुकदमा क्यों हुआ? Facebook और Instagram पर बच्चों को लेकर क्या आरोप हैं | डिजिटल अरेस्ट स्कैम में कैसे फंसे रिटायर्ड कर्नल, दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा | WhatsApp scam से ऐसे बचाएगा मेटा का नया AI | Microsoft Passkey क्या है? SMS MFA से ज्यादा सुरक्षित Passkey ऐसे करें Enable | डेटिंग ऐप्प फ्रॉडः बुजुर्ग को ऐसे जाल में फंसाया और ठग लिया | सावधान! साइबर ठग बदल रहे हैं ठिकाना, बचना है तो जानिए ये उपाय | भारतीय व्यापार महोत्सव 2026 में रिकॉर्ड कारोबार, 1.8 लाख लोग पहुंचे, ₹5,000 करोड़ के अवसर | सावन महोत्सव में दिखी बिहार की महिलाओं की नई तस्वीर, स्टॉल से सम्मान तक छाया उद्यमिता का रंग | ऑनलाइन प्रिडेटर से कैसे बचें ? साइबर स्टॉकिंग, फेक प्रोफाइल और ऑनलाइन उत्पीड़न से सुरक्षा के तरीके |
21-08-2026