दिल्ली जंतर मंतर पर सीजेपी आंदोलन के बीच संसद मार्च पर बरसी लाठियों की गूंज अभी खामोश भी नहीं हुई थी कि रांची में छात्रों के विधानसभा मार्च पर लाठियां फिर बरस पड़ीं। जो भाजपा दिल्ली में खामोश थी वह झारखंड में मुखर है और जो विपक्ष दिल्ली में चिल्ला चिल्ला के लाठियों का हिसाब मांग रहा था वह झारखंड में खामोश है। जेनजी, छात्रों की जायज मांग और बढ़ते सियासी पारे के बीच एक सवाल रह जाता है, वह सवाल है लाठियां बरसाने वाली पुलिस क्या करे?
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लाठीचार्ज का असली ज़िम्मेदार कौन? ‘आखिरी बैरिकेड’ का अनकहा सच
प्रदर्शनकारी जब आखिरी बैरिकेड तक पहुंचते हैं तो पुलिस के सामने क्या विकल्प बचते हैं? संसद और विधानसभा मार्च, प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस की जिम्मेदारी से जुड़े इस सवाल को वीडियो में विस्तार से समझिए।
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प्रदर्शन के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी क्या है?
इस सवाल पर अब गहराई से सोचने की जरुरत है। किसी भी तरह के प्रदर्शन के लिए एक व्वस्था बनाई जाती है। दिल्ली के जंतर मंतर से शुरू करते हैं। शहर के बीचो-बीच स्थित जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए 23 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट का व्यापक निर्देश आया था। इसी के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए एक स्टैंडिंग आर्डर बनाया। इसी स्टैंडिंग आर्डर के मुताबिक प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाले आयोजकों को एक हलफनामा देना पड़ता है। सीजेपी ने भी यह हलफनामा दिया था। प्रदर्शन की अनुमति औऱ उससे 10 दिन पहले दिया जाने वाले इस हलफनामे में आयोजक स्वयं और अपने संगठन की ओर से सभी नियमों का पालन करने की लिखित जिम्मेदारी स्वीकार करता है। यदि इन शर्तों का उल्लंघन होता है तो आयोजक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए क्या नियम हैं?
हलफनामे में क्या-क्या देना होता है?
1. आयोजक की पूरी जानकारी
2. एनओसी और पुलिस अनुमति साथ रखना अनिवार्य
आयोजक को संबंधित भूमि स्वामी प्राधिकरण से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) लेना होगा तथा पुलिस द्वारा जारी मूल अनुमति पत्र कार्यक्रम के दौरान अपने पास रखना होगा, जिसे मांगने पर पुलिस अधिकारी को दिखाना होगा।
3. पुलिस से समन्वय के लिए संपर्क अधिकारी
हर आयोजन में एक जिम्मेदार संपर्क अधिकारी (Liaison Officer) नियुक्त करना होगा, जिसका नाम, पद और मोबाइल नंबर पुलिस को पहले से देना होगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर पुलिस सीधे उससे संपर्क कर सके।
4. पानी, चिकित्सा और स्वयंसेवकों की व्यवस्था
आयोजक को पीने के पानी, प्राथमिक उपचार तथा पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवकों की व्यवस्था करनी होगी। स्वयंसेवकों की सूची और उनके संपर्क विवरण भी पहले से पुलिस को उपलब्ध कराने होंगे।
5. अधिकतम 1000 प्रदर्शनकारियों की जिम्मेदारी
आयोजक यह लिखित आश्वासन देगा कि जंतर-मंतर पर प्रतिभागियों की संख्या 1000 से अधिक नहीं होगी तथा प्रदर्शन केवल निर्धारित स्थान पर और सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच ही होगा।
6. झंडे और बैनर पर भी नियम
हलफनामे में यह भी स्वीकार करना होगा कि झंडों और बैनरों के डंडे 2 फीट से अधिक लंबे नहीं होंगे तथा बैनर का आकार 9 फीट × 6 फीट से अधिक नहीं होगा।
7. हथियार और नकली हथियार भी प्रतिबंधित
आयोजक यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी प्रतिभागी लाठी, तलवार, भाला, आग्नेयास्त्र या ऐसा कोई सामान नहीं लाएगा जिसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। यहां तक कि AK-47, कार्बाइन, पिस्तौल या अन्य हथियारों जैसी दिखने वाली नकली वस्तुएं भी प्रतिबंधित रहेंगी।
8. भड़काऊ भाषण और सामाजिक वैमनस्य पर रोक
आयोजक यह भी सुनिश्चित करेगा कि कोई भी व्यक्ति ऐसा भाषण या नारेबाजी नहीं करेगा जिससे धार्मिक, जातीय, भाषाई या अन्य आधारों पर वैमनस्य फैलने या सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो।
9. पुलिस के निर्देश मानना अनिवार्य
सभी प्रतिभागियों को प्रदर्शन के दौरान पुलिस या किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा दिए गए वैध निर्देशों का तत्काल पालन करना होगा।
10. सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं
आयोजक यह जिम्मेदारी लेगा कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा, सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा नहीं डाली जाएगी और आगजनी जैसी घटनाएं नहीं होंगी।
11. बिना अनुमति मार्च नहीं
प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थल से जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी। केवल पार्किंग स्थल से प्रदर्शन स्थल तक जाने या पुलिस की अनुमति से प्रतीकात्मक मार्च ही किया जा सकेगा।
12. पुतला दहन, टेंट और लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध
आयोजक को यह भी लिखित रूप से स्वीकार करना होगा कि कार्यक्रम के दौरान पुतला दहन, दस्तावेज जलाना, कचरा फैलाना, टेंट लगाना या बिना अनुमति लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जाएगा।
13. ट्रैक्टर, ट्रॉली और जानवरों की अनुमति नहीं
धरना स्थल पर ट्रैक्टर, ट्रॉली, बैलगाड़ी, हाथगाड़ी या घोड़े, ऊंट, हाथी जैसे जानवर नहीं लाए जा सकेंगे।
14. नियम टूटे तो आयोजक होगा जिम्मेदार
हलफनामे की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यदि प्रदर्शनकारी नियंत्रण से बाहर होते हैं या नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो आयोजक स्वयं जिम्मेदार माना जाएगा और उसके विरुद्ध मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। आयोजक को हर परिस्थिति में पुलिस के साथ सहयोग करने का भी वचन देना होगा।
प्रदर्शन के नियम टूटें तो पुलिस क्या कर सकती है?
अब हिंदुस्तान के चाहे जिस कोने में आप रहते हैं जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी प्रदर्शन को आपने कम से कम विजुअल, सोशल मीडिया और समाचारों के माध्यम से करीब से देखा होगा। आप यह भी समझ गए होंगे कि उपरोक्त हलफनामे का एक भी शर्त सीजेपी आंदोलन में माना नहीं जा रहा था।
हलफनामे के उल्लंघन के बावजूद बल प्रयोग नहीं किया गया था। बल प्रयोग कब हुआ जब 20 जुलाई को संसद मार्च आरंभ हुआ और आंदोलनकारी किसी भी बैरीकेड पर रूक नहीं रहे थे। भीड़ रेल भवन पर पहुंच गई थी। ये भी सोचने वाली बात है कि आंदोलनकारियों में से कोई इतना घायल नहीं हुआ था जितने की पुलिसकर्मी घायल हुए। इसका मतलब ये नहीं कि मैं पुलिसिया कार्रवाई को जायज ठहरा रहा हूं। झारखंड में भी कमोबेश यही हुआ। आंदोलन कई दिनों से चल रहा था जब वह विधानसभा की ओर बढ़ा तब पुलिस का बल प्रयोग हुआ। यानि दोनों जगहों पर पुलिस अपना काम ही कर रही थी।
संसद और विधानसभा की ओर मार्च पर पुलिस की जिम्मेदारी क्या है?
अब मूल सवाल पर जरा फिर से सोचिए विधान सभा हो या संसद भवन स्थानीय पुलिस की क्या जिम्मेवारी है। उसकी रक्षा करना ना! लेकिन जब भीड़ लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले इमारतों की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस को क्या करना चाहिए। आंदोलनकारियों के जोश किसी भी सुरक्षा बल से मुकाबले के लिए उतावले होते हैं। ऐसे में पुलिस को क्या करना चाहिए इस पर कोई सोचने को तौयार नहीं है।
सियासी लाभ के लिए अचानक सब जेनजी के हितैषी बनने की होड़ में एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश तो कर रहे हैं। मगर इसकी जड़ को संभालने वाली पुलिस नीति पर गंभीरता से ना तो कोई चर्चा कर रहा है ना कोई सोचने को तैयार है। भीड़ को प्रबंध करने का नया नजरिया क्या होना चाहिए? आजाद भारत में सिस्टम के खिलाफ विरोध का पैमाना क्या हो ये सब तय करने की आवश्यकता अब आ चुकी है।
कहना जरूरी है कि इन सबके पीछे सिस्टम के सुनवाई ना करने की आदत है। जिसे आजादी के इतने साल बाद भी नहीं बदला जा सका है। एक आदमी या छात्र अपनी गुहार लेकर जब सिस्टम के पास जाता है तो सिस्टम का रवैया क्या होता है इसे हम सब जानते हैं। तो क्या बिना सिस्टम की आदत को बदले जेन जी, मिलेनियम या किसी भी पीढ़ी का सच्चा हितैषी बना जा सकता है।












