सोशल मीडिया पर महंगा iPhone, स्मार्टफोन या फर्नीचर बाजार से बहुत कम कीमत पर मिल रहा हो तो पहला सवाल यह होना चाहिए कि आखिर इतना सस्ता क्यों? उल्हासनगर में सामने आया साइबर ठगी का मामला बताता है कि स्क्रीन पर दिखने वाला शानदार ऑफर आपको सामान नहीं, सीधे ठगों के जाल तक पहुंचा सकता है। इस मामले में कथित गिरोह खरीदार को भरोसा दिलाने के लिए पार्सल की पैकिंग का वीडियो और बारकोड तक भेजता था। पैसे मिलते ही न सामान आता था, न विक्रेता का जवाब। सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञान से ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
यह भी पढ़ेंः ऑनलाइन फ्रॉड: पहले दिखाया नकली मुनाफा, फिर 30 लाख फंसे, ऐसे पहचानें पूरा खेल
Instagram पर सस्ते सामान का विज्ञापन बना जाल
उल्हासनगर पुलिस क्राइम ब्रांच ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर ऐसे अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है, जो Instagram पर फर्जी खातों से महंगे iPhone, दूसरे स्मार्टफोन और फर्नीचर बेहद कम कीमत पर बेचने के विज्ञापन देता था।
किसी व्यक्ति ने विज्ञापन देखकर दिलचस्पी दिखाई तो बातचीत WhatsApp पर पहुंच जाती थी। यहां संभावित खरीदार को यकीन दिलाया जाता था कि उसका सामान पैक हो चुका है और जल्द भेज दिया जाएगा।
यह भी पढ़ेंः पिग बुचरिंग स्कैम: प्यार के जाल में फंसाकर नकली क्रिप्टो ऐप से कैसे लूटते हैं साइबर ठग?
इसके लिए कथित तौर पर पार्सल पैकिंग के वीडियो और फर्जी बारकोड तक भेजे जाते थे। खरीदार को लगता था कि सामने वाला असली कारोबारी है। इसके बाद ऑनलाइन भुगतान मांगा जाता और पैसे पहुंचते ही संपर्क बंद कर दिया जाता था।
114 बैंक खातों ने खोला बड़े नेटवर्क का राज
इस मामले की सबसे अहम बात पांच गिरफ्तारियां नहीं, बल्कि पैसे का रास्ता है। पुलिस जांच में कथित नेटवर्क से जुड़े 114 बैंक खातों का पता चला है। आरोपियों से जब्त मोबाइल फोन की कीमत करीब ₹1.20 लाख बताई गई है।
पुलिस के मुताबिक नेटवर्क में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों और ईमेल पतों का संबंध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कम से कम 75 शिकायतों से मिला है।
यानी एक व्यक्ति को सस्ता मोबाइल बेचने के नाम पर हुई ठगी के पीछे कई बैंक खातों और डिजिटल पहचान वाला बड़ा नेटवर्क हो सकता है।
Fake Ads Scam में सबसे बड़ा हथियार है भरोसा
साइबर अपराध विशेषज्ञ प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक ठग फर्जी विज्ञापन के साथ नकली डिलीवरी सबूत का इस्तेमाल कर खरीदार का भरोसा जीतते हैं।
यही इस तरह के Online Shopping Fraud को खतरनाक बनाता है। अब ठग सीधे यह नहीं कहते कि पैसे भेज दीजिए। पहले सोशल मीडिया विज्ञापन दिखता है, फिर WhatsApp पर बातचीत होती है। इसके बाद पैकिंग का वीडियो, पार्सल या बारकोड दिखाकर ऐसा माहौल बनाया जाता है कि खरीदार को सौदा असली लगने लगे।
इसके बाद भुगतान कराया जाता है।
सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन कैसे पहचानें?
हर सोशल मीडिया विज्ञापन फर्जी नहीं होता, लेकिन विज्ञापन दिखाई देने भर से किसी विक्रेता की विश्वसनीयता साबित नहीं होती। ठग सोशल मीडिया की बड़ी पहुंच का फायदा उठाकर नकली कारोबारी खाते बना सकते हैं।
किसी प्रसिद्ध दुकान जैसा नाम, लोगो और उत्पादों की तस्वीरें कॉपी करना मुश्किल नहीं है। इसलिए Instagram या Facebook पर दिखे विज्ञापन से सीधे खरीदारी करने से पहले संबंधित कंपनी या विक्रेता की आधिकारिक वेबसाइट और संपर्क विवरण अलग से जांचना बेहतर है।
सबसे बड़ा संकेत असामान्य रूप से कम कीमत है। जो फोन बाजार में काफी महंगा है, वही किसी अनजान सोशल मीडिया पेज पर आधे या उससे भी कम दाम में मिल रहा हो तो भुगतान रोककर जांच करनी चाहिए।
WhatsApp पर पार्सल वीडियो देखकर भरोसा न करें
पैकिंग वीडियो देखकर यह मान लेना कि सामान वास्तव में आपके पते पर भेज दिया गया है, भारी पड़ सकता है। वीडियो पहले से रिकॉर्ड किया हुआ हो सकता है। बारकोड की तस्वीर भी असली डिलीवरी की गारंटी नहीं है।
कूरियर कंपनी का नाम दिया गया है तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर ट्रैकिंग नंबर खुद जांचें। विक्रेता के भेजे किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
इसी तरह किसी व्यक्ति के निजी बैंक खाते या बार-बार बदलते UPI नंबर पर भुगतान मांगा जाए तो इसे चेतावनी मानें।
ऑनलाइन खरीदारी में इन बातों से बच सकती है रकम
बहुत ज्यादा डिस्काउंट देखकर तुरंत भुगतान न करें। सोशल मीडिया पेज कब बनाया गया, पुराने पोस्ट कैसे हैं और उसके संपर्क विवरण सही हैं या नहीं, यह देखें। महंगे सामान के लिए अनजान विक्रेता को पूरा अग्रिम भुगतान करने से बचें।
किसी प्रसिद्ध रिटेलर का नाम इस्तेमाल किया गया हो तो ऑफर की पुष्टि उसकी आधिकारिक वेबसाइट से करें। केवल WhatsApp चैट, पार्सल की फोटो, वीडियो या बारकोड को विक्रेता की असलियत का प्रमाण न मानें।
अगर ठगी हो जाए तो समय बहुत महत्वपूर्ण है। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायत 1930 पर की जा सकती है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है।
उल्हासनगर का मामला एक जरूरी चेतावनी देता है। ऑनलाइन ठगी की शुरुआत अब किसी संदिग्ध फोन कॉल से ही हो, यह जरूरी नहीं। इसकी शुरुआत आपके Instagram या Facebook फीड में दिख रहे एक बेहद आकर्षक ऑफर से भी हो सकती है।
कैसे करें शिकायत
फिर भी अगर आपके साथ किसी तरह की ठगी हो जाती है तो तुरंत 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करें। आप सरकारी पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं। याद रखिए सावधानी ही बचाव है। इस सरकारी पोर्टल पर संदिग्ध मोबाइल नंबर, ईमेल, खाता संख्या, URL आदि जांचने के लिए Suspect Repository की सुविधा भी उपलब्ध है











