बॉलिंग हाथ घुमाकर क्यों की जाती है? जानिए क्रिकेट बॉलिंग का इतिहास और साइंस

क्रिकेट में गेंदबाज हाथ घुमाकर बॉलिंग क्यों करते हैं? इसके पीछे का विज्ञान और इतिहास जानकर आप हैरान रह जाएंगे।
क्रिकेट गेंदबाज ओवरआर्म एक्शन में तेज गेंद फेंकते हुए, बॉलिंग तकनीक दिखाता दृश्य

आईपीएल क्रिकेट हो या अन्य कोई क्रिकेट मैच इन्हें देखने का लुत्फ आप भी जरूर उठाते होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गेंदबाज बॉल फेंकते सम हाथ क्यों घुमाता है। क्रिकेट में जब कोई गेंदबाज पूरी ताकत से हाथ घुमाकर गेंद फेंकता है, तो उसमें रफ्तार, उछाल और स्विंग का शानदार मेल दिखाई देता है।

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यह तकनीक शुरू से नहीं थी। एक समय ऐसा भी था जब गेंदबाज गेंद को जमीन पर लुढ़काकर बल्लेबाज तक पहुंचाते थे। यहीं से शुरू होती है क्रिकेट बॉलिंग के बदलते रूप की दिलचस्प कहानी।

गेंदबाज हाथ घुमाकर बॉलिंग क्यों करते हैं

हाथ घुमाकर बॉलिंग करने का सबसे बड़ा कारण है ताकत और नियंत्रण। जब गेंदबाज अपने कंधे के पीछे से पूरा हाथ घुमाता है, तो वह अपने शरीर की मांसपेशियों का पूरा इस्तेमाल कर पाता है। इस प्रक्रिया में रन-अप की गति और हाथ के आर्क का मेल गेंद में ज्यादा गतिज ऊर्जा पैदा करता है।

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इसका सीधा असर गेंद की स्पीड और बाउंस पर पड़ता है। इसके साथ ही ऊंचाई से गेंद छोड़ने पर बल्लेबाज के लिए गेंद को पढ़ना कठिन हो जाता है, जिससे गेंदबाज को बढ़त मिलती है।

स्विंग और स्पिन में हाथ घुमाने की भूमिका

जब गेंदबाज हाथ को सीधा घुमाता है, तो उसकी कलाई पर पूरा नियंत्रण रहता है। यही नियंत्रण गेंद की सीम को सही दिशा में रखने में मदद करता है। तेज गेंदबाज इसी तकनीक से हवा में स्विंग पैदा करते हैं। वहीं स्पिन गेंदबाज ऊंचे रिलीज पॉइंट का फायदा उठाकर पिच पर गेंद को ज्यादा घुमा पाते हैं।

यानी हाथ घुमाने का तरीका सिर्फ ताकत नहीं देता, बल्कि गेंद की दिशा और मूवमेंट भी तय करता है।

शुरुआत में कैसी होती थी क्रिकेट बॉलिंग

क्रिकेट के शुरुआती दौर में बॉलिंग का तरीका आज से बिल्कुल अलग था। उस समय गेंदबाज अंडरआर्म स्टाइल में गेंद फेंकते थे।इसमें गेंद को हवा में डालने के बजाय जमीन पर लुढ़काया जाता था। उस दौर की पिचें भी असमान होती थीं, इसलिए यह तरीका कारगर माना जाता था।

लेकिन जैसे-जैसे पिच बेहतर हुईं, बल्लेबाजों ने इन गेंदों पर आसानी से रन बनाने शुरू कर दिए।

राउंडआर्म बॉलिंग की शुरुआत कैसे हुई

19वीं सदी की शुरुआत में गेंदबाजों ने नए तरीके खोजने शुरू किए। इसी दौरान राउंडआर्म बॉलिंग सामने आई, जिसमें हाथ को कंधे के बराबर रखकर गेंद फेंकी जाती थी। इस तकनीक की शुरुआत John Willes और उनकी बहन Christina Willes से जुड़ी मानी जाती है।

कहा जाता है कि कपड़ों की वजह से नीचे से गेंद फेंकने में परेशानी होने पर हाथ ऊपर उठाकर गेंद डालने की शुरुआत हुई, जिसने आगे चलकर क्रिकेट को बदल दिया।

जब बॉलिंग को लेकर हुआ बड़ा विवाद

राउंडआर्म बॉलिंग के आने के बाद क्रिकेट जगत में बड़ा विवाद खड़ा हो गया। कई अंपायर इसे नियमों के खिलाफ मानते थे और गेंदबाजों को नो-बॉल देते थे।

कई बार खिलाड़ी विरोध में मैदान छोड़कर चले गए। खेल दो हिस्सों में बंट गया था। एक पक्ष इसे नया और जरूरी बदलाव मानता था, जबकि दूसरा इसे गलत मानता रहा।

1864 में आया बड़ा बदलाव

आखिरकार साल 1864 में Marylebone Cricket Club ने नियमों में बदलाव किया। ओवरआर्म बॉलिंग को आधिकारिक मंजूरी दी गई। इसी फैसले को क्रिकेट में मॉडर्न बॉलिंग की शुरुआत माना जाता है। इस बदलाव ने गेंदबाजों को नई ताकत और आजादी दी, जिससे खेल का स्वरूप पूरी तरह बदल गया।

तेज गेंदबाजों का दौर और नई तकनीक

ओवरआर्म बॉलिंग के बाद गेंदबाजों की भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ गए। 20वीं सदी में Dennis Lillee और Jeff Thomson जैसे खिलाड़ियों ने अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को परेशान किया। इसके बाद Wasim Akram और Waqar Younis ने रिवर्स स्विंग जैसी कला से गेंदबाजी को एक नए स्तर पर पहुंचाया।

गेंदबाजी में नियम क्यों जरूरी हैं

क्रिकेट में गेंदबाजी करते समय कोहनी को एक तय सीमा से ज्यादा मोड़ना अवैध माना जाता है। इसे चकिंग कहा जाता है। हाथ घुमाकर सही तकनीक से गेंदबाजी करने पर गेंदबाज नियमों के भीतर रहते हुए पूरी ताकत लगा सकता है। इससे खेल में संतुलन बना रहता है।

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31-08-2026