दिल्ली मेट्रो सुरक्षा व्यवस्था कैसे काम करती है, DG CISF ने जांचीं तैयारियां

दिल्ली मेट्रो के 303 स्टेशनों और 10 लाइनों की सुरक्षा में 12,000 से अधिक CISF जवान तैनात हैं। जानिए लाखों यात्रियों की सुरक्षा के लिए निगरानी, ट्रेनिंग और क्विक रिस्पॉन्स व्यवस्था कैसे काम करती है।
शास्त्री पार्क ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर में दिल्ली मेट्रो सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते DG CISF प्रवीर रंजन और अन्य अधिकारी

क्या आप जानते हैं दिल्ली की लाइफ लाइन बन चुकी मेट्रो की सुरक्षा कैसे होती है? स्टेशन के प्रवेश द्वार पर सामान की जांच और यात्रियों की तलाशी सुरक्षा तो बस आपको दिखाई देने भर की है। सच ये है कि इसके पीछे कंट्रोल रूम, सर्विलांस, प्रशिक्षित जवानों और त्वरित कार्रवाई की एक बड़ी व्यवस्था काम करती है।

यह भी पढ़ेंः दिल्ली मेट्रो के ये सात बेजुबान रक्षक दस साल से कर रहे थे सेवा हुए अब रिटायर

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने CISF की DMRC यूनिट का दौरा कर इसी दिल्ली मेट्रो सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। उनका मकसद सिर्फ सुरक्षा प्रबंधों की समाक्षा नहीं बल्कि ऑपरेशनल तैयारियों और प्रशिक्षण से लेकर जवानों के आवास तथा कल्याण से जुड़े इंतजामों तक की जानकारी लेना भी था।

12 हजार से अधिक जवान संभालते हैं दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा

CISF की DMRC यूनिट बल की सबसे बड़ी यूनिट है। इसमें 12,000 से अधिक जवान तैनात हैं। यह यूनिट दिल्ली मेट्रो की 10 लाइनों और 303 स्टेशनों की सुरक्षा संभालती है। इसके सामने प्रतिदिन 70 लाख से अधिक यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।

इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की जांच करते समय दो जरूरतों का संतुलन जरूरी होता है। पहली जरूरत स्टेशन और मेट्रो नेटवर्क को सुरक्षित रखने की है। दूसरी जरूरत यह सुनिश्चित करना है कि जांच के कारण यात्रियों को बेवजह परेशानी न हो और उनकी यात्रा सुगम बनी रहे।

महानिदेशक प्रवीर रंजन ने भी इसी संतुलन पर जोर दिया। उनके मुताबिक दिल्ली मेट्रो का आकार, इसकी रफ्तार और प्रतिदिन लाखों लोगों की आवाजाही इसे सुरक्षा के लिहाज से अलग बनाती है। सुरक्षा बनाए रखने के लिए सतर्क जवान, बेहतर प्रशिक्षण, तकनीक और DMRC के साथ करीबी तालमेल जरूरी है।

मेट्रो सुरक्षा में कंट्रोल रूम की क्या भूमिका है

शास्त्री पार्क स्थित ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर यानी OCC दिल्ली मेट्रो सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। महानिदेशक ने इस सेंटर का दौरा कर सर्विलांस और किसी घटना पर प्रतिक्रिया देने की प्रणाली को परखा।

ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर से मेट्रो नेटवर्क में चल रही गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। किसी संदिग्ध गतिविधि या दूसरी आपात स्थिति की सूचना मिलने पर संबंधित स्टेशन और सुरक्षा टीमों के साथ समन्वय किया जाता है। ऐसी व्यवस्था में सूचना कितनी जल्दी संबंधित जवान तक पहुंचती है और मौके पर प्रतिक्रिया कितने समय में होती है, यह काफी मायने रखता है।

यह भी पढ़ेंः CISF Training: ड्रोन, साइबर सुरक्षा और कमांडो ट्रेनिंग से कैसे तैयार होते हैं अधिकारी?

महानिदेशक ने लगातार मुस्तैदी, क्विक रिस्पॉन्स और तकनीक आधारित निगरानी की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि संभावित खतरे से निपटने की तैयारी ऐसी होनी चाहिए जिससे आम यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो।

कवच ट्रेनिंग सेल में जवानों को कैसे तैयार किया जाता है

तकनीक तभी उपयोगी साबित होती है, जब उसे संभालने वाले जवान सही प्रशिक्षण प्राप्त करें। इसी कारण महानिदेशक ने शास्त्री पार्क स्थित ‘कवच ट्रेनिंग सेल’ का निरीक्षण किया। उन्हें यहां चल रही ट्रेनिंग गतिविधियों और ऑपरेशनल तैयारियों के बारे में जानकारी दी गई।

दिल्ली मेट्रो में तैनात जवानों को बड़ी भीड़ संभालने, संदिग्ध गतिविधि पहचानने और आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के लिए तैयार रहना पड़ता है। यात्रियों से संवाद और जांच के दौरान शिष्ट व्यवहार भी उनकी ड्यूटी का अहम हिस्सा है।

‘प्रकृति पार्क’ में आयोजित सैनिक सम्मेलन के दौरान महानिदेशक प्रवीर रंजन ने जवानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने ऑपरेशनल ड्यूटी, पेशेवर तैयारी और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर बात की। उन्होंने व्यस्त शहरी परिवहन व्यवस्था में जवानों द्वारा निभाई जा रही ड्यूटी की सराहना भी की।

यमुना बैंक में नई बैरक का उद्घाटन

मेट्रो की सुरक्षा में तैनात जवान अलग-अलग पालियों में दिन-रात ड्यूटी करते हैं। ऐसे में उनके रहने और आराम करने की सुविधाओं का असर काम पर भी पड़ता है। महानिदेशक ने नवनिर्मित ‘यमुना बैंक पुरुष बैरक’ का उद्घाटन किया।

उन्होंने निर्माणाधीन ‘पुश्ता शकूरपुर बैरक’ का निरीक्षण कर काम की प्रगति की जानकारी भी ली। इन सुविधाओं का उद्देश्य मेट्रो सुरक्षा में तैनात जवानों को बेहतर आवासीय और कामकाजी माहौल उपलब्ध कराना है।

नेतृत्व और जवानों के सीधे संवाद की एक तस्वीर शास्त्री पार्क बैरक में भी दिखाई दी, जहां महानिदेशक ने जवानों के साथ दोपहर का भोजन किया।

CISF और DMRC का तालमेल क्यों जरूरी है

दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा किसी एक एजेंसी के प्रयास से पूरी नहीं हो सकती। स्टेशन संचालन, यात्रियों की आवाजाही और ट्रेन सेवाओं से जुड़े फैसलों के लिए CISF तथा DMRC के अधिकारियों के बीच नियमित संपर्क जरूरी है।

महानिदेशक ने DMRC के मुख्य सुरक्षा आयुक्त एवं निदेशक ऑपरेशंस सुवाशीष चौधरी और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ सुरक्षा, यात्रियों की आवाजाही तथा आपसी समन्वय पर चर्चा की।

सुवाशीष चौधरी ने दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा को साझा जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षित और सुगम आवाजाही में DMRC और CISF का करीबी समन्वय अहम रहा है। उन्होंने CISF के मार्गदर्शन और ऑपरेशनल सहयोग की सराहना करते हुए संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

दौरे के अलग-अलग कार्यक्रमों में एडीजी मुख्यालय विजय प्रकाश, आईजी एनसीआर सेक्टर नवज्योति गोगोई, CISF यूनिट DMRC के डीआईजी एवं यूनिट कमांडर संतोष चालके और बल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यात्रियों को क्या समझना चाहिए

दिल्ली मेट्रो सुरक्षा व्यवस्था में CISF जवानों की तैनाती, सामान की जांच, यात्रियों की तलाशी, कैमरों से निगरानी, कंट्रोल रूम और त्वरित कार्रवाई करने वाली टीमों की भूमिका जु जुड़ी होती है। यात्रियों का सहयोग इस व्यवस्था को अधिक असरदार बनाता है।

स्टेशन या ट्रेन में कोई लावारिस वस्तु, संदिग्ध व्यवहार या असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो उसे छूने या नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत CISF अथवा मेट्रो कर्मचारियों को जानकारी देनी चाहिए। सुरक्षा जांच में सहयोग और अफवाहों से दूरी भी सुरक्षित यात्रा का हिस्सा है।

प्रवीर रंजन की समीक्षा का संदेश साफ है। दिल्ली मेट्रो जैसे बड़े नेटवर्क की सुरक्षा में तकनीक और ट्रेनिंग जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ जवानों की सतर्कता, एजेंसियों का तालमेल और यात्रियों का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

Support India Vistar
Picture of Alok Verma
Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

Latest Posts

BREAKING NEWS
दिल्ली में 100 करोड़ का हेरोइन बरामद देखें वीडियो | दिल्ली में पकड़ा गया खलिस्तानी आतंकी | CyMAC क्या है: साइबर हमले पर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां कैसे करेंगी साझा कार्रवाई | दिल्ली मेट्रो सुरक्षा व्यवस्था कैसे काम करती है, DG CISF ने जांचीं तैयारियां | 15 मीटर स्लीपर बस में क्या है खास, 42 बर्थ के साथ लंबी यात्रा होगी अधिक आरामदायक | Aadhaar VID कैसे बनाएं? मोबाइल से 6 चरणों में निकालें 16 अंकों की Virtual ID | पश्चिम बंगाल साइबर फ्रॉड रैकेट कैसे काम करता था, ऑपरेशन साइबर प्रहार से समझिए ठगी का पूरा नेटवर्क | रक्षाबंधन पर देशभर के बाजारों में रौनक, जानिए कौन सी राखियों की मांग | नक्सलवाद से ISI नेटवर्क तक, अमित शाह की रणनीति का असर ? आंकड़े बताते हैं आंतरिक सुरक्षा की बदली तस्वीर | I4C साइबर अपराध पर कैसे भारी पड़ रहा है? जानिए पुलिस और आम लोगों के लिए कैसे काम करता है यह सिस्टम | Cyber Fraud का नया मॉडल: AI कैसे बदल रहा है ऑनलाइन ठगी का तरीका | मोबाइल कनेक्शन का नया नियम क्या है? मोबाइल कनेक्शन की सीमा क्या है और अपने नाम पर कितने SIM हैं, यह जानना क्यों जरूरी है? |
27-08-2026