15 मीटर स्लीपर बस में क्या है खास, 42 बर्थ के साथ लंबी यात्रा होगी अधिक आरामदायक

ICAT ने सिनाटी ऑटोमोटिव की 15 मीटर मल्टी-एक्सल स्लीपर बस को पहला अनुपालन प्रमाण-पत्र दिया है। जानिए 42 बर्थ वाली इस बस की क्षमता, सुरक्षा मानक और खासियत।
ICAT से प्रमाणित 15 मीटर मल्टी-एक्सल स्लीपर बस का बाहरी दृश्य

लंबी दूरी की बस यात्रा में जगह, आराम और सुरक्षा सबसे बड़ी जरूरत होती है। भारत में अब 15 मीटर लंबी मल्टी-एक्सल स्लीपर बस को तय वाहन मानकों के तहत प्रमाणन मिला है। इस बस में अधिकतम 42 स्लीपर बर्थ की व्यवस्था की जा सकती है। इसका हाइब्रिड मॉडल बैठकर और सोकर यात्रा करने वाले यात्रियों को एक ही बस में जगह देता है।

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इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी यानी ICAT ने AIS-119 और AIS-153 मानकों के तहत इस श्रेणी का पहला अनुपालन प्रमाण-पत्र जारी किया है। यह प्रमाणन सिनाटी ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड की 15 मीटर लंबी मल्टी-एक्सल स्लीपर बस को दिया गया है।

15 मीटर मल्टी-एक्सल स्लीपर बस क्या है

सामान्य बस की तुलना में 15 मीटर स्लीपर बस का ढांचा लंबा होता है। इसके वजन और लंबाई को संभालने के लिए एक से अधिक एक्सल लगाए जाते हैं। एक्सल उस हिस्से को कहा जाता है जिस पर बस के पहिये और वाहन का भार टिका होता है।

मल्टी-एक्सल व्यवस्था लंबी बस का वजन अलग-अलग पहियों पर बांटने में मदद करती है। इससे वाहन का संतुलन, भार वहन क्षमता और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान स्थिरता बेहतर हो सकती है। बस का वास्तविक संचालन हालांकि सड़क की स्थिति, गति, रखरखाव और चालक के व्यवहार पर भी निर्भर करता है।

15 मीटर की लंबाई बस निर्माता को यात्री के लिए अधिक जगह उपलब्ध कराती है। इसी कारण ऐसी बसों में स्लीपर बर्थ, सामान रखने की जगह, यात्रियों के आने-जाने का रास्ता और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था की जा सकती है।

स्लीपर और हाइब्रिड मॉडल में कितने यात्री सफर कर सकेंगे

सिनाटी ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड की प्रमाणित बस दो प्रमुख यात्री व्यवस्थाओं में तैयार की जा सकती है।

पूरी तरह स्लीपर मॉडल में 42 बर्थ की क्षमता दी गई है। यह व्यवस्था उन मार्गों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां यात्री रातभर या कई घंटे तक सफर करते हैं।

हाइब्रिड स्लीपर मॉडल में 21 बर्थ और 42 सीटों की व्यवस्था है। इससे एक ही बस में बैठकर और सोकर यात्रा करने के विकल्प मिल सकते हैं। बस ऑपरेटर मार्ग की दूरी, यात्रियों की मांग और सेवा के प्रकार के अनुसार उचित मॉडल चुन सकेंगे।

प्रमाणन का यात्री के लिए क्या मतलब है

बस का अनुपालन प्रमाणन केवल उसके आकार या यात्री क्षमता की पुष्टि नहीं करता। इसके लिए वाहन को लागू तकनीकी और सुरक्षा शर्तों के अनुसार जांचा जाता है।

इस 15 मीटर स्लीपर बस की जांच में संरचनात्मक मजबूती, आपातकालीन निकास, आग से बचाव, यात्रियों की आवाजाही, बैठने और सोने की जगह तथा आराम से संबंधित शर्तों को शामिल किया गया। वाहन का मूल्यांकन केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के स्वीकार्य प्रावधानों के अनुसार किया गया है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रमाणित बस में सड़क दुर्घटना का कोई खतरा नहीं रहेगा। प्रमाणन यह बताता है कि जांच के समय प्रस्तुत वाहन मॉडल ने संबंधित मानकों और नियमों की जरूरी शर्तों को पूरा किया। सुरक्षित यात्रा के लिए नियमित रखरखाव, टायरों की स्थिति, चालक की ट्रेनिंग, नियंत्रित गति और बस ऑपरेटर की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।

AIS-119 और AIS-153 मानक क्यों महत्वपूर्ण हैं

AIS का अर्थ ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड है। ये मानक वाहनों की बनावट, सुरक्षा और उपयोग से जुड़ी तकनीकी शर्तों को तय करने में भूमिका निभाते हैं।

AIS-119 स्लीपर कोच से जुड़ी जरूरतों को संबोधित करता है। इसमें स्लीपर बर्थ की व्यवस्था, यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह, आपात स्थिति में बाहर निकलने की सुविधा और बस के भीतर सुरक्षित आवागमन जैसे विषय शामिल होते हैं।

AIS-153 बस बॉडी से जुड़ी सुरक्षा और संरचनात्मक जरूरतों के मूल्यांकन से संबंधित है। 15 मीटर लंबी बस के मामले में ढांचे की मजबूती इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि अधिक लंबाई और यात्री क्षमता वाहन पर भार बढ़ाती है।

इन दोनों मानकों के तहत प्रमाणन मिलने से यह पुष्टि होती है कि वाहन मॉडल की जांच केवल बाहरी डिजाइन देखकर नहीं की गई। बस की संरचना, यात्री व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी जरूरी शर्तों को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया।

ICAT क्या करता है

इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी वाहनों की जांच, प्रमाणन और होमोलोगेशन से जुड़ी सेवाएं देता है। होमोलोगेशन वह प्रक्रिया है जिसके तहत यह देखा जाता है कि कोई वाहन या उसका मॉडल लागू नियमों और तकनीकी मानकों को पूरा करता है या नहीं।

ICAT ने पहली बार स्वीकार्य बस बॉडी की सबसे लंबी संरचनाओं में शामिल 15 मीटर मल्टी-एक्सल स्लीपर बस को यह अनुपालन प्रमाण-पत्र दिया है। इस कारण प्रमाणन को भारतीय लंबी दूरी यात्री परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ICAT के निदेशक सौरभ दलेला ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सिनाटी ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नरेश कुमार यादव को प्रमाण-पत्र सौंपा।

सौरभ दलेला के अनुसार, यह प्रमाणन उन्नत यात्री वाहनों की जांच और प्रमाणन में ICAT की तकनीकी क्षमता को दिखाता है। उन्होंने यात्री सुरक्षा, नियमों के अनुपालन और तकनीकी प्रगति के लिए भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग को सहयोग जारी रखने की बात कही।

सिनाटी ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नरेश कुमार यादव ने कहा कि प्रमाणन से लंबी दूरी के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और आरामदायक यात्री वाहन तैयार करने के कंपनी के प्रयासों को बल मिलेगा।

क्या लंबी स्लीपर बसें यात्रा का अनुभव बदल सकती हैं

भारत में स्लीपर बसें उन मार्गों पर रेल और विमान का विकल्प बनती जा रही हैं, जहां रातभर की सीधी यात्रा की मांग अधिक है। 15 मीटर लंबी बस ऑपरेटर को अधिक बर्थ या सीटें उपलब्ध कराने का अवसर देती है। यात्रियों को भी एक ही वाहन में सीट और स्लीपर के अलग विकल्प मिल सकते हैं।

अधिक लंबाई के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है। ऐसी बसों के संचालन के लिए पर्याप्त सड़क, सुरक्षित मोड़, उचित पार्किंग, प्रशिक्षित चालक और समय पर तकनीकी जांच जरूरी होगी। प्रमाणित मॉडल इस प्रक्रिया की पहली कड़ी है। सुरक्षित सेवा का फैसला बस के दैनिक संचालन और रखरखाव से होगा।

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Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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26-08-2026