नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो सावधान भी रहिएगा। अचानक किसी कंपनी के नाम से फोन आ जाए तो पहली प्रतिक्रिया उम्मीद की होती है। लेकिन यही उम्मीद ठगों का हथियार बन जाए तो नौकरी का इंतजार करने वाला व्यक्ति ठगी का शिकार हो सकता है। दिल्ली के रंजीत नगर में पुलिस ने ऐसे ही दो फर्जी नौकरी प्लेसमेंट कॉल सेंटर पकड़े हैं, जहां नौकरी तलाशने वालों को फोन करके आकर्षक रोजगार का झांसा दिया जाता था।
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दिल्ली की सेंट्र्ल जिला पुलिस के डीसीपी रोहित राजवीर सिंह के मुताबिक, शादीपुर मेट्रो स्टेशन के पास एक ही इमारत में चल रहे दो कथित फर्जी प्लेसमेंट कॉल सेंटर पर अलग-अलग कार्रवाई की गई। कुल 11 लोगों को पकड़ा गया। इनमें पहले केंद्र से चार महिलाओं और दो पुरुषों समेत छह लोग और दूसरे केंद्र से पांच पुरुष शामिल हैं।
ऑनलाइन नौकरी तलाशने वालों का डेटा बन रहा था निशाना
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास नौकरी तलाशने वाले लोगों का व्यक्तिगत और संपर्क संबंधी डेटा था। इसी जानकारी के आधार पर संभावित उम्मीदवारों को फोन किए जाते थे। फोन करने वाले खुद को भर्ती करने वाली कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर पेश करते थे। उम्मीदवार को नौकरी का आकर्षक प्रस्ताव दिया जाता था और उसके बाद अलग-अलग बहानों से पंजीकरण या अन्य प्रक्रिया के नाम पर पैसे मांगे जाते थे।
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पुलिस के मुताबिक, अलग-अलग मामलों में 3,500 रुपये, 1,400 रुपये और 1,200 रुपये तक की फीस मांगी जाती थी।
यही इस जॉब स्कैम का सबसे अहम हिस्सा था। पैसे मिलने के बाद भी कुछ दिनों तक उम्मीदवार से बातचीत जारी रखी जाती थी, ताकि उसे लगे कि नौकरी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसके बाद कथित तौर पर संपर्क बंद कर दिया जाता था।
एक ही इमारत में चल रहे थे दो कॉल सेंटर
पुलिस को 3 अक्टूबर को शादीपुर मेट्रो स्टेशन के पास एक संदिग्ध फर्जी नौकरी प्लेसमेंट सेंटर की सूचना मिली थी। तकनीकी और मैदानी जांच के बाद पुलिस टीम ने वहां छापा मारा। पहले केंद्र से छह लोगों को पकड़ा गया। जांच के दौरान कंप्यूटर सिस्टम और नौकरी तलाशने वालों से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल माध्यम मिले।
इसके बाद उसी इमारत में चल रहे दूसरे संदिग्ध कॉल सेंटर पर भी कार्रवाई की गई। वहां पांच लोग कॉलिंग क्यूबिकल में काम करते मिले। पुलिस के अनुसार, दूसरे केंद्र में मौजूद लोग अपने भर्ती कारोबार को वैध साबित करने के लिए कॉरपोरेट अधिकृत पत्र, प्लेसमेंट समझौते या वास्तविक रूप से नौकरी दिलाए गए उम्मीदवारों का रिकॉर्ड नहीं दिखा सके।
13 कंप्यूटर और 5 मोबाइल फोन बरामद
दोनों जगहों से पुलिस ने कुल 13 कंप्यूटर सिस्टम और 5 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा कॉलिंग सॉफ्टवेयर, नौकरी तलाशने वालों का डेटा, बातचीत से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल तथा वित्तीय साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, दूसरे कॉल सेंटर में इंटरनेट आधारित एक्सलाइट वीओआईपी कॉलिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था।
नौकरी तलाशने वालों को किन बातों से सावधान रहना चाहिए?
इस मामले का सबसे बड़ा सबक यह है कि नौकरी का प्रस्ताव मिलने के बाद तुरंत पैसे देना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर तब, जब फोन करने वाला व्यक्ति पंजीकरण, दस्तावेज सत्यापन, प्रक्रिया या नियुक्ति के नाम पर पहले ही भुगतान करने को कहे।
किसी भी नौकरी के प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और उपलब्ध संपर्क माध्यम से जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। अनजान व्यक्ति को व्यक्तिगत दस्तावेज और बैंक संबंधी जानकारी देने से भी बचना चाहिए।
जॉब स्कैम में सबसे पहले नौकरी का लालच दिया जाता है और उसके बाद भरोसे के नाम पर पैसा मांगा जाता है। इसलिए नौकरी पाने की जल्दी में सत्यापन को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।













