समुद्री रास्ते से ड्रग तस्करी पर बड़ा वार, 6 दोषियों को कैसे मिली 10 साल की सजा

समुद्री रास्ते से चल रही ड्रग तस्करी पर बड़ी कार्रवाई में 6 दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई गई। जानिए जांच से लेकर कोर्ट के फैसले तक की पूरी कहानी।
ड्रग तस्करी में इनको मिली सजा

ड्रग तस्करी का यह मामला चार साल पहले सामने आया था। इस मामले में अब 6 लोगों को दस साल की सजा मिली है। समुद्री रास्ते से चल रही ड्रग तस्करी का यह मामला 21 नवंबर 2022 तब सामने आया, जब भारतीय तटरक्षक बल ने तमिलनाडु के मंडपम के पास समुद्र में एक मछली पकड़ने वाली नाव को रोका।

जैसे ही टीम ने नाव को रोका, उसमें सवार लोगों ने घबराकर कई बोरे समुद्र में फेंक दिए। यह साफ संकेत था कि नाव में कुछ अवैध सामान मौजूद था। बाद में इन बोरों को पानी से निकाल लिया गया और जांच आगे बढ़ी।

बरामदगी ने खोली ड्रग तस्करी नेटवर्क की परतें

उपरोक्त कार्रवाई के दौरान तलाशी और बरामदगी के बाद जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे नेटवर्क का को उजागर कर दिया। बरामद सामग्री में बड़ी मात्रा में गांजा और हशीश ऑयल शामिल था। इसके साथ ही GPS डिवाइस और मोबाइल फोन भी मिले, जिनसे यह संकेत मिला कि पूरा ऑपरेशन तकनीकी सहायता से संचालित किया जा रहा था।

कुल मिलाकर सैकड़ों किलो ड्रग्स बरामद हुई, जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी गई। इसके अलावा नकदी और नाव भी जब्त की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई छोटा मामला नहीं बल्कि एक संगठित तस्करी नेटवर्क था।

शुरुआत में नाव पर मौजूद चार लोगों को हिरासत में लिया गया, लेकिन जांच यहीं तक सीमित नहीं रही। मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच ने पूरे नेटवर्क को उजागर किया।

जांच में पता चला कि नाव को जानबूझकर तस्करी के लिए उपलब्ध कराया गया था और इसके पीछे एक मुख्य आरोपी था, जिसने पूरे ऑपरेशन की योजना बनाई थी। यह भी सामने आया कि समुद्री रास्ते से ड्रग्स को दूसरे देश तक पहुंचाने की तैयारी थी।

डिजिटल साक्ष्यों ने यह साबित करने में अहम भूमिका निभाई कि सभी आरोपी आपस में जुड़े हुए थे और एक तय योजना के तहत काम कर रहे थे।

कोर्ट में कैसे साबित हुआ मामला

इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई स्तरों पर सबूत पेश किए। गवाहों के बयान, जब्त सामग्री और डिजिटल रिकॉर्ड ने पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट किया।

अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। यही कारण रहा कि सभी छह आरोपियों को दोषी ठहराया गया। इस फैसले ने यह भी दिखाया कि ड्रग तस्करी जैसे मामलों में तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य कितने अहम होते हैं।

NDPS Act, 1985 के तहत ड्रग तस्करी को गंभीर अपराध माना जाता है। जब बरामद मात्रा अधिक होती है और मामला संगठित नेटवर्क से जुड़ा हो, तो सजा भी सख्त होती है। इसीलिए इस मामले में अदालत ने प्रत्येक आरोपी को 10 साल की कठोर कारावास और जुर्माना सुनाया। यह सजा इस बात को ध्यान में रखकर दी गई कि मामला अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़ा था और इसमें कई लोग शामिल थे।

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