कल्पना कीजिए, आपके मोबाइल पर फोन आता है। सामने वाला कहता है कि वह दूरसंचार विभाग से बोल रहा है। वह आपका नाम और दूसरी जानकारी बताकर दावा करता है कि आपके आधार और सिम का इस्तेमाल करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुआ है।
इसके बाद कॉल कथित पुलिस अधिकारी के पास पहुंचती है। WhatsApp वीडियो कॉल पर वर्दी दिखाई देती है। सुप्रीम कोर्ट के नाम वाला नोटिस सामने आता है। कहा जाता है कि फोन काटा तो गिरफ्तारी होगी और परिवार को बताया तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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यहीं से शुरू होता है Digital Arrest Scam का असली खेल।
मुंबई में 68 साल के एक सेवानिवृत्त व्यवसायी के साथ जो हुआ, वह बताता है कि इस ठगी में अपराधी बैंक खाते से पहले इंसान के डर पर कब्जा करते हैं। पीड़ित पर इतना दबाव बनाया गया कि उसने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर अलग-अलग खातों में कुल ₹1.12 करोड़ ट्रांसफर कर दिए।
इस मामले में मुंबई साइबर पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें IIT Delhi से पढ़ा एक वेब डेवलपर और निजी बैंक का ऑपरेशंस मैनेजर भी शामिल है। आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
Digital Arrest Scam कैसे शुरू होता है?
इस तरह की ठगी में पहला फोन ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।
मुंबई मामले में पीड़ित दहिसर का 68 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यवसायी है। पुलिस के मुताबिक 30 जुलाई से 12 अगस्त 2026 के बीच उसे निशाना बनाया गया।
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फोन करने वाले ने खुद को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया। दावा किया गया कि पीड़ित के आधार और सिम से जुड़ी जानकारी एक आपराधिक मामले में मिली है। इसके बाद उसे कथित पुलिस अधिकारी से जोड़ा गया।
उसे बताया गया कि मामला ₹238 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। WhatsApp वीडियो कॉल पर पुलिस जैसी वर्दी और सरकारी दिखने वाले दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। फर्जी दस्तावेज में सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ भी था।
असली चाल: पीड़ित को परिवार से अलग कर दो
Digital Arrest Scam में यह सबसे बड़ा खतरे का संकेत है। ठग नहीं चाहते कि पीड़ित किसी दूसरे व्यक्ति से बात करे। अगर परिवार का कोई सदस्य, दोस्त या पुलिस अधिकारी बीच में आ गया तो डर का बनाया हुआ पूरा माहौल टूट सकता है। मुंबई के इस मामले में भी पीड़ित को धमकी दी गई कि उसने परिवार को जानकारी दी तो परिवार के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
पुलिस के अनुसार उससे हर दो घंटे में अपनी लोकेशन बताने के लिए भी कहा गया। यह दबाव करीब दो सप्ताह तक चला।
यही वह बात है जिसे हर मोबाइल उपयोगकर्ता को याद रखना चाहिए।
अगर फोन करने वाला आपको किसी से बात करने से रोक रहा है, वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर कर रहा है या परिवार को बताने पर गिरफ्तारी की धमकी दे रहा है, तो कॉल को संदिग्ध मानें।
फिर आई FD तोड़ने की बारी
डर पैदा करने के बाद अगला निशाना पैसा था। पुलिस के मुताबिक पीड़ित पर अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने का दबाव बनाया गया। उसने कुल ₹1.12 करोड़ अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। मामला तब सामने आया जब पीड़ित की बेटी को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद परिवार ने साइबर पुलिस से संपर्क किया।
यह घटना एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है। कोई व्यक्ति अपनी वर्षों की बचत सिर्फ एक फोन कॉल पर क्यों भेज देगा? जवाब उस फोन कॉल में नहीं, बल्कि उसके बाद लगातार बनाए गए डर में छिपा है। पहले गंभीर अपराध का आरोप। फिर पुलिस अधिकारी का रूप। उसके बाद फर्जी सरकारी दस्तावेज। फिर परिवार की गिरफ्तारी का डर और लगातार निगरानी।
इन सबको जोड़कर पीड़ित को यह महसूस कराया जाता है कि उसके पास ठग के निर्देश मानने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
Digital Arrest Scam में ये 7 संकेत दिखें तो कॉल काट दें
| फोन पर क्या हो रहा है | खतरे का संकेत |
|---|---|
| आधार या SIM के अपराध में इस्तेमाल की बात | डर पैदा करने की शुरुआत |
| कॉल कथित पुलिस/CBI अधिकारी को ट्रांसफर | भरोसा बनाने की कोशिश |
| WhatsApp पर पुलिस वर्दी दिखाई जाए | वीडियो को पहचान का सबूत न मानें |
| कोर्ट या गिरफ्तारी का नोटिस भेजा जाए | स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें |
| परिवार से बात करने से रोका जाए | बड़ा Red Flag |
| लगातार Location मांगी जाए | मानसिक दबाव बनाने की कोशिश |
| पैसे दूसरे खाते में भेजने को कहा जाए | तुरंत कॉल बंद करें |
₹1.12 करोड़ आखिर गया कहां?
मुंबई साइबर पुलिस की जांच में इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा सामने आया।
पुलिस ने पैसे के रास्ते की जांच की तो एक हिस्सा गोल्ड ट्रेडिंग फर्म के बैंक खाते तक पहुंचा। जांच में कथित म्यूल बैंक खातों, सिम कार्ड और OTP से जुड़ा नेटवर्क सामने आया।
पुलिस के अनुसार एक आरोपी म्यूल खातों की व्यवस्था से जुड़ा था। गोल्ड ट्रेडिंग फर्म के एक निदेशक के नाम पर दर्ज सिम को OTP हासिल करने की व्यवस्था में इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। जांच में एक आरोपी के संबंधित डिवाइस के साथ उत्तर प्रदेश के बिजनौर जाने और वहां रकम निकालने की बात भी सामने आई है।
इससे Digital Arrest Scam का एक और पहलू समझ आता है।
जिस व्यक्ति की आवाज आपको फोन पर सुनाई दे रही है, जरूरी नहीं कि वही आपके पैसे निकाल रहा हो। कथित नेटवर्क में फोन करने वाले, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, सिम संभालने वाले और पैसा निकालने वाले अलग-अलग लोग हो सकते हैं।
IIT Delhi से पढ़ा वेब डेवलपर और बैंक मैनेजर भी गिरफ्तार
मुंबई साइबर पुलिस ने मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक इनमें गौरव महेश गोयल, जो IIT Delhi से स्नातक और वेब डेवलपर बताया गया है, तथा निजी बैंक में ऑपरेशंस मैनेजर शिखर मुकेश त्यागी भी शामिल हैं। इनके अलावा राजेश कुमार मोहनलाल जैन, मोहम्मद तारिक अनवर मोमिन, अजय कुमार कालीप्रसाद शर्मा और चिंतनकुमार सुरेशभाई देसाई को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने यह भी कहा है कि गोयल का नाम 2021 में बांद्रा पुलिस में दर्ज एक अन्य मामले में आया था। ये पुलिस के आरोप हैं और मामले में आगे की जांच तथा कानूनी प्रक्रिया जारी है।
जांच में 20 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 25 बैंक खातों से जुड़ी सामग्री, एटीएम कार्ड, पासबुक और आधार कार्ड जब्त किए गए हैं। जांच डीसीपी साइबर बजरंग बंसोडे की निगरानी में वरिष्ठ निरीक्षक प्रमोद कांबले और निरीक्षक सुनील लोखंडे की टीम कर रही है।
Digital Arrest Call आए तो पहले 60 सेकंड में क्या करें?
सबसे पहले पैसा ट्रांसफर न करें।
फोन करने वाला चाहे पुलिस की वर्दी में दिखाई दे, सरकारी लोगो दिखाए या आपके नाम से जुड़ी कुछ सही जानकारी बताए, इससे उसकी पहचान साबित नहीं होती।
कॉल बंद करें।
परिवार के किसी सदस्य को तुरंत बताएं। जिस पुलिस, सीबीआई, दूरसंचार विभाग या दूसरी एजेंसी का नाम लिया जा रहा है, उससे उसके आधिकारिक माध्यम से अलग से संपर्क करके पुष्टि करें।
OTP, PIN, CVV, बैंक पासवर्ड या स्क्रीन शेयरिंग की अनुमति न दें।
अगर पैसा ट्रांसफर हो चुका है तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें। National Cyber Crime Reporting Portal पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
एक वाक्य हमेशा याद रखें
कोई पुलिस या सरकारी एजेंसी आपको WhatsApp वीडियो कॉल पर “Digital Arrest” करके जांच के नाम पर पैसा किसी खाते में ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती।
मुंबई का ₹1.12 करोड़ वाला मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ठगी का सबसे खतरनाक हथियार कोई अत्याधुनिक तकनीक नहीं दिखती।
वह हथियार था डर।
पहले आधार और SIM का नाम लिया गया। फिर ₹238 करोड़ के मामले से जोड़ा गया। पुलिस और सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाया गया। परिवार की गिरफ्तारी की धमकी दी गई और आखिर में वर्षों की जमा पूंजी ट्रांसफर करा ली गई।
इसलिए अगली बार ऐसा फोन आए तो यह सोचने में समय न गंवाएं कि सामने वाला अधिकारी कितना असली लग रहा है।
कॉल काटिए, किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताइए और स्वतंत्र रूप से पुष्टि कीजिए। यही Digital Arrest Scam की सबसे पहली दीवार है।










