ड्रग तस्करी की शुरुआत अक्सर किसी छोटी बरामदगी या गिरफ्तारी से सामने आती है, लेकिन उसके पीछे कई शहरों और राज्यों में फैली सप्लाई की लंबी श्रृंखला हो सकती है। असम में एक कार से 46.11 ग्राम संदिग्ध हेरोइन मिलने के बाद शुरू हुई जांच इसका ताजा उदाहरण है।
इस मामले की जांच असम के चराइदेव जिले से दिल्ली के नरेला तक पहुंची। पुलिस के अनुसार, एक कार, मोबाइल फोन की चैट, इंटरनेट कॉल, नशीले असर वाली गोलियों का बिल और लाखों रुपये का Paytm लेनदेन जोड़ने पर संदिग्ध अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत मिले।
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जांच में प्रतिबंधित संगठन उल्फा(I) से जुड़े बताए जा रहे एक व्यक्ति का नाम सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि यह मामला नशीले पदार्थों की सप्लाई तक सीमित था या इससे मिलने वाला पैसा गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाना था।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और असम की चराइदेव जिला पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में 27 वर्षीय अपूर्व ठाकुर को नरेला से पकड़ा है। पुलिस ने उसे दिल्ली से असम तक नशीले असर वाली गोलियां पहुंचाने वाले नेटवर्क का कथित स्रोत बताया है। ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और अदालत में साबित होना बाकी हैं।
असम में कार से कैसे शुरू हुई जांच?
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के स्पेशल सीपी एचजीएस धालीवाल के मुताबिक मामला 17 जुलाई 2026 का है। असम के मथुरापुर थाना पुलिस को एक कार में नशीला पदार्थ ले जाए जाने की सूचना मिली थी। पुलिस ने धोड़र अली रोड के माजगांव इलाके में AS-06-Q-5*** नंबर की मारुति सुजुकी स्विफ्ट को रोक लिया।
कार की तलाशी लेने पर उसके एक छिपे हिस्से में साबुन के डिब्बे मिले। पुलिस के मुताबिक, इन डिब्बों में 46.11 ग्राम संदिग्ध हेरोइन छिपाकर रखी गई थी।
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कार में मौजूद डिब्रूगढ़ निवासी मनुज गोगोई को गिरफ्तार कर लिया गया। मथुरापुर थाने में मुकदमा संख्या 24/2026 दर्ज हुआ। इसमें एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(बी), 23, 27ए और 29 लगाई गईं।
बाद में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी UAPA की धारा 13, 39 और 40 को भी मामले में शामिल किया गया।
एक गिरफ्तारी के बाद सामने आए कई नाम
पूछताछ में मनुज गोगोई ने जॉयपुर के टिपम निवासी भास्कर गोगोई का नाम बताया। पुलिस ने भास्कर को गिरफ्तार करने के बाद उसके मोबाइल फोन की जांच की।
पुलिस का दावा है कि फोन से देवाशीष दहुतिया का कथित संपर्क सामने आया। वह असम के काकोपाथर का रहने वाला बताया गया है। इसी जांच में इंटरनेट आधारित नंबर के जरिए ULFA(I) से जुड़े बताए जा रहे व्यक्ति से बातचीत के संकेत भी मिले।
इसके बाद देवाशीष दहुतिया और बिटु हजारिका को पकड़ा गया। जांच में कथित ULFA(I) सदस्य की पहचान मृदुपवन दहुतिया के रूप में की गई। पुलिस का दावा है कि वह वर्ष 2011 में ULFA(I) में शामिल हुआ था।
मोबाइल और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को दिल्ली से असम भेजी जा रही नशीले असर वाली गोलियों की संदिग्ध सप्लाई का पता चला।
एक गिरफ्तारी के बाद सामने आए कई नाम
पूछताछ में मनुज गोगोई ने जॉयपुर के टिपम निवासी भास्कर गोगोई का नाम बताया। पुलिस ने भास्कर को गिरफ्तार करने के बाद उसके मोबाइल फोन की जांच की।
पुलिस का दावा है कि फोन से देवाशीष दहुतिया का कथित संपर्क सामने आया। वह असम के काकोपाथर का रहने वाला बताया गया है। इसी जांच में इंटरनेट आधारित नंबर के जरिए ULFA(I) से जुड़े बताए जा रहे व्यक्ति से बातचीत के संकेत भी मिले।
इसके बाद देवाशीष दहुतिया और बिटु हजारिका को पकड़ा गया। जांच में कथित ULFA(I) सदस्य की पहचान मृदुपवन दहुतिया के रूप में की गई। पुलिस का दावा है कि वह वर्ष 2011 में ULFA(I) में शामिल हुआ था।
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मोबाइल और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को दिल्ली से असम भेजी जा रही नशीले असर वाली गोलियों की संदिग्ध सप्लाई का पता चला।
दिल्ली से भेजी गई गोलियों की खेप कहां गई?
असम पुलिस की जांच में अपूर्व ठाकुर का नाम दिल्ली स्थित कथित सप्लायर के रूप में सामने आया। पुलिस को ऐसे डिजिटल सुराग मिलने का दावा किया गया है, जिनसे पता चलता है कि नशीले असर वाली गोलियों की एक खेप दिल्ली से असम के लिए रवाना की गई थी।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भास्कर गोगोई की गिरफ्तारी की जानकारी कथित रूप से मृदुपवन दहुतिया तक पहुंच गई थी। इसके बाद गोलियों की खेप को आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
पुलिस को संदेह है कि गिरफ्तारी और जांच की जानकारी मिलने के बाद ऐसा पकड़े जाने से बचने के लिए किया गया। यह खेप कहां रोकी गई, इसमें कितनी गोलियां थीं और इन्हें किसके पास पहुंचना था, इसका पता लगाया जा रहा है।
नरेला से कैसे पकड़ा गया संदिग्ध सप्लायर?
असम पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच से अपूर्व ठाकुर को तलाशने में सहायता मांगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा ने पश्चिमी रेंज-दो की टीम बनाई। एसीपी राजपाल डबास की निगरानी में निरीक्षक अक्षय गहलौत ने कार्रवाई का नेतृत्व किया।
टीम में एसआई मनोज कुमार मीणा, एएसआई जितेंद्र, हेड कांस्टेबल सुशील, मयंक त्यागी, नवीन, राजू राम, भंवर सिंह, कांस्टेबल संदीप और महिला कांस्टेबल किरण शामिल थे।
तकनीकी जानकारी और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई सूचनाओं की मदद से अपूर्व ठाकुर को दिल्ली के नरेला इलाके में खोज लिया गया।
इसके बाद उसे डीएसपी आर्यन नाथ के नेतृत्व वाली चराइदेव जिला पुलिस की टीम को सौंपा गया। असम पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे गिरफ्तार किया और नई दिल्ली की अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे असम ले जाने के लिए चार दिन की ट्रांजिट रिमांड दी।
मोबाइल में मिला बिल और व्हाट्सऐप चैट
पुलिस के अनुसार, अपूर्व ठाकुर के मोबाइल फोन में कई ऐसे डिजिटल सुराग मिले हैं जिनकी जांच की जा रही है। इनमें वर्ष 2025 से मृदुपवन दहुतिया के साथ कथित व्हाट्सऐप बातचीत शामिल है।
फोन में नशीले असर वाली गोलियों की एक खेप का बिल मिलने का भी दावा किया गया है। जांच एजेंसियां इस बिल की मदद से गोलियों के स्रोत, विक्रेता, मात्रा और अंतिम खरीदार का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।
पुलिस के अनुसार, अपूर्व ठाकुर और गिरफ्तार भास्कर गोगोई की पत्नी बॉबी गोगोई के बीच Paytm से लाखों रुपये का लेनदेन भी मिला है। यह रकम किस काम के लिए भेजी गई थी और इसका संदिग्ध दवा सप्लाई से कोई संबंध था या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
मेडिकल प्रतिनिधि से दवा कारोबारी बनने का सफर
अपूर्व ठाकुर मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रसूलपुर गांव का निवासी है और नरेला में रह रहा था। पुलिस के अनुसार, वह दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद वर्ष 2016 में दिल्ली आया था।
उसने 2022 में मेडिकल प्रतिनिधि के रूप में काम शुरू किया। इस दौरान उसे दवाओं और उनके कारोबार की जानकारी मिली। करीब एक वर्ष बाद उसने कमीशन पर दवाओं का स्वतंत्र कारोबार करना शुरू कर दिया।
पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि दवा कारोबार से जुड़े उसके संपर्कों का कथित रूप से नशीले असर वाली गोलियों की सप्लाई में किस तरह इस्तेमाल किया गया।











