जाति प्रमाण पत्र रैकेट चलाता था गैंग, पुलिस ने पर्दाफाश किया तो सामने आए ये लोग

जाति प्रमाण पत्र

जाति प्रमाण पत्र रैकेट चलाने वाले एक खास गैंग का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस खास गैंग के 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह लोग सामान्य वर्ग के लोगों को रिजर्व कैटेगरी के सर्टिफिकेट मुहैया कराते थे। गिरफ्तार लोगों में दिल्ली कैंट का तहसीलदार और दिल्ली सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर काम करने वाला शख्सभी शामिल है। इनके कब्जे से सैकड़ो फर्जी प्रमाण पत्र बरामद किए गए हैं।

जाति प्रमाण पत्र की कीमत मात्र 3500

क्राइम ब्रांच के डीसीपी राकेश पावरिया के मुताबिक 3500 में मिलने वाले जाति प्रमाण पत्र रैकेट का खुलासा सेंट्रल रेंज के इंस्पेक्टर सुनील कलखंडे की सूचना पर हुआ। इंस्पेक्टर सुनील ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने की सूचना की जांच के लिए फर्जी ग्राहक गैंग के पास भेजा। यह ग्राहक सामान्य वर्ग का था। उससे 3500 रु लेकर ओबीसी वर्ग का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। इसके बाद दूसरे फर्जी ग्राहक को भी 3000 में फर्जी ओबीसी सर्टिफिकेट दे दिया गया।

यह दोनों सर्टिफिकेट दिल्ली सरकार राजस्व विभाग के वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिए गए थे। इस रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए इंस्पेक्टर सुनील कलखंडे के नेतृत्व में एसआई संजय राणा, सुभाष चंद, बीरपाल, हेडकांस्टेबल जय सिंह, समन्दर, प्रवीण, रौशन, विजय सिंह और महिला कांस्टेबल शबाना की टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने संगम विहार से सबसे पहले सौरभ गुप्ता नाम के शख्स को गिरफ्तार किया।

उसके मोबाइल फोन से चैट और कई तरह के कागजात बरामद किए गए। पूछताछ में उसने फर्जी ग्राहकों को सर्टिफिकेट जारी करने की बात मान ली। जांच के दौरान उसके साथी और दिल्ली कैंट तहसीलदार आफिस में काम करने वाले चेतन यादव को भी गिरफ्तार किया गया। इनकी निशानदेही पर तहसीलदार के ड्राइवर वारिस अली को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के बाद दिल्ली कैंट के तहसीलदार नरेन्द्र पाल सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। जांच में पता लगा कि यह चारो मिलकर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का रैकेट संचालित करते थे।

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