छत्तीसगढ़ में 50 परिवारों की सनातन धर्म में वापसी

शिवरीनारायण में आयोजित “शबरी की निष्ठा” कथा के दौरान 50 परिवारों ने सनातन मूल्यों से पुनः जुड़कर सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
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छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण में आयोजित एक धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। “राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुआ धाम” में आयोजित “शबरी की निष्ठा” कथा के दौरान 50 परिवारों ने सनातन परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से पुनः जुड़ने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में परम पूज्य जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य का सानिध्य रहा, जबकि बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और समाजसेवी मौजूद रहे।

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आयोजन को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी उत्साह देखने को मिला। पूरे कार्यक्रम के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, मंत्रोच्चारण और पारंपरिक विधि-विधान के माध्यम से परिवारों का स्वागत किया गया। आयोजकों ने इसे सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

वीडियो देखेंः

शबरी माता की भूमि पर हुआ धर्म जागरण कार्यक्रम

शिवरीनारायण को माता शबरी की पावन भूमि के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि यहीं माता शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेमपूर्वक बेर अर्पित किए थे। यही कारण है कि इस स्थान का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष माना जाता है।

इसी पावन भूमि पर आयोजित “शबरी की निष्ठा” कथा के दौरान सनातन मूल्यों, भारतीय परंपराओं और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे भावनात्मक और प्रेरणादायक अनुभव बताया।

50 परिवारों का पारंपरिक विधि से स्वागत

कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय घरवापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने स्वयं सभी परिवारों का चरण पखारकर स्वागत किया। यह दृश्य कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण माना गया।

मंत्रोच्चारण और धार्मिक विधियों के बीच परिवारों ने सनातन परंपराओं से पुनः जुड़ने का संकल्प लिया। आयोजन स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने “जय श्री राम” के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया।

कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों की रही भागीदारी

इस कार्यक्रम का आयोजन राम मिलेंगे आश्रम आयोजन समिति, धर्म जागरण समन्वय विभाग, दिलीप सिंह जूदेव फाउंडेशन और सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. अशोक चतुर्वेदी, सर्वेश्वर दास, राजकुमार चंद्रा और श्रीमती अंजू ग़बेल सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और संत उपस्थित रहे।

सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता पर जोर

आयोजकों के अनुसार इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक मूल्यों से जोड़ना है। उनका कहना है कि समाज में सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम के अंत में पूरे आश्रम परिसर में “जय श्री राम” के उद्घोष गूंजते रहे। बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरण का संदेश देने वाला आयोजन बताया।

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