अरुणाचल प्रदेश में हाई-टेक थर्मल ड्रोन से वन्यजीव संरक्षण को नई ताकत

अरुणाचल प्रदेश में वन विभाग ने हाई-टेक थर्मल ड्रोन के जरिए वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
अरुणाचल प्रदेश में वन विभाग द्वारा उपयोग किए जा रहे हाई-टेक थर्मल ड्रोन

अरुणाचल प्रदेश में न्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एक अहम पहल शुरू की गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए हाई-टेक थर्मल ड्रोन के इस्तेमाल की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

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हाल के वर्षों में बाघों और हाथियों के हमलों में कई लोगों की जान गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इटानगर में शुरू हुआ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

अरुणाचल की राजधानी ईटानगर में PCCF कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में इस एक सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन पर्यावरण मंत्री वांगकी लोवांग ने किया।

इस अवसर पर मंत्री के सलाहकार वांगलिन लोवांगडोंग, PCCF एवं HoFF प्रभारी और CAMPA के CEO एन. तम, अतिरिक्त PCCF एवं नोडल अधिकारी (FCA) देबेंद्र दलई और RNR Unmanned Aerial Systems के निदेशक एवं CEO राजीव पेम्मासानी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और फील्ड स्टाफ मौजूद रहे।

थर्मल ड्रोन से कैसे मिलेगा फायदा

यह तकनीक वन्यजीव संरक्षण में कई स्तर पर उपयोगी साबित होगी। वन क्षेत्रों की निगरानी पहले की तुलना में अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी। रात के समय भी जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।

गैरकानूनी गतिविधियों जैसे शिकार और अतिक्रमण की पहचान आसान होगी। साथ ही जंगल में आग लगने जैसी घटनाओं का शुरुआती पता लगाया जा सकेगा।

थर्मल ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम की तस्वीर

मानव-वन्यजीव संघर्ष में तकनीक की भूमिका

राज्य में कई क्षेत्रों में हाथियों और बाघों से जुड़े गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। देओमाली और सुनपुरा में हाल ही में दो खतरनाक हाथियों को पकड़ने और नियंत्रित करने में थर्मल ड्रोन की अहम भूमिका रही।

इन अभियानों में ड्रोन तकनीक के जरिए ट्रैकिंग और निगरानी आसान हुई, जिससे समय रहते कार्रवाई संभव हो सकी।

मंत्री ने बांटे हाई-टेक ड्रोन

कार्यक्रम के दौरान मंत्री वांगकी लोवांग ने पहले चरण में पांच हाई-टेक थर्मल ड्रोन विभिन्न वन क्षेत्रों को सौंपे। इनमें नामदाफा नेशनल पार्क, देओमाली डिवीजन, मेहाओ वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी (रोइंग), नमपोंग डिवीजन (जयरामपुर) और ईटानगर बायोलॉजिकल पार्क शामिल हैं।

ये सभी क्षेत्र मानव-वन्यजीव संघर्ष से अधिक प्रभावित रहे हैं।

आधुनिक उपकरणों से मजबूत हो रहा वन विभाग

वन विभाग अब केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं है। हाई-टेक ट्रैंक्विलाइजिंग गन, टाइगर और लेपर्ड पकड़ने के लिए आधुनिक पिंजरे, रेस्क्यू वाहन और गश्ती वाहन जैसे संसाधनों को भी शामिल किया गया है।

इससे फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यक्षमता दोनों में सुधार होगा।

अधिकारियों ने बताई तकनीक की उपयोगिता

मंत्री वांगकी लोवांग ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करेगा और भविष्य की रणनीतियों को बेहतर बनाएगा।वांगलिन लोवांगडोंग ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ड्रोन के उपयोग से जोखिम कम होगा और कार्य में तेजी आएगी।

वहीं एन. तम ने कहा कि ड्रोन की मदद से बड़े वन क्षेत्रों की निगरानी सटीक तरीके से की जा सकेगी। देबेंद्र दलई ने इसके उपयोग को जैव विविधता संरक्षण, आवास मैपिंग और अवैध गतिविधियों की पहचान के लिए उपयोगी बताया।

राजीव पेम्मासानी और उनकी टीम को सफल ऑपरेशन में योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य और भविष्य की दिशा

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य वन अधिकारियों को थर्मल ड्रोन संचालन में दक्ष बनाना है ताकि वे वन्यजीव निगरानी, एंटी-पोचिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहतर तरीके से अंजाम दे सकें।

यह पहल अरुणाचल प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में तकनीकी मजबूती की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इस तरह की तकनीक अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रभावी मॉडल बन सकती है।

(अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

थर्मल ड्रोन क्या करता है?

यह गर्मी के आधार पर जानवरों और अन्य गतिविधियों का पता लगाता है, जिससे अंधेरे में भी निगरानी संभव होती है।

इससे क्या फायदा होगा?

वन्यजीवों की ट्रैकिंग आसान होगी, शिकार पर रोक लगेगी और अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ेगी।

किन क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल होगा?

मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले क्षेत्रों में इसका उपयोग प्राथमिकता से किया जाएगा।

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Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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16-08-2026