साइबर ठगी के इस नए तरीके ने पुलिस को भी डाल दिया सकते में, हो जाइए आप भी सावधान !

दिल्ली पुलिस की जांच में साइबर ठगी का नया तरीका सामने आया है। बिजली कनेक्शन पर नाम बदलने के नाम पर भेजी गई APK फाइल से ₹1.99 लाख निकाले गए। रकम CSC Wallet तक पहुंची और संबंधित खातों में ₹2.50 करोड़ से अधिक के लेनदेन मिले।
CSC Wallet साइबर ठगी मामले की जानकारी देतीं डीसीपी निहारिका भट्ट, गिरफ्तार आरोपी और बरामद SIM कार्ड

साइबर ठगी के एकदम नए तरीके से पुलिस भी सकते में है। दिल्ली पुलिस ने एक मामले की जांच के दौरान साइबर ठगी के बिल्कुल नए तरीके का खुलासा किया है। जांच में पता चला है कि साइबर ठगों ने कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) को अपना टूल बना लिया है। इसके माध्यम से उन्होंने अब तक करोड़ों रुपये पर हाथ साफ कर लिया है।

उत्तरी दिल्ली पुलिस की डीसीपी निहारिका भट्ट के मुताबिक इस मामले की शुरुआत बिजली कनेक्शन पर नाम बदलवाने के लिए मांगे गए महज 13 रुपये से हुई। 72 वर्षीय व्यक्ति को WhatsApp पर एक APK फाइल भेजी गई। इसे इंस्टॉल करने के बाद उनके बैंक खाते से ₹1,99,003.54 निकल गए।

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जांच आगे बढ़ी तो पुलिस शाहजहांपुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी तक पहुंची। तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। बरामद खातों में ₹2.50 करोड़ से अधिक के लेनदेन मिले हैं। अलग-अलग राज्यों की पांच साइबर फ्रॉड शिकायतें भी इन खातों से जुड़ चुकी हैं।

बिजली कनेक्शन पर नाम बदलवाना था, खाते से निकल गए दो लाख रुपये

दिल्ली पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने Tata Power से सोलर बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। इसके साथ वह मौजूदा बिजली कनेक्शन और मीटर पर दर्ज नाम बदलवाने की प्रक्रिया भी पूरी कर रहे थे।

18 जुलाई 2026 को उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को बिजली कनेक्शन पर नाम बदलने की प्रक्रिया से जुड़ा कर्मचारी बताया। उसने दावा किया कि आवेदन पूरा करने के लिए 13 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।

इसके बाद पीड़ित को WhatsApp पर “TATA POWER NAME CHANGE.apk” नाम की फाइल भेजी गई। कॉल करने वाले की बात पर भरोसा करके उन्होंने फाइल इंस्टॉल कर ली और बताए गए निर्देशों का पालन किया। कुछ समय बाद उनके पंजाब नेशनल बैंक खाते से ₹1,99,003.54 निकल गए।

देखें वीडियोः

मामले में साइबर पुलिस स्टेशन नॉर्थ में ई-एफआईआर संख्या 00195/26 दर्ज की गई।

Tata Power की आधिकारिक वेबसाइट पर नाम परिवर्तन के लिए अलग ऑनलाइन आवेदन सुविधा उपलब्ध है। इसलिए फोन या WhatsApp से भेजी गई APK फाइल को आधिकारिक प्रक्रिया मानना भारी नुकसान करा सकता है।

CSC Wallet तक कैसे पहुंची ठगी की रकम

जांच में सामने आया कि पीड़ित के खाते से निकली रकम पहले PayU Payment Gateway के माध्यम से एक CSC Merchant के पास पहुंची। इसके बाद रकम आशीष कुमार जनसेवा केंद्र के नाम पर दर्ज CSC Wallet में भेजी गई।

पुलिस सत्यापन में दावा किया गया कि आशीष कुमार के नाम पर CSC लाइसेंस था, लेकिन वह कोई जनसेवा केंद्र नहीं चला रहा था। पूछताछ में उसने कथित रूप से बताया कि CSC Wallet की आईडी और पासवर्ड अमित कुमार को दिए गए थे।

यही तथ्य इस मामले को सामान्य APK या बिजली बिल फ्रॉड से अलग बनाता है। पुलिस जांच के मुताबिक, जनता को सरकारी और दूसरी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने वाले CSC Wallet का कथित इस्तेमाल ठगी से आई रकम आगे भेजने के लिए किया गया।

ग्राहक के लिए जारी SIM कार्ड के दुरुपयोग का भी आरोप

पुलिस के मुताबिक अमित कुमार CSC Wallet, बैंक खातों और उनके पासवर्ड का इंतजाम करता था। जांच में यह आरोप भी सामने आया कि मोबाइल नंबर पोर्ट कराने आए ग्राहकों के लिए जारी SIM कार्ड अपने पास रख लिए जाते थे।

इन SIM कार्ड का इस्तेमाल CSC Wallet से जुड़े मोबाइल नंबर बदलने और संदिग्ध लेनदेन करने में किया जाता था। अमित कुमार के मोबाइल की जांच में संबंधित CSC Wallet के लेनदेन से तकनीकी संबंध मिलने का दावा किया गया है।

अमित ने कथित रूप से CSC Wallet का विवरण उमेश चंद को दिया था। इसके बदले उसे खाते में आने वाली रकम का पांच प्रतिशत कमीशन मिलना था।

उमेश चंद ने पूछताछ में राम दास नाम के एक व्यक्ति को CSC Wallet की जानकारी देने की बात बताई। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से WhatsApp चैट और लेनदेन से जुड़े डिजिटल प्रमाण मिले हैं। राम दास और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

तीन जिलों में 1,000 किलोमीटर तक चला अभियान

उत्तरी जिले की डीसीपी निहारिका भट्ट के समग्र पर्यवेक्षण में जांच के लिए विशेष टीम बनाई गई। टीम को अतिरिक्त डीसीपी प्रथम पुखराज कमल गुप्ता और अतिरिक्त डीसीपी द्वितीय राम दुलेश मीणा का मार्गदर्शन मिला।

एसीपी ऑपरेशंस विशेष धत्तरवाल और साइबर पुलिस स्टेशन नॉर्थ के एसएचओ इंस्पेक्टर रोहित गहलोत के नेतृत्व वाली टीम में एसआई अरविंद यादव, हेड कांस्टेबल हिमांशु और हेड कांस्टेबल रवि शामिल थे।

पुलिस टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, IMEI, IP लॉग, बैंक खातों और भुगतान माध्यमों की जांच की। करीब 100 संदिग्ध मोबाइल नंबरों और उनसे जुड़े IMEI पर तकनीकी निगरानी के बाद संदिग्धों की लोकेशन उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में मिली।

31 अगस्त 2026 को आशीष कुमार को शाहजहांपुर से पकड़ा गया। उससे मिली जानकारी के बाद अमित कुमार को हरदोई और उमेश चंद को लखीमपुर खीरी के मंडवा से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक टीम ने करीब 1,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 24 घंटे के अभियान में तीनों को पकड़ लिया।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी

आशीष कुमार की उम्र 24 वर्ष है और वह शाहजहांपुर के पट्टी बहादुरपुर गांव का रहने वाला है। उसने बीए तक पढ़ाई की है। अमित कुमार 23 वर्ष का है और लखीमपुर खीरी के लखनौरिया गांव का निवासी है। उसने बीए की पढ़ाई की और बीटीसी बीच में छोड़ दी।

उमेश चंद की उम्र 37 वर्ष है। वह लखीमपुर खीरी के मंडवा गांव का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार उसने बीकॉम और एमबीए किया है तथा सीटीईटी भी उत्तीर्ण किया है।

क्या-क्या बरामद हुआ

पुलिस ने आरोपियों से पांच मोबाइल फोन, 20 SIM कार्ड, नौ पासबुक, छह चेकबुक, 15 डेबिट और क्रेडिट कार्ड तथा एक बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन बरामद करने का दावा किया है।

बैंक खातों की जांच में ₹2.50 करोड़ से अधिक के लेनदेन मिले हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरी राशि इसी एक पीड़ित से ठगी गई। पुलिस इन लेनदेन की प्रकृति, लाभार्थियों और संभावित पीड़ितों की पहचान कर रही है।

APK फाइल से कैसे बचें

बिजली बिल, मीटर अपडेट, कनेक्शन काटने, नाम बदलने या छोटी फीस जमा करने के नाम पर भेजी गई APK फाइल इंस्टॉल न करें। किसी कंपनी का कर्मचारी बताने वाला व्यक्ति यदि WhatsApp पर ऐप भेजता है तो पहले कंपनी के आधिकारिक नंबर से पुष्टि करें।

फोन की सेटिंग में अनजान स्रोतों से ऐप इंस्टॉल करने की अनुमति बंद रखें। ठगी हो जाए तो बैंक को तुरंत सूचित करने के साथ 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट भी ऑनलाइन लेनदेन और मोबाइल ऐप से जुड़े अपराधों की जानकारी उपलब्ध कराती है।

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