डिजिटल अरेस्ट घोटाला: कैसे digital arrest scam targeting senior citizens बनता जा रहा है नया खतरा

“डिजिटल अरेस्ट” नाम की नई साइबर ठगी में ठग खुद को पुलिस या एजेंसी बताकर वरिष्ठ नागरिकों को मानसिक रूप से कैद कर लेते हैं और उनकी जीवनभर की बचत निकाल लेते हैं। यह रिपोर्ट इस खतरे की पूरी परतें खोलती है।
Digital arrest scam targeting senior citizens in India

Digital arrest scam targeting senior citizens भारत में तेजी से बढ़ता साइबर अपराध बन चुका है, जिसमें ठग वरिष्ठ नागरिकों को डर और नकली कानूनी कार्यवाही के ज़रिये मानसिक रूप से कैद कर लेते हैं…

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस फ्रॉड के सबसे बड़े शिकार वरिष्ठ नागरिक बन रहे हैं।

How digital arrest scam targeting senior citizens actually works

  • 2025 में साइबर फ्रॉड से ₹45.77 करोड़ की चपत — नागपुर में 60% पीड़ित वरिष्ठ नागरिक थे।
  • नागपुर: सतर्क बैंक मैनेजर ने एक बुज़ुर्ग महिला को जीवनभर की बचत गंवाने से बचाया।
  • लखनऊ (जनवरी 2026): सेवानिवृत्त अधिकारी से नकली साइबर सेल बनकर ₹90 लाख की ठगी।

📍 हाल के प्रमुख मामले

स्थानपीड़ित प्रोफ़ाइलराशितरीका
दिल्ली85 वर्षीय महिला₹1.34 करोड़महीनेभर का डिजिटल अरेस्ट
हैदराबादमध्यम आयु पुरुष₹7 करोड़नकली ड्रग केस
तमिलनाडुमहिला₹1.95 करोड़हवाला व म्यूल अकाउंट

क्यों वरिष्ठ नागरिक बनते हैं शिकार

  • कम डिजिटल साक्षरता
  • वर्दी और “सरकारी भाषा” पर सहज भरोसा
  • अकेलापन और सलाह देने वाले की कमी
  • जागरूकता अभियानों की सीमित पहुँच

मोडस ऑपरेंडी

  1. व्हाट्सऐप / वीडियो कॉल से संपर्क
  2. ड्रग केस, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे डर पैदा करने वाले आरोप
  3. “डिजिटल अरेस्ट” का आदेश
  4. दस्तावेज़ और बैंक डिटेल निकलवाना
  5. म्यूल अकाउंट्स / हवाला से पैसा बाहर भेजना

रणनीतिक सुरक्षा उपाय

1️⃣ बीट स्तर पुलिस भूमिका

  • वरिष्ठ नागरिकों से नियमित संपर्क
  • अपना नंबर साझा करना

2️⃣ बैंक स्टाफ की सतर्कता

  • बड़े ट्रांज़ैक्शन फ़्लैग करना
  • परिवार या पुलिस को अलर्ट करना
  • चेतावनी पोस्टर लगाना

3️⃣ स्थानीय जागरूकता

  • RWA, मंदिर, क्लबों में सत्र
  • रेडियो और लोकल अख़बार का उपयोग
  • द्विभाषी चेतावनी पोस्टर

4️⃣ डिजिटल साक्षरता

  • कॉल ब्लॉकिंग, ऐप परमिशन
  • केवल सरकारी सत्यापित ऐप का उपयोग
  • किसी भी “डराने वाली कॉल” पर तुरंत बात रोकना

निष्कर्ष

डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक हथियार है। जब तक डर काम करता रहेगा, यह घोटाला चलता रहेगा। इसका इलाज तकनीक से ज़्यादा विश्वास, संवाद और जागरूकता है — परिवार, बैंक और पुलिस तीनों की साझा जिम्मेदारी।

Picture of inspector raman kumar
inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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21-07-2026