ऑनलाइन निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा, डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी, पार्ट टाइम जॉब का लालच, शेयर ट्रेडिंग ऐप के नाम पर ठगी या मैट्रिमोनियल फ्रॉड। देखने में ये सभी अलग-अलग अपराध लगते हैं, लेकिन इनका संचालन अक्सर एक ही तरह के संगठित नेटवर्क के जरिए होता है। यही वजह है कि आज Cyber Fraud को केवल तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध माना जा रहा है।
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ऐसे मामलों में ठगी की रकम सीधे अपराधियों तक नहीं पहुंचती। इसके लिए पहले से तैयार बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें म्यूल बैंक अकाउंट कहा जाता है। इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेनदेन कर साइबर ठगी के पैसे को छिपाने की कोशिश की जाती है।
इसी नेटवर्क को तोड़ने के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111 महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
Cyber Fraud के पीछे कैसे काम करता है संगठित नेटवर्क?
आज अधिकांश साइबर ठगी किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं की जाती। इसमें कॉल सेंटर संचालक, फर्जी कंपनियां बनाने वाले, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, तकनीकी सहायता देने वाले और रकम को अलग-अलग खातों में पहुंचाने वाले कई लोग शामिल रहते हैं।
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इसी कारण जांच एजेंसियां अब Cyber Fraud के मामलों को संगठित अपराध के रूप में देख रही हैं। यदि पूरे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तो एक गिरोह के पकड़े जाने के बाद दूसरा नेटवर्क उसी तरीके से काम शुरू कर देता है।
BNS की धारा 111 क्यों महत्वपूर्ण है?
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 111 संगठित अपराध से संबंधित है। यदि कोई समूह लगातार अवैध गतिविधियों के जरिए आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से अपराध करता है, तो उसके खिलाफ इस धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है। साइबर अपराध के मामलों में यह प्रावधान इसलिए अहम है क्योंकि यह केवल ठगी करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गिरोह और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क को जांच के दायरे में लाने का अवसर देता है।
म्यूल बैंक अकाउंट क्या होते हैं?
म्यूल बैंक अकाउंट ऐसे खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धन को जमा करने, एक खाते से दूसरे खाते में भेजने और नकद निकालने के लिए किया जाता है।
जांच में सामने आया है कि कई खाते वेब डेवलपमेंट एजेंसियों, रियल एस्टेट कंपनियों या अन्य व्यावसायिक संस्थानों के नाम पर खोले गए। इनमें से कुछ कंपनियां केवल कागजों में मौजूद थीं, लेकिन उनके खातों के माध्यम से लाखों और करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया।
यही खाते Cyber Fraud नेटवर्क की सबसे मजबूत कड़ी माने जाते हैं।
ऑपरेशन म्यूल हंट क्या है?
महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस द्वारा शुरू किया गया ऑपरेशन म्यूल हंट ऐसे बैंक खातों की पहचान करने, उन्हें फ्रीज करने और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अभियान है। पुलिस का मानना है कि जब तक साइबर अपराधियों की बैंकिंग व्यवस्था समाप्त नहीं होगी, तब तक ऑनलाइन ठगी पर प्रभावी रोक लगाना कठिन रहेगा।
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I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर केवल तीन दिनों में 15 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में ऐसे बैंक खातों की पहचान की गई जिनका उपयोग देश के अलग-अलग राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया गया था।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले मामले
जांच के दौरान कई ऐसे बैंक खाते मिले जिनसे संगठित Cyber Fraud नेटवर्क के संचालन के संकेत मिले। एक किराना व्यवसाय के खाते में ₹94 लाख जमा हुए और केवल 11 दिनों में पूरी राशि निकाल ली गई। यह खाता पांच राज्यों में दर्ज 13 साइबर शिकायतों से जुड़ा मिला।
एक वेब डेवलपर के नाम पर खोले गए खाते में तीन दिनों के भीतर ₹55 लाख का लेनदेन हुआ। एक रियल एस्टेट कंपनी, जो केवल कागजों पर मौजूद थी, उसके खाते में एक सप्ताह के भीतर ₹20 लाख का लेनदेन दर्ज किया गया।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि साइबर ठगी का नेटवर्क केवल मोबाइल फोन या इंटरनेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके पीछे मजबूत वित्तीय तंत्र काम करता है।
NCRP और I4C कैसे करते हैं मदद?
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) देशभर से प्राप्त साइबर अपराध शिकायतों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण करते हैं।
इसी डेटा के आधार पर पुलिस अलग-अलग राज्यों में सक्रिय गिरोहों के बीच संबंध तलाशती है और म्यूल बैंक खातों की पहचान कर कार्रवाई आगे बढ़ाती है।
Cyber Fraud से बचने के लिए क्या करें?
यदि कोई व्यक्ति बैंक खाते के बदले कमीशन देने का प्रस्ताव देता है तो उसे तुरंत अस्वीकार कर दें।
अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग या यूपीआई किसी दूसरे व्यक्ति को उपयोग के लिए कभी न दें।
यदि आपके खाते में बिना जानकारी के बड़ी राशि आती है या संदिग्ध लेनदेन दिखाई देते हैं, तो तुरंत बैंक और साइबर पुलिस को इसकी सूचना दें।
निष्कर्ष
भारत में Cyber Fraud लगातार नए रूप ले रहा है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमजोरी उसका वित्तीय नेटवर्क है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111 जांच एजेंसियों को ऐसे संगठित साइबर गिरोहों के पूरे ढांचे पर कार्रवाई करने का कानूनी आधार देती है।
म्यूल बैंक खातों की पहचान, उन्हें फ्रीज करना, I4C और NCRP के डेटा का उपयोग तथा राज्यों के बीच समन्वित जांच भविष्य में बड़े साइबर ठगी नेटवर्क को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यही कारण है कि अब साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनके पूरे आर्थिक तंत्र को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।











