Mule SIM Fraud: साइबर अपराधियों तक पहुंचने की सबसे अहम कड़ी बनी सिम कार्ड की जांच

दिल्ली पुलिस की साइबर थाना टीम ने मेवात से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर एक अंतरराज्यीय Mule SIM सिंडिकेट का खुलासा किया है। यह मामला बताता है कि साइबर अपराधी आम लोगों के नाम पर जारी सिम कार्ड का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
दिल्ली पुलिस ने मेवात से अंतरराज्यीय Mule SIM साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।

साइबर ठगी के अधिकांश मामलों में लोग बैंक खाते, यूपीआई और मोबाइल ऐप पर ध्यान देते हैं, लेकिन जांच एजेंसियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुराग अक्सर मोबाइल सिम कार्ड बनता है। यही वजह है कि देशभर में पुलिस अब Mule SIM नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रही है।

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दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर थाना द्वारा की गई एक कार्रवाई में ऐसे ही एक अंतरराज्यीय साइबर म्यूल सिम सिंडिकेट का खुलासा हुआ। जांच के दौरान दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और यह सामने आया कि वे साइबर अपराधियों तक सिम कार्ड पहुंचाने का काम करते थे।

क्या है पूरा मामला?

मध्य दिल्ली डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के अनुसार शिकायतकर्ता को एक व्यक्ति ने खुद को मनोज बताते हुए फोन किया। उसने कहा कि उसके परिवार का एक सदस्य अस्पताल में भर्ती है और बिल जमा करने की जल्दबाजी में गलती से पैसे शिकायतकर्ता के खाते में भेज दिए गए हैं।

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इसी दौरान शिकायतकर्ता के मोबाइल पर बैंक से राशि जमा होने का संदेश भी आ गया। चूंकि शिकायतकर्ता मनोज नाम के एक व्यक्ति को पहले से जानता था, इसलिए उसे कहानी वास्तविक लगी। बाद में आरोपी द्वारा भेजे गए QR Code और भुगतान विवरण के माध्यम से उसने पूरी राशि वापस भेज दी।

बाद में पता चला कि पूरी कहानी झूठी थी और यह एक सुनियोजित साइबर ठगी थी। इस धोखाधड़ी में शिकायतकर्ता को ₹1.14 लाख का नुकसान हुआ। इस सिलसिले में एफआईआर संख्या साइबर थाना, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में मामला दर्ज किया गया।

तकनीकी जांच से खुला अंतरराज्यीय Mule SIM सिंडिकेट

मामले की जांच के लिए SI Gaurav Singh, HC Kranti, HC Bharat और Ct. Dharmender की विशेष टीम बनाई गई। इस टीम ने SHO/PS Cyber Insp. Yograj Dalal की निगरानी और ACP Saurabh A. Narendra के मार्गदर्शन में लगातार तकनीकी निगरानी, फील्ड इंटेलिजेंस और डिजिटल ट्रैकिंग की।

जांच के दौरान मिले तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर टीम ने 22 जुलाई 2026 को हरियाणा के फिरोजपुर झिरका (मेवात) से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।

वीडियो देखें

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय मनोज और 23 वर्षीय यश सैनी के रूप में हुई है। दोनों मेवात, हरियाणा के निवासी हैं।पुलिस जांच में सामने आया कि मनोज अपने नाम से जारी सिम कार्ड पैसों के बदले यश सैनी को देता था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह पहले भी लगभग 10 से 15 सिम कार्ड साइबर अपराधियों तक पहुंचा चुका है।

दूसरी ओर, यश सैनी स्थानीय स्तर पर सिम कार्ड जुटाता था और उनके सब्सक्राइबर विवरण में हेरफेर कर उन्हें मेवात में सक्रिय साइबर गिरोहों तक पहुंचाता था ताकि जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक उपयोगकर्ता तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।

पुलिस ने क्या बरामद किया?

कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से एक सक्रिय VI SIM Card बरामद किया गया। पुलिस का मानना है कि यह सिम साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रही थी।

जांच में यह भी सामने आया कि मनोज पहले से Habitual Mule SIM Provider के रूप में काम कर रहा था। दोनों आरोपियों की अन्य साइबर अपराध मामलों में भूमिका की भी जांच जारी है।

Mule SIM क्या होती है?

Mule SIM वह मोबाइल सिम होती है जो किसी व्यक्ति के नाम पर जारी होती है लेकिन उसका उपयोग कोई दूसरा व्यक्ति साइबर अपराध करने के लिए करता है।

ऐसी सिम कई तरीकों से अपराधियों तक पहुंचती हैं।

  • लालच देकर खरीदी जाती हैं।
  • कमीशन देकर किराये पर ली जाती हैं।
  • फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी के जरिए सक्रिय कराई जाती हैं।
  • असली ग्राहक के नाम पर जारी होने के बाद अपराधियों को बेच दी जाती हैं।

साइबर अपराधी इन्हीं सिम का उपयोग फर्जी कॉल, ओटीपी, बैंक धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, निवेश ठगी और यूपीआई फ्रॉड जैसे अपराधों में करते हैं।

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Alok Verma
a senior journalist with a 30 years experience of print, electronics and digital. worked with dainik jagran, news18india, R,bharat, zee news

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20-10-2026