पटना में सावन का रंग इस बार थोड़ा अलग नजर आया। कहीं घर में तैयार किए गए अचार और खाद्य उत्पाद बिक रहे थे तो कहीं हस्तशिल्प और दूसरे छोटे कारोबार की झलक दिख रही थी। मंच पर लोक नृत्य और संगीत था और इसी माहौल में उन महिलाओं को सम्मान भी मिला, जिन्होंने अपने हुनर को काम में बदला है।
सुनें विकास वैभव की बातः
यही तस्वीर गार्गी उद्यमी सखी सावन महोत्सव 2026 में देखने को मिली। इस कार्यक्रम में महिला उद्यमियों, कलाकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा महिलाओं ने हिस्सा लिया। आयोजन लेट्स इंस्पायर बिहार के गार्गी चैप्टर की ओर से किया गया।
विकास वैभव बोले, बिहार के विकास में महिलाओं की बड़ी भूमिका
कार्यक्रम का उद्घाटन लेट्स इंस्पायर बिहार के संरक्षक विकास वैभव, आईपीएस ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित बिहार का सपना तब पूरा होगा, जब महिलाएं राज्य के आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास में आगे रहेंगी। उन्होंने बिहार की महिलाओं में मौजूद रचनात्मकता, नेतृत्व और उद्यमशीलता का भी उल्लेख किया।
विकास वैभव ने बताया कि लेट्स इंस्पायर बिहार से करीब 4 लाख लोग स्वैच्छिक आधार पर जुड़े हैं, जिनमें 40 हजार से अधिक महिलाएं हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बिहार के 20 जिलों में 41 गार्गी पाठशालाएं चल रही हैं। वर्ष 2028 तक गार्गी चैप्टर को बिहार की प्रत्येक पंचायत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्टॉल पर दिखा महिलाओं के कारोबार का रंग
महोत्सव में लगे स्टॉल सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले हिस्सों में रहे। महिलाओं ने अपने बनाए उत्पाद और कारोबार यहां लोगों के सामने रखे। खाने-पीने के सामान से लेकर हस्तशिल्प तक कई तरह के उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
इन स्टॉलों की खास बात यह रही कि यहां महिला उद्यमी अपने उत्पाद की विक्रेता भर नहीं थीं। वे अपने काम, उसकी शुरुआत और आगे बढ़ने की कहानी भी लोगों से साझा कर रही थीं।
ऐसे आयोजन छोटे कारोबार चलाने वाली महिलाओं के लिए ग्राहक और दूसरी उद्यमियों से सीधे मिलने का मौका भी बनते हैं।
मिथिला, मगध और भोजपुर की झलक भी दिखी
यह आयोजन कारोबार तक सीमित नहीं रहा। बिहार की लोक संस्कृति भी इसका अहम हिस्सा बनी।
गार्गी यूथ टीम ने कजरी और लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद “मिथिला, मगध, भोजपुर के रंग एक संग” थीम पर सावन कॉन्टेस्ट वॉक और परिचय कार्यक्रम हुआ। इसमें बिहार के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक पहचान देखने को मिली।
मनो रमा म्यूजिक एंड डांस स्कूल की ओर से शिव स्तुति पर कथक प्रस्तुति दी गई। सावन ग्रुप डांस और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
इन महिलाओं को मिला गार्गी महिला उद्यमिता सम्मान
कार्यक्रम में गार्गी महिला उद्यमिता सम्मान भी दिया गया। इसमें अलग-अलग कामों में पहचान बनाने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया।
सम्मान पाने वालों में डॉ. पूनम आनंद, सुरूचिका सिंह, सुशीला देवी, इंदु अग्रवाल और हेमा देवी शामिल रहीं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इंदु अग्रवाल ने 300 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया है, जबकि हेमा देवी ने 500 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया है।
कश्मीरा सिंह, आभा सिन्हा, जयन्ती सिन्हा, मिताली मुखर्जी, राखी सौरव सिंह और अमृता सिंह को भी सम्मान मिला। इनकी गतिविधियां चिकित्सा, शिक्षा, कला एवं शिल्प, सामाजिक सेवा और सामुदायिक कार्यों से जुड़ी हैं।
सावन प्रतियोगिता में किसने मारी बाजी?
कार्यक्रम में सावन कॉन्टेस्ट के विजेताओं की घोषणा भी हुई।
सोनिका को प्रथम गार्गी देसी बिहारन चुना गया। संभवी साजल ने द्वितीय गार्गी सावन दिवा का खिताब जीता, जबकि कन्नू त्रिपाठी तृतीय गार्गी वॉइस ऑफ बिहार बनीं।
बाजार तक पहुंच की बात भी उठी
गार्गी चैप्टर की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. प्रीति बाला ने कहा कि महिलाओं की प्रतिभा को उद्यम में बदलने के साथ उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता और बाजार से जुड़ने के अवसर मिलना जरूरी है। उन्होंने कौशल विकास, नेटवर्किंग, मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच पर जोर दिया।
पटना चैप्टर की मुख्य समन्वयक नेहा सिंह ने कहा कि महिलाओं को मंच देने के साथ उनके कौशल को पहचान और कारोबार को बाजार मिलना भी जरूरी है।
यही वजह है कि इस आयोजन में लगे स्टॉल महज प्रदर्शनी नहीं रहे। वहां महिलाओं के कारोबार और उनके बनाए उत्पाद सीधे लोगों तक पहुंचे।
सावन महोत्सव का आखिरी रंग भी रहा खास
कार्यक्रम का समापन सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इसके बाद प्रतिभागियों, आयोजकों और अतिथियों की सामूहिक तस्वीर ली गई।
आखिर में सामूहिक कजरी नृत्य हुआ। इस तरह सावन महोत्सव में कारोबार, लोक संस्कृति और महिलाओं के हुनर की तीन अलग तस्वीरें एक ही मंच पर दिखाई दीं।
पटना का यह आयोजन एक सवाल भी छोड़ गया है। अगर महिलाओं के छोटे कारोबार को ग्राहक, बाजार और सही मंच लगातार मिलता रहे, तो बिहार में कितनी नई कारोबारी कहानियां सामने आ सकती हैं?








