दिल्ली पुलिस सिस्टम ने अपनाया यह तकनीक आईओ कर सकेंगे हिंदी में टाइप

दिल्ली पुलिस के लोग बोलकर हिंदी में कर सकेंगे टाइप। सिस्टम लेगा उर्दू हिंदी के सारे शब्द।
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दिल्ली पुलिस सिस्टम में अब हिंदी में टाइप करना आसान होगा। इसके लिए एक खास तकनीक अपनाया गया है। इस सिस्टम की मदद से अब दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी हिंदी में टाइप कर सकेंगे। नई दिल्ली और उत्तरी दिल्ली के थानो में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किए गए फोनेटिक कीबोर्ड सिस्टम स्पीच टू टेक्सट साफ्टवेयर पर आधारित है। तकनीकी विकास में पुलिस का यह सिस्टम मील का पत्थर माना जा रहा है। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना पेशेवर जांच औऱ डेटा रिकार्ड रखने पर जोर देते रहे हैं। दिल्ली पुलिस के अधिकारी हिंदी वॉयस टाइपिंग सुविधा के साथ एक फोनेटिक कीबोर्ड सिस्टम की मदद से क्राइम क्रिमिनल एंड नेटवर्किंग सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) में टाइप कर सकेंगे। सीसीटीएन पर देश भर में एफआईआर दर्ज करने, केस डायरी लिखने और चार्जशीट जमा करने आदि से शुरू होने वाले जांच के सभी कार्य किए जाते हैं।

गौरतलब है कि जांच अधिकारियों को हिंदी में कंप्यूटर टाइपिंग में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। हिंदी का इस्तेमाल शिकायतकर्ता और आम जनता अपने बयानों को दर्ज करने और रिकॉर्ड करने के लिए करती है। इस तकनीकी समाधान के साथ अब जांच अधिकारी (आईओ) फोनेटिक कीबोर्ड का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपने काम को बोलने और रिकॉर्ड करने में सक्षम होंगे।

सिस्टम ने अब तक कैसे काम किया

दिल्ली पुलिस(Delhi police)में बहुत कम लोग ऐसे हैं जो हिंदी टाइपिंग में माहिर हैं। इसलिए जांच अधिकारियों को एफआईआर, केस डायरी, फाइनल रिपोर्ट आदि आधिकारिक कार्यों के लिए हिंदी में सीसीटीएनएस संचालित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। अक्सर डाटा एंट्री आपरेटरों की मदद लेनी पड़ती थी।मौजूदा सिस्टम हिंदी लिपियों को स्वीकार नहीं करता था और यहां तक ​​कि हिंदी के शब्दों और वाक्यों को भी अंग्रेजी लिपि में लिखा जाता था।

एआई आधारित प्रणाली हिंदी/उर्दू को आत्मसात करती है, दक्षता में सुधार करती है

दिल्ली पुलिस द्वारा अपनाया गया नया सिस्टम त्वरित, आसान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित है। प्रयोक्ताओं की सुविधा के लिए पारंपरिक हिंदी/उर्दू शब्दों का एक शब्दकोश, जो अक्सर पुलिस के काम करने में प्रयोग किया जाता है, जोड़ा गया है। सिस्टम नए हिंदी और उर्दू शब्दों को भी पकड़ता है और उन्हें डेटाबेस के लिए संग्रहीत करता है, इस प्रकार पुलिस कार्यों में उपयोग किए जाने वाले सभी शब्दों और वाक्य-विन्यास को शामिल करने के लिए इसकी शब्दावली का विस्तार करता है।

इस प्रणाली ने डिजिटल रूप से उचित रिकॉर्ड बनाए रखने के मामले में पुलिस के कामकाज की गति, सटीकता और दक्षता में सुधार किया है। यह सीसीटीएनएस का उपयोग करने वाले कर्मियों के लिए एक बड़ी राहत और जांच कार्य में मील का पत्थर बनकर आया है।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह प्रणाली नई दिल्ली और उत्तरी जिलों के सभी पुलिस थानों में शुरू की गई है और जल्द ही इसे सभी जिलों में लागू कर दिया जाएगा।

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