ड्रग तस्करी का नया रास्ता इंटरनेट है। जिस तरह दूसरे सभी अपराध के तरीकों में बदलाव हुआ है उसी तरह ड्रग ट्रैफिकिंग के लिए भी डिजिटल प्लेटफार्म का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। इसी को ध्यान में रख नारकोटिक्ट कंट्रोल ब्यूरो ने “ऑपरेशन WIPE” की शुरुआत की है।
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इस पहल का मकसद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए होने वाली अवैध ड्रग्स की बिक्री और वितरण को समय रहते रोकना है।
क्या है “ऑपरेशन WIPE” और इसकी जरूरत क्यों पड़ी
“ऑपरेशन WIPE” का पूरा नाम Web-based Illicit Activities Prevention & Enforcement है। यह पहल NDPS Act के तहत नियंत्रित दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाई गई है। पहले जहां एजेंसियां अपराध होने के बाद कार्रवाई करती थीं, वहीं अब यह ऑपरेशन पहले से निगरानी करके संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने पर जोर देता है।
ऑनलाइन मार्केटप्लेस, सोशल मीडिया और डिजिटल पेमेंट सिस्टम के बढ़ते उपयोग ने ड्रग तस्करों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। ऐसे में यह ऑपरेशन समय की जरूरत बन गया था।
ऑपरेशन MED-MAX से मिली दिशा
ऑपरेशन wipe के पहल की पृष्ठभूमि जुलाई 2025 में चलाए गए “ऑपरेशन MED-MAX” से जुड़ी है, जिसमें एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का खुलासा हुआ था। इस कार्रवाई में Drug Enforcement Administration और Australian Federal Police जैसी एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि यह नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ था और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहा था। भारत में ट्रामाडोल की जब्ती से शुरू हुई जांच ने एक ऐसे संगठित गिरोह का खुलासा किया, जो एशिया, यूरोप, उत्तर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक फैला था।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए कैसे फैल रहा है ड्रग ट्रैफिकिंग
अपराधी अब ऑनलाइन B2B वेबसाइट्स पर दवाओं की लिस्टिंग करते हैं और ग्राहकों से सीधे संपर्क करते हैं। भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल चैनलों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लेनदेन का पता लगाना कठिन हो जाता है।
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इस तरह के नेटवर्क अक्सर कॉल सेंटर के जरिए ऑर्डर संभालते हैं और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग चैनलों के जरिए डिलीवरी सुनिश्चित करते हैं। यह पूरा सिस्टम इतनी तेजी से काम करता है कि कई बार कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए इसे ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
NCB ने इस अभियान के दौरान 122 मामलों की पहचान की है, जिनमें 62 प्रकार के ड्रग्स शामिल हैं। इनमें क्लोनाजेपाम, डायजेपाम और फेंटानिल जैसी दवाएं प्रमुख हैं। इनमें से अधिकांश NDPS Act के तहत नियंत्रित हैं।
इस अभियान में International Narcotics Control Board के SNOOP प्रोग्राम से भी मदद ली जा रही है, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर नए प्रकार के ओपिओइड्स की पहचान संभव हो रही है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती और कार्रवाई
NCB ने कई प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर उन्हें अपनी सेवाओं के दुरुपयोग को रोकने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद IndiaMART, TradeIndia और Dial4Trade जैसे प्लेटफॉर्म्स ने संदिग्ध लिस्टिंग हटाने और विक्रेताओं को निलंबित करने जैसे कदम उठाए हैं।
यह कदम इस दिशा में अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर अवैध गतिविधियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।
तकनीकी निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
NCB की तकनीकी टीमें अब एडवांस टूल्स और अंतरराष्ट्रीय इनपुट्स की मदद से लगातार इंटरनेट पर नजर रख रही हैं। यह निगरानी केवल डार्क वेब तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य वेबसाइट्स और ऐप्स पर भी की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सीमा पार संचालित नेटवर्क्स पर भी प्रभावी कार्रवाई हो सके।
सरकार की नीति और नागरिकों की भूमिका
भारत सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है और ड्रग ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इस प्रयास में आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
अगर किसी को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधि नजर आती है, तो उसकी जानकारी MANAS हेल्पलाइन 1933 पर दी जा सकती है। संबंधित लिंक, स्क्रीनशॉट या विक्रेता की जानकारी देने से एजेंसियों को त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
ऑनलाइन माध्यमों के जरिए बढ़ती ड्रग तस्करी आज एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। ड्रग तस्करी रोकने के लिए “ऑपरेशन WIPE” एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल के रूप में सामने आया है। यह अभियान दिखाता है कि अब कानून प्रवर्तन एजेंसियां केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पहले से तैयारी कर रही हैं।
यदि सरकार, एजेंसियां और नागरिक मिलकर काम करें, तो इस तरह के अपराधों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है और समाज को सुरक्षित बनाया जा सकता है।






