हर अपराध के पीछे एक कहानी होती है और कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो वर्षों बाद भी लोगों का ध्यान खींच लेती हैं। यह दिल्ली क्राइम स्टोरी भी कुछ ऐसी ही है। वर्ष 2018 के एक अपहरण मामले में वांछित आरोपी कई साल तक पुलिस और अदालत की नजरों से बचता रहा। वह अलग-अलग ठिकानों पर रहकर अपनी पहचान छिपाता रहा।
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मजे की बात ये है कि आरोपी फरारी के दौरान बारात में बैंड बजा रहा था और ऑफ सीजन में मजदूरी करता था।
दिल्ली क्राइम स्टोरी में कैसे मिला पुलिस को अहम सुराग
द्वारका साउथ थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 में दर्ज एफआईआर संख्या 333/2018 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के मामले में आरोपी मोहन उर्फ नूनी उर्फ संजय की तलाश की जा रही थी।
पुलिस के अनुसार आरोपी वर्ष 2019 से लगातार अदालत की कार्यवाही से बच रहा था। कई बार नोटिस और कानूनी प्रक्रियाओं के बावजूद वह न्यायिक प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ। लगातार गैरहाजिर रहने पर अगस्त 2025 में माननीय न्यायालय ने उसे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया।
बारात में बैंड बजाने की सूचना से खुला सुराग
डीसीपी कुशल पाल सिंह के मुताबिक द्वारका जिले की पुलिस टीम फरार अपराधियों की तलाश में लगातार अभियान चला रही थी। इस दौरान द्वारका सेक्टर 10 चौकी को आरोपी के बारे में विशेष सूचना मिली। सूचना के आधार पर टौकी प्रभारी सब इंसपेक्टर रजत मलिक, हेडकांस्टेबल प्रवेश दहिया और हेडकांस्टेबल पवन की टीम ने कई दिनों तक निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने का काम किया।
जांच के दौरान पता चला कि आरोपी अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहा है और बैंड पार्टी के साथ काम कर रहा है। जब पुलिस को उसके एक बारात समारोह में मौजूद होने की जानकारी मिली तो टीम ने तुरंत कार्रवाई की और उसे गिरफ्तार कर लिया।