पूर्वोत्तर भारत का राज्य अरुणाचल प्रदेश अब औषधीय पौधों और आयुर्वेद आधारित पारंपरिक चिकित्सा को नई पहचान देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में इटानगर के चिम्पू स्थित अरुणाचल प्रदेश स्टेट मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (APSMPB) परिसर में “चरक कॉन्फ्रेंस हॉल” का उद्घाटन किया गया।
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इस नई सुविधा को आयुर्वेद के जनक माने जाने वाले आचार्य चरक के नाम पर तैयार किया गया है। राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के तहत विकसित यह कॉन्फ्रेंस हॉल अब औषधीय पौधों, पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों का अहम केंद्र बनेगा।
आखिर क्यों खास माना जा रहा है “चरक कॉन्फ्रेंस हॉल”?
अरुणाचल प्रदेश जैव विविधता और दुर्लभ वनस्पतियों के लिए देशभर में जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं जिनका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से होता रहा है। ऐसे में “चरक कॉन्फ्रेंस हॉल” को केवल एक भवन नहीं बल्कि भविष्य की योजनाओं के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
यहां प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, शोध आधारित चर्चाएं, किसानों और विशेषज्ञों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके जरिए राज्य में मेडिसिनल प्लांट्स की खेती, संरक्षण और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने की योजना है।
वन विभाग ने पारंपरिक ज्ञान को मजबूत करने पर दिया जोर
उद्घाटन के दौरान APSMPB के अध्यक्ष श्री गोरुक पोरदुंग ने कहा कि पारंपरिक औषधीय ज्ञान को संरक्षित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने माना कि अरुणाचल प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन और औषधीय पौधों की संपदा राज्य के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और उपयोग पर काम किया जाए तो यह क्षेत्र रोजगार, स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था तीनों के लिए लाभकारी बन सकता है।
APSMPB की बैठक में भविष्य की योजनाओं पर चर्चा
उद्घाटन कार्यक्रम के बाद APSMPB की 10वीं जनरल बॉडी मीटिंग भी आयोजित हुई। बैठक में बोर्ड की उपलब्धियों, आगामी योजनाओं और औषधीय पौधों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि, उद्यान, पर्यावरण विभाग, BSI, NGOs और अन्य संस्थाओं के अधिकारी मौजूद रहे। कई सदस्यों ने औषधीय पौधों के व्यवसायिक उपयोग और किसानों को इससे जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया।
आयुर्वेद और जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा नया मंच
विशेषज्ञ मानते हैं कि “चरक कॉन्फ्रेंस हॉल” जैसे संस्थागत ढांचे आने वाले समय में अरुणाचल प्रदेश को मेडिसिनल प्लांट सेक्टर में नई पहचान दिला सकते हैं। इससे न केवल पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा बल्कि शोध, प्रशिक्षण और संरक्षण गतिविधियों को भी मजबूत आधार मिलेगा।