बिहार के सबसे बड़े इस राजनीतिक घराने में क्या सचमुच कुछ गड़बड़ है

बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक घराने यानि राजद सुप्रीमो लालू यादव के परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, ऐसा  बार-बार सुनने को मिलता रहा है। कभी लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप के बयान से तो कभी उनकी सफाई से। अब इस खबर को लालू की बड़ी बेटी मीसा यादव के बयान ने और हवा दे दी है।

मीसा का बयान, राजद की सफाई

तेजस्वी और तेजप्रताप के बीच मनमुटाव की बात कोई नई नहीं है। लेकिन, दोनों भाइयों के बीच की बात बड़ी बहन मीसा भारती ने खुलेआम स्वीकार कर ली तो विपक्ष क्यों चुकता। अब भले ही मीसा को अपने बयान पर अफसोस हो रहा हो लेकिन जुबान से निकली बात वापस तो जा नहीं सकती। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि मेरी बात को मीडिया में तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। फिलहाल उनके बयान का वीडियो वायरल हो रहा है।

उनके बयान पर राजद के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने  डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि लालू परिवार में फूट की तलाश करना रोचक और रसीला काम है। राजनीति से लेकर मीडिया तक को इसमें बहुत रस मिलता  है।

 विवाद क्यों बनती है सुर्खियां

शिवानंद तिवारी भले ही अपने बयान से डैमेज कंट्रोल कर लें लेकिन भाई-भाई के बीच मनमुटाव कोई नई बात नहीं है। इससे पहले 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आधिकारिक निवास पर 11 सितंबर को हुई पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में उनके बड़े बेटे तेज प्रताप की अनुपस्थिति भी लोगों को खटकी थी। तेजप्रताप घर में ही थे लेकिन बैठक में नहीं आए।

यह बैठक अगले लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई थी और इसकी अध्यक्षता बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और तेज के छोटे भाई तेजस्वी यादव कर रहे थे और बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी सांसद बेटी मीसा भारती भी इस बैठक में मौजूद थीं। बहन को तेजप्रताप की कमी तो जरूर खटकी होगी।

बाद में तेजप्रताप की तबियत खराब होने की बात कही गई और तेजप्रताप ने भी बयान दिया कि मेरी तबियत ठीक नहीं थी इसीलिए मैं बैठक में नहीं गया तो वहीं तेजस्वी ने कहा कि भाई थके हुए थे इसीलिए नहीं आ सके। तेजस्वी जहां नपे-तुले शब्दों में अपनी बात कह जाते हैं वहीं तेजप्रताप मनमौजी हैं इसीलिए उनकी बातों से लालू परिवार मुसीबत में पड़ जाता है।

राजनीतिक विरासत वजह तो नहीं…

पिछले साल नवंबर महीने में लालू ने अपने छोटे बेटे को राजनीतिक विरासत सौंपने का ऐलान कर दिया और साथ ही इशारों में ये भी बता दिया बिहार में अगला विधानसभा चुनाव उनके बेटे तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। एक तरह से लालू ने तेजस्वी को आरजेडी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बता दिया।इस मौके पर लालू ने तेजस्वी के काम की तारीफ भी की। लेकिन इस वक्त लालू तेज प्रताप का जिक्र करना भूल गए या फिर नजरअंदाज कर गए। यहीं से तेजप्रताप और तेजस्वी के बीच दूरी बढ़ती गई।

तेजप्रताप का दर्द

तेजप्रताप बड़े बेटे होने के बावजूद खुद को पार्टी के भीतर और पिता के नजरों में अपना कद बड़ा नहीं कर पाए, जैसा कद पिता की नजरों में और पार्टी की नजरों में तेजस्वी की है। जिसकी  टीस बार-बार उन्हें बेचैन करती है और वे अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते रहते हैं। उनके इस दर्द को बहन मीसा शायद बेहतर समझती हैं और इसीलिए मनेर में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में अपने दर्द को बयां करने से खुद को नहीं रोक सकीं।

तेजप्रताप ने पहली बार अपने दर्द को ट्वीट के जरिेए साझा किया था और लिखा था कि पार्टी में उनकी अनदेखी की जा रही है, जिससे उन्हें दुख होता है। उन्होंने ये भी लिखा कि मुझे साजिश की आशंका सता रही है।

लेकिन पूरे परिवार ने कई मौकों पर एकजुटता भी प्रदर्शित की है इसलिए राजनीतिक अखाड़े में परिवार में फूट की बात को नकारा जाता है।

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