रांची में हैं मनोकामना पूरी करने वाले वृक्ष

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किरण दूबे

अगर आप झारखंड की राजधानी रांची जा रहे हैं और पौराणिक कथाओं और पुराणों में लिखी बातों पर यकीन करते हैं तो रांची को डोराण्डा जरूर जाइएगा।  पौराणिक कथाओं की अगर माने तो मन की इच्छा सिर्फ सोचने भर से पूरा करने वाला पेड़ कल्पतरू का वृक्ष सबसे ज्यादा रांची में है। रांची में एक दो नहीं 4 कल्पवृक्ष थे हालाकि इनमें से एक कुछ साल पहले भारी बारिश के कारण गिर गया। बहुत कोशिशों के बावजूद उसे जिंदा नहीं किया जा सका। कहा जाता है कि इस ‘मनोकामना’ पूरा करने वाले वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुआ था।

वेद और पुराणों में कल्पवृक्ष का उल्लेख मिलता है। कल्पवृक्ष स्वर्ग का एक विशेष वृक्ष है। पौराणिक धर्मग्रंथों और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर व्यक्ति जो भी इच्छा करता है, वह पूर्ण हो जाती है, क्योंकि इस वृक्ष में अपार सकारात्मक ऊर्जा होती है।

झारखंड की राजधानी रांची के डोरंडा इलाके में मुख्य सड़क के ठीक बगल में हैं कल्पतरू पेड़। इन पेड़ों के पास से गुजरते ही आपका ध्यान उस पर चला ही जाएगा। मोटी जड़, बड़े तने और दो-चार लोगों की भीड़। कोई शीश नवाए, तो कोई छूकर अपनी मुरादें पूरी करने के लिए बुदबुदाता नजर आ ही जाता है। ये पेड़ डोरंडा कॉलेज के पास हैं। यहां मनोकामना पूर्ण करने वाले तीन पेड़ हैं, जिन्हें कल्पतरु कहा जाता है।

हिन्दुओं की पौराणिक कथाओं के अुनसार कल्पतरु को ईश्वरीय वृक्ष माना गया है। वेदों के अनुसार इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। इसी मान्यता के आधार पर शहरवासी इस पवित्र वृक्ष से मनोकामना मांगते हैं। शहर के बाहर से भी आए लोग इसे देखने को व्याकुल रहते हैं। मनोवांछित फल मिलने पर आभार जताना नहीं भूलते।

ढाई सौ साल पहले ये कल्पतरु अंग्रेज रांची लेकर आए थे। तब इसके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते थे। मगर एक स्थानीय मुस्लिम ने इसके महत्व और अनोखेपन के बारे में जब लिखा, तो धीरे-धीरे दुनिया इनके बारे में जान सकी।

देश-विदेश से भी लोग इस कल्पतरु के वृक्षों को देखने लोग आते हैं. शहर के लोगों का मानना है की अगर इन वृक्षों का सही देख भाल नहीं हुआ तो यह ये वृक्ष जो कि पहले से हीं दुर्लभ की श्रेणी में है विलुप्त हो जाएंगे. महज़ राज्य सरकार के द्वारा फ़ॉरेस्ट विभाग का बोर्ड लगा देना  हीं काफ़ी नहीं है इन वृक्षों को बचाने के लिए.

 

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