पुलिस डायरी से/ मिस्ड कॉल से दोस्ती फिर मौत

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21 जून 2018 को दिल्ली के सरिता विहार में मिले लाश मामले की सुनवाई अब किसीभी दिन शुरू हो सकती है। सात टुकड़ो में मिली उस लाश का गहसा संबंध एक मिस्ड कॉल से था।

21 जून को सुबह करीब सवा आठ बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि सरिता विहार इलाके में आने वाले ओखला वाटर टैंक के पास एक कार्टन और बैग पड़ा हुआ है। मौके पर पहुंची पुलिस को गत्ता पेटी (कार्टन) और काले रंग का बैग मिला। पुलिस को कार्टन और बैग की जांच में महिला का सिर औऱ चावल के बोरे में एक जांघ जबकि दूसरे बोरे में कंधे से हटाए गए दोनों हाथ और दोनों पैर और कार्टन में महिला का धड़ बरामद हुआ। एक जांघ धड़ से ही लगा हुआ था। प्रारंभिक जांच में यही लग रहा था कि किसी ने महिला की हत्या कर उसके सात टुकड़े किए और सरिता विहार के पास जंगल में फेंक दिया।

जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरिता विहार पुलिस स्टेशन में हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं के तहत 160 नंबर एफआईआर दर्ज की गई। साउथ ईस्ट दिल्ली के डीसीपी चिन्मॉय विश्वाल ने एसीपी ढाल सिंह की देखरेख में सरिता विहार के तत्कालीन एसएचओ मुकेश कुमार, इंस्पेक्टर राम निवास, एसआई बेकंटेश कुमार, नागेन्द्र नागर, एएसआई अरविंद त्यागी, सुरेश त्यागी, खलील अहमद, कांस्टेबल राहुल, विनोद, विनय और दिलशाद की टीम बनाई।

डीसीपी चिन्मॉय विश्वाल

शिनाख्त

सात टुकड़ो में मिली लाश की जांच शुरू करने वाली पुलिस टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती शव की शिनाख्त थी। इसके लिए पुलिस ने पूरे एनसीआर में जिपनेट से लेकर तमाम लापता महिलाओं के रिकार्ड खंगाले लेकिन कहीं से लाश की शिनाख्त के लिए एक भी सुराग नहीं मिला। पुलिस के पास अब सिर्फ मौके से बरामद कार्टन यानि गत्ते की पेटी का सहारा था। लाश को ठिकाने लगाने के लिए इसी गत्ते की पेटी का इस्तेमाल किया गया था। इस पेटी पर एक सामान पहुंचाने वाली कंपनी का नाम छपा था। अंततः पुलिस ने गुड़गांव में मौजूद इस कंपनी का सहारा लिया। मगर कंपनी में हर रोज सैकड़ो की तादाद में पैकेट आते थे और उसे भेजा जाता था।

एसीपी ढाल सिंह

पुलिस ने दो दिन तक अथक कोशिश के बाद एक पैकेट पर अपना ध्यान केंद्रीत किया।

शारजाह कनेक्शन

जिस पैकेट पर पुलिस का ध्यान गया था वह पैकेट दुबई से अलीगढ़ भेजा गया था। अलीगढ़ के जावेद को यह पैकेट किसी ने शारजाह से अलीगढ़ भेजा था। अब एक पुलिस टीम को अलीगढ़ जावेद नाम के शख्स की तलाश में भेजा गया। पता चला कि जावेद बांदा में हो सकता है। पुलिस अलीगढ़ में जावेद का इंतजार करने लगी। दो दिन बाद जावेद अलीगढ़ अपने घर पहुंचा तो पुलिस ने उससे सघन पूछताछ शुरू की।

इसी कार्टन में मिली थी लाश

जावेद ने पुलिस को बताया कि शरजाह से काम करके लौटने के समय इस तरह के बहुत से कार्टन में उसका सामान आया था। इस तरह के कार्टन में से कुछ घर में तो कुछ काम करने वाली ने इस्तेमाल किए थे। इसके अलावा कुछ कार्टर उसके घर में भी रखे हुए थे। पुलिस ने जावेद के घर काम करने वाली से भी सघन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान जावेद ने पुलिस को ये भी बताया कि उसका एक फ्लैट दिल्ली के शाहीन बाग में भी है। जावेद के मुताबिक दिसंबर 2017 में शारजाह में नौकरी छोड़ने के बाद वह भारत लौट गया। यहां उसने गुगांव की सामान पहुंचाने वाली कंपनी से संपर्क किया। कंपनी ने उसका घरेलू सामान 5 फरवरी 2018 को उसके शाहीन बाग के घर में पहुंचा दिया। जावेद ने पुलिस को ये भी बताया कि 2014-15 में उसका एक रिश्तेदार शाहीन बाग के घर में रहता था लेकिन 2015 से वह घर खाली है।

(कार्टन और सुराग

जावेद के बयान के मुताबिक एक स्थानीय प्रोपर्टी डीलर ने मार्च 2018 में उससे शाहीन बाग के मकान को किराए पर देने के लिए संपर्क किया था। उसने भी खाली फ्लैट को किराय पर देकर कुछ पैसे कमा लेने के बारे में सोचा और इसी ख्याल से अपनी मां के साथ दिल्ली पहुंचा। फ्लैट में पड़े अपनी बहन के कुछ सामान उसने कार्टन में रखे और उसे फ्लैट पर ही छोड़ दिया साथ में एक कार्टन भी वहीं छोड़ दिया। कुछ खाली कार्टन साथ भी लिए और कार से अलीगढ़ रवाना हो गया। तब से वह खाली कार्टन औऱ बहन के सामान शाहीन बाग के फ्लैट में ही पड़े थे। इस बीच उसने बिहार के रहने वाले साजिद अली और उसके भाई को फ्लैट किराए पर दिया था। मगर वो 22 मार्च से 22 जून 2018 तक ही फ्लैट में रहे थे। साजिद और उसके भाई ने फ्लैट छोड़ते समय उसकी चाभी जावेद के दोस्त के हाथ में सौंप दी थी।

जूही हत्याकांड के आरोपी

शक की सूई

पुलिस के शक की सूई अब जावेद के फ्लैट को किराए पर लेने वाले साजिद की ओर घूमी, काफी कोशिशों के बाद साजिद को उसके बड़े भाई हस्मत के घर शाहीन बाग से हिरासत में लिया गया।

मिस्ड कॉल से दोस्ती फिर मौत 

साजिद से गहन पूछताछ में पुलिस को पता लगा कि वह कुरेक्षेत्र विशिवविद्यालय से मैकेनेकिल इंडीनियिरंग में बी टेक है। 2010 में गल्ती से उसने छपरा कॉलेज से मनोविज्ञान में स्नातक करने वाली जूही को मिस कॉल दे दिया था। इसके बाज जूही और साजिद में दोस्ती हो गई। यह दोस्ती पहले फोन पर चलती रही फिर साजिद उससे मिलने कभी कभार छपरा भी जाता रहा। तीन साल तक चली इस लव स्टोरी का अंत हुआ 2014 में दोनों की शादी से। जूही के माता पिता इसके लिए तैयार नहीं थे। मगर जूही ने उनकी परवाह नहीं की। जूही और साजिद को दो बच्चे भी हुए। 2016 में वह दिल्ली आ गए। मगर साजिद के पास कोई स्थाई नौकरी नहीं थी। वह अपने भाईयों की मदद से कभी कभार काम ले लेता था। दो बच्चों के खर्चे की वजह से जूही भी परेशान रहने लगी। इस बात को लेकर दोनों में प्रायः झगड़ा होता था। इसी बीच साजिद के संबंध उसके गृह शहर चंपारण में रहने वाली एक दूसरी लड़की से भी हो गए थे। साजिद अब जूही को अपने रास्ते से हटाना चाहता था। इस काम के लिए उसने एक कटार(मांस काटने वाला हथियार) भी खरीद ली।

लाश का राज

20 जून की रात साजिद ने फिर जूही से झगड़ा किया। इसके बाद पहले उसका गला घोंट कर मार दिया। इसके बाद उसने अपने भाई इश्तियाक आलम को बुलाया। दोनों जूही की लाश को घसीटकर बाथरूम में ले गए। इसके बाद उन्होंने हर जोड़ से लाश को सात हिस्सो में काटा और खून बहने दिया ताकि जाते समय पकड़े ना जाएं। शरीर का सारा खून निकालने के बाद उन्होंने हर टूकड़े को अच्छी तरह पैक कर चावल की बोरी और कार्टन में रखा उन्होंने हस्मत को बुलाकर सारी बात बताई। हस्मत ने भी पुलिस को बताने की बजाय उनका साथ दिया। हस्मत ने अपनी पहचान से एक मारूति आर्टिगा कार मंगाई औऱ लाश की बोरी और कार्टन को उठाकर वह लोग ओखला टैंक के पास फेंक आए।       

गिरफ्तारी

पुलिस ने तीनों भाई साजिद, हस्मत और इश्तियाक को गिरफ्तार कर लिया। मिस्ड कॉल से मौत तक के सफर में जूही तो मौत की नींद सो गई। उसकी लाश से दरिंदगी करने वाले तीनों भाई जेल पहुंच गए। पुलिस ने मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। 

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