फिर चर्चा में है मैरीटल रेप जानिए क्यों

इस पोस्ट को लिखे जाने से 24 घंटे पहले पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक शख्स के खिलाफ कोर्ट ऑर्डर के बाद मैरिटल रेप का मामला दर्ज हुआ है। शख्स की पत्नी का आरोप था कि वह उसे जबरदस्ती सेक्स के लिए मजबूर करता था। पीड़ित महिला ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस भी दर्ज कराया। महिला ने कहा कि उसके गर्भवती होने के बाद भी उसके साथ शारीरिक उत्पीड़न किया जाता था। इस नए केस के साथ एकबार फिर मैरिटल रेप चर्चा में है।

कानूनी स्थिति

भारत में ‘वैवाहिक बलात्कार‘ यानी ‘मैरिटल रेप‘ कानून की नज़र में अपराध नहीं है. यानी अगर पति अपनी पत्नी की मर्ज़ी के बगैर उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे अपराध नहीं माना जाता।

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में ‘मैरिटल रेप’ को ‘अपराध करार देने के लिए’ दायर की गई याचिका के ख़िलाफ़ कहा था कि इससे ‘विवाह की संस्था अस्थिर’ हो सकती है।

दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा, “मैरिटल रेप को अपराध नहीं करार दिया जा सकता है औस ऐसा करने से विवाह की संस्था अस्थिर हो सकती है। पतियों को सताने के लिए ये एक आसान औजार हो सकता है।”

ऐसे में ये सवाल पूछा जा सकता है कि ‘रेप’ और ‘मैरिटल रेप’ में क्या फर्क है और विवाह की संस्था का इससे क्या संबंध है?

 रेप की कानूनी परिभाषा

आईपीसी की धारा 375 के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी महिला से उसकी इच्छा के विरूद्ध, मर्जी के बिना, या मर्जी से लेकिन उसे खौफ जदा कर, सहमति से लेकिन अपने ब्याहता होने के भ्रम में, मर्जी से लेकिन सहमति देते वक्त महिला की मानसिक हालत ठीक ना हो या फिर उस पर किसी नशीली चीज का प्रभाव हो और महिला सहवास के नतीजे समझने की हालत में ना हो। महिला की आयु 16 साल से कम हो और उसकी मर्जी के बिना सेक्स किया जाए। तो वह रेप है।

मैरिटल रेप का कानूनी स्थिति

आईपीसी या भारतीय दंड विधान रेप की परिभाषा तो तय करता है लेकिन उसमें वैवाहिक बलात्कार या मैरिटल रेप का कोई जिक्र नहीं है।

धारा 376 रेप के लिए सजा का प्रावधान करता है और आईपीसी की इस पत्नी से रेप करने वाले पति के लिए सजा का प्रावधान है बशर्ते पत्नी 12 साल से कम की हो।

इसमें कहा गया है कि 12 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ पति अगर बलात्कार करता है तो उस पर जुर्माना या उसे दो साल तक की क़ैद या दोनों सजा दी जा सकती हैं।

धारा 375 और 376 के प्रावधानों से समझा जा सकता है कि सेक्स करने के लिए सहमति देने की उम्र तो 16 है मगर 12 साल से बड़ी उम्र की पत्नी की सहमति या असहमति का कोई मूल्य नहींं है।

 हिंदू मैरिज एक्ट

हिंदू विवाह अधिनियम पति और पत्नी के लिए एक दूसरे के प्रति कुछ जिम्मेदारियां तय करता है। इनमें सहवास का अधिकार भी शामिल है। क़ानूनन ये माना गया है कि सेक्स के लिए इनकार करना क्रूरता है और इस आधार पर तलाक मांगा जा सकता है।

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