जल प्रभाव सम्मेलन-2018 कल से 15 देश हो रहे हैं शामिल, पांच राज्यों पर है फोकस

नई दिल्ली, इंडिया विस्तार।  भारत जल प्रभाव सम्मेलन 5 दिसंबर से शुरू हो रहा है। दो दिन तक चलने वाले यह  सम्मेलन दिल्ली में आयोजित हो रहा है औऱ केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी भारत जल प्रभाव सम्मेलन-2018 का उद्घाटन करेंगे।  इसका आयोजन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और गंगा नदी थाला प्रंबधन एवं अध्ययन केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। भारत जल प्रभाव सम्मेलन एक वार्षिंक कार्यक्रम है जिसमें प्रतिभागी देश में जल से संबंधित कुछ सबसे बड़ी समस्याओं के आदर्श समाधान विकसित करने पर विचार विर्मश और बहस करते हैं।

इस वर्ष गंगा नदी थाले के संरक्षण पर विचार किया जायेगा। इस विषय पर वार्तां में कई देश शामिल होंगे। वे इस कार्य में भारत और विदेश से प्रौद्योगिकी विषयक नवाचारों, अनुसंधान, नीति फ्रेमवर्क और वित्त पोषण की पद्धतियों पर विचार विमर्श करेंगे। सम्मेलन में भारत सरकार के कई मंत्रालय और गंगा संरक्षण के बारे में निर्णय करने वाले सभी प्रमुख व्यक्ति हिस्सा लेंगे।

इसमें विभिन्न प्रयासों पर विचार किया जायेगा, जिनमें आकड़ें (सेंसर्स, एलआईडीएआर, मॉडलिंग आदि)एकत्र करना, जल-विज्ञान, ई-फ्लो, कृषि, अपशिष्ट जल और ऐसे ही अन्य मुद्दे शामिल होंगे।

सम्मेलन में तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा:

  • पांच राज्यों पर ध्यान केंद्रित करनाः ये है-  उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और बिहार। इसके अंतर्गत इऩ राज्यों में जारी प्रयासों और कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा।
  • गंगा वित्त पोषण मंचः 2018 के सम्मेलन के दौरान गंगा वित्त पोषण मंच का उद्घाटन भी किया जायेगा। यह मंच अनेक संस्थानों को सामान्य जानकारी, सूचना और साझेदारी के लिए एक समान प्लेटफार्म पर लाएगा। हाई ब्रिड एन्युटी मॉडल ने भारत में जल और अपशिष्ट जल उपचार के आर्थिक परिदृश्य को पुनः परिभाषित किया हैं। सभी टेंडर सफलता पूर्वक जारी किये जाते हैं और वित्तीय लक्ष्य हासिल किये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त सरकार भी अब छोटी विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार परियोजनाओं को प्रोत्साहित कर रही हैं।  वित्त पोषण मंच नमामि गंगे कार्यक्रमों में वित्तीय संस्थानों और इच्छुक निवेशकों को एकजुट करेगा।
  • प्रोद्योगिकी और नवाचार पर्यावरणः पर्यावरण प्रौद्योगिकी जांच प्रक्रिया के रूप में ज्ञात प्रायोगिक/प्रदर्शनात्मक कार्यक्रम संचालित करना। इसके जरिए विश्वभर की प्रौद्योगिकी और नवाचार कंपनियों को नदी थाले में प्रचलित समस्याओं के समाधान के लिए अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

इस सम्मेलन में 15 देशों से करीब 200 घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागी हिस्सा लेंगे, जिनमें 50 से अधिक केंद्रीय, राज्य और नगरीय प्रशासनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इसमें वृक्षारोपण और जैव विविधता, शहरी नदी/जल प्रबंधन योजनाएं, गंगा संरक्षण कार्यक्रम के लिए वित्त पोषण हेतू वैश्विक पारिस्थितिकी का निर्माण और दीर्घावधि परियोजना वित्त के लिए वैश्विक पूंजी बाजार से पूंजी जुटाना, जैसे मुद्दों पर विचार विमर्श किये जाने की संभावना हैं।

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17-08-2026