Digital Arrest Scams पर काबू पाने के लिए सरकार का नया प्लान क्या है, जान लीजिए आप भी

डिजिटल अरेस्ट और AI Deepfake जैसे नए साइबर अपराधों पर सरकार अलग कानूनी प्रावधान लाने की तैयारी में है। सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कानूनों में इन अपराधों की स्पष्ट परिभाषा को लेकर सवाल उठाए हैं।
भारत में digital arrest scams और डीपफेक अपराध का प्रतीकात्मक चित्र

साल 2022 से मई 2026 तक की बात करें तो देश भर में digital arrest scams की 2.97 लाख शिकायतें मिली हैं। इतने बड़े स्तर पर चल रहे digital arrest scams पर काबू पाने के लिए सरकार ने नया फुल प्रुफ प्लान तैयार किया है। इसके लिए सरकार अगले संसद सत्र में बिल लाने पर विचार कर रही है। इस बिल में क्या होगा और आप पर क्या असर होगा ? आईए जानते हैं।

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Digital Arrest Scams पर कैसा होगा नया कानून

अगले संसद सत्र में लाए जाने वाले विधेयक में डिजिटल अरेस्ट मैकेनिज्म और डीपफेक से जुड़े अपराधों को काबू करने का विस्तार से जिक्र होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बार-बार डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर चिंता जताए जाने के बिद सरकार ने नए विधेयक के बारे में फैसला किया है। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने पूछा था कि क्या वर्तमान कानून इन साइबर अपराधों को परिभाषित करते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की थी

• कोर्ट ने मौजूदा दंड प्रावधानों में खामियों की ओर इशारा किया।
• डीपफेक निर्माण, प्रसार और डिजिटल टूल्स के दुरुपयोग जैसे अपराध स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं।
• सवाल उठाया गया कि क्या IPC और अन्य कानून इन तकनीकी अपराधों को कवर करते हैं या नए प्रावधानों की आवश्यकता है।

सरकार ने क्या कहा

सरकार ने शीर्ष अदालत की चिंता को स्वीकार किया। इसके साथ ही सरकार ने अगले सत्र में विधेयक लाने का संकेत दिया। इस विधेयक में डिजिटल अरेस्ट को परिभाषित किया जाएगा। इसके साथ ही डीपफेक दुरुपयोग को अपराध घोषित किया जाएगा। इसके साथ साथ विधेयक में स्पष्ट दंड प्रावधान और अपराधी की गंभीरता के अनुसार सजा का प्रावधान भी होगा।


विधेयक में संभावित मुद्दे

-मौजूदा कानूनों के साथ तालमेल
o IT Act 2000 और BNS के साथ सामंजस्य।
o डेटा सुरक्षा और गोपनीयता ढांचे के अनुरूपता।

नए विधेयक से प्रभाव


• कानूनी स्पष्टता: नागरिकों और प्रवर्तन एजेंसियों को अपराधों की स्पष्ट परिभाषा।
• निवारण: कठोर दंड प्रावधान डीपफेक दुरुपयोग को रोक सकते हैं।
• न्यायिक तालमेल: सुप्रीम कोर्ट की चिंताओं का समाधान।
• कार्यान्वयन चुनौतियाँ: क्षमता निर्माण, डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञता और जन-जागरूकता की आवश्यकता।
सरकार का यह प्रस्ताव भारत के दंड कानून ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करेगा कि कानून तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए और उभरते साइबर खतरों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करे।

डिजिटल अरेस्ट की परिभाषा
o ऑनलाइन अवैध हिरासत और प्राधिकरण का प्रतिरूपण।
o निजी संस्थाओं द्वारा दुरुपयोग से सुरक्षा।

डीपफेक विनियमन
o डीपफेक को AI आधारित सिंथेटिक मीडिया के रूप में परिभाषित करना।
o धोखाधड़ी, ब्लैकमेल, यौन उत्पीड़न, गलत सूचना और राजनीतिक हेरफेर में दुरुपयोग पर दंड।
o प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और त्वरित हटाने की व्यवस्था।

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inspector raman kumar
इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह,दिल्ली पुलिस में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है । वे दिल्ली के कई पुलिस थानों के साथ साथ साइबर पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष रहे है । वे साइबर जागरूकता के लिए साइबर सेफ व्हाट्सएप्प ग्रुप और बी द पुलिस नाम से फेसबुक पेज और फेसबुक ग्रुप के संचालक है ।

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25-10-2026