मकोका में सजा दिलवाना किसी भी पुलिस के लिए आसान नहीं होता। लेकिन जब जांच सही नेतृत्व और दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ लड़ा जाए तो मकोका में भी सजा वह भी उम्र कैद की दिलवाई जा सकती है। दिल्ली में कैश वैन लूट में शामिल गैंगस्टरों के खिलाफ आए एक अदालती फैसले ने यह फिर से साबित कर दिया है।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने भारत भूषण उर्फ टोनी के नेतृत्व वाले आपराधिक गिरोह के पांच सदस्यों को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह का सरगना भारत भूषण दिल्ली और हरियाणा में सक्रिय था और उसके खिलाफ 22 आपराधिक मामले दर्ज थे।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने दावा किया था कि भारत भूषण जेल में रहने के दौरान भी अपने गिरोह को संचालित करता था। गिरोह पर नकदी लूटने, एटीएम में पैसा डालने वाली टीमों को निशाना बनाने, हत्या, रंगदारी और गवाहों को धमकाने जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप थे।
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अदालत का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें संगठित अपराध गिरोह की सदस्यता और उसके लगातार आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने के पहलुओं पर विचार किया गया।
भारत भूषण गैंग के पांच सदस्यों को उम्रकैद, कौन-कौन हैं दोषी?
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश गौरव राव ने 5 नवंबर 2026 को पांचों दोषियों को सजा सुनाई। इससे एक दिन पहले 4 नवंबर को अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था।
मकोका में सजा पाने वाले दोषियों के नाम हैं:
- भूषण उर्फ भारत भूषण उर्फ टोनी
- नीरज उर्फ कल्लू
- विकास भारद्वाज
- जितेंद्र उर्फ जीतू
- दीपक उर्फ मंतर
अदालत ने पांचों को मकोका की धारा 3(4) के तहत दोषी ठहराया। इसके अलावा नीरज उर्फ कल्लू को छोड़कर बाकी चार आरोपियों को धारा 3(1)(ii) के तहत भी दोषी पाया।
पांचों को धारा 3(4) के तहत उम्रकैद और पांच-पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
क्या था भारत भूषण गैंग का आपराधिक नेटवर्क?
अदालत में पेश अभियोजन के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत भूषण उर्फ टोनी दिल्ली के नरेला इलाके का रहने वाला है। उसका गिरोह दिल्ली और आसपास के राज्यों में सक्रिय था।
पुलिस के रिकॉर्ड में भारत भूषण के खिलाफ कुल 22 आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया था। इनमें:
- हत्या के 2 मामले
- हत्या के प्रयास का 1 मामला
- हथियारों के बल पर लूट के 8 मामले
- झपटमारी के 2 मामले
- रंगदारी के 2 मामले
- चोरी के 6 मामले
- आर्म्स एक्ट का 1 मामला
शामिल थे।
पुलिस का आरोप था कि गिरोह के सदस्य अकेले और मिलकर वारदात करते थे। उनका उद्देश्य लूटपाट और दूसरे अपराधों से आर्थिक लाभ कमाना था। गिरोह पर लोगों को धमकाकर रंगदारी वसूलने और गवाहों को डराकर उनके बयान प्रभावित करने के भी आरोप थे। अदालत के फैसले में इन आपराधिक गतिविधियों से जुड़े कई पुराने मामलों का विवरण दिया गया है।
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एटीएम में कैश डालने वाली टीमों को बनाते थे निशाना, लाखों रुपये लूटे
भारत भूषण गिरोह के खिलाफ जांच में नकदी ले जाने वाली टीमों और एटीएम में पैसा डालने वाले कर्मचारियों पर हमलों के कई मामले सामने आए।
अदालत के फैसले में दर्ज अभियोजन के विवरण के मुताबिक, 19 मई 2017 को एटीएम में नकदी डालने जा रहे कर्मचारियों को निशाना बनाया गया था। आरोप था कि गिरोह के सदस्यों ने मिर्च पाउडर का इस्तेमाल कर हमला किया और करीब 19 लाख रुपये लूट लिए। इस दौरान एक कर्मचारी की गोली लगने से मौत हो गई।
इसी तरह 23 जून 2017 को एटीएम बूथ में नकदी डालने वाली टीम पर हमला कर 21.50 लाख रुपये लूटने का मामला भी रिकॉर्ड में शामिल था। इस घटना में एक सुरक्षा गार्ड की गोली लगने से मौत हो गई थी।
26 अप्रैल 2018 को नरेला के डीएसआईआईडीसी इलाके में शराब की दुकान से नकदी लेने पहुंची टीम पर हमला किया गया। अभियोजन के अनुसार, गिरोह के सदस्यों ने फायरिंग कर कैश वैन से 13.33 लाख रुपये लूट लिए। इस घटना में कैशियर और सुरक्षा गार्ड की गोली लगने से मौत हो गई थी।
एक अन्य घटना में 3 फरवरी 2018 को रोहिणी सेक्टर-5 से नकदी लेकर जा रहे कर्मचारी से 10.88 लाख रुपये लूटने का आरोप था।
ये घटनाएं अदालत के फैसले में दर्ज पुराने मामलों और अभियोजन के रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।
50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का भी आरोप
अदालत के फैसले में रंगदारी से जुड़ी एक घटना का भी उल्लेख है। अभियोजन के अनुसार, गिरोह के सरगना भारत भूषण और उसके सहयोगी ने एक चावल व्यापारी से 50 लाख रुपये की मांग की थी। रकम नहीं देने पर गोली मारने की धमकी दी गई थी। एक अन्य मामले में नरेला के एक दुकानदार से पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप था। पुलिस के अनुसार, पहले दुकानदार से लूटपाट की गई और बाद में उसकी दुकान पर लूटा गया सामान वापस रखकर उससे सुरक्षा के नाम पर रकम मांगी गई।
इन घटनाओं से जुड़े मामलों और दस्तावेजों को संगठित अपराध के आरोपों के समर्थन में अदालत के सामने रखा गया था।
जेल में रहते हुए गैंग चलाने का आरोप कैसे आया सामने?
इस मामले में पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा गिरोह के सदस्यों के बीच संबंध और उनकी गतिविधियों का विश्लेषण था।अभियोजन का दावा था कि भारत भूषण जेल के अंदर रहने के बावजूद अपने गिरोह का संचालन करता था। उसके सहयोगी अलग-अलग वारदातों को अंजाम देते थे और आपराधिक गतिविधियों से मिलने वाले आर्थिक लाभ को साझा करते थे।
जांच में पुलिस ने आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, अलग-अलग एफआईआर, आरोपपत्र और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए।अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अलग-अलग मामलों में आरोपियों की साझा संलिप्तता, पुराने आरोपपत्रों और उनके बयानों से संगठित अपराध सिंडिकेट की सदस्यता साबित हुई।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि जेल से गिरोह चलाने का विवरण अभियोजन का आरोप था। अदालत का दोषसिद्धि संबंधी फैसला संगठित अपराध सिंडिकेट की सदस्यता और अपराध में संलिप्तता पर आधारित था।
मकोका क्या है और इस कानून में उम्रकैद कब हो सकती है?
मकोका का पूरा नाम महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम है। इसे अंग्रेजी में Maharashtra Control of Organised Crime Act यानी MCOCA कहा जाता है। यह संगठित अपराध से निपटने के लिए बनाया गया विशेष कानून है। दिल्ली में भी यह कानून लागू है।
इस कानून की धारा 3 में संगठित अपराध के लिए अलग-अलग प्रकार की सजा का प्रावधान है। धारा 3(1)(i): यदि संगठित अपराध के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मौत होती है तो दोषी को मृत्युदंड या उम्रकैद और कम से कम एक लाख रुपये जुर्माने की सजा हो सकती है।
धारा 3(1)(ii): अन्य मामलों में कम से कम पांच साल की कैद से लेकर उम्रकैद तक की सजा और कम से कम पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
धारा 3(4): संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य होने पर कम से कम पांच साल की कैद से लेकर उम्रकैद और कम से कम पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा हो सकती है।
भारत भूषण गैंग के इस मामले में अदालत ने सभी पांच आरोपियों को धारा 3(4) के तहत दोषी ठहराया। चार आरोपियों को धारा 3(1)(ii) के तहत भी दोषी पाया गया।
कैसे हुई मकोका के तहत कार्रवाई?
इस मामले में क्राइम ब्रांच की ओर से जांच तत्कालीन एसीपी अरविंद कुमार ने की थी। उस समय वह क्राइम ब्रांच की स्पेशल ऑपरेशन स्क्वॉड-I, प्रशांत विहार में तैनात थे।
जांच के दौरान आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड, पुराने मामलों, पहले हुई दोषसिद्धियों और दूसरे दस्तावेजी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। पुलिस ने इन साक्ष्यों के जरिए आरोपियों के बीच आपराधिक संबंध और संगठित अपराध सिंडिकेट के रूप में उनकी गतिविधियों को अदालत के सामने रखा।
जांच पूरी होने के बाद अरविंद कुमार ने विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया। 21 अगस्त 2024 को अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड पर विचार करते हुए मकोका की संबंधित धाराओं में आरोप तय किए।
इसके बाद मामले का ट्रायल राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष नामित न्यायाधीश गौरव राव की अदालत में चला।
इंस्पेक्टर विजय समारिया और संदीप स्वामी की भी रही भूमिका
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जांच और ट्रायल के दौरान सहयोग करने वाले अधिकारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया है।
इंस्पेक्टर विजय समारिया, जो अब अमन विहार थाने के एसएचओ हैं, ने जांच में सहयोग किया। वहीं, क्राइम ब्रांच के एनआर-II में तैनात इंस्पेक्टर संदीप स्वामी ने मुकदमे की पैरवी और ट्रायल से जुड़े कार्यों में सहयोग किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक प्रेम नारायण सिंह ने अदालत में मामले को प्रस्तुत किया। जांच अधिकारी अरविंद कुमार और अभियोजन पक्ष के बीच समन्वय से आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और दूसरे साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए।
विशेष अदालत ने सुनाया फैसला
यह मामला एससी नंबर 19/2026, स्टेट बनाम भूषण उर्फ भारत भूषण उर्फ टोनी एवं अन्य के रूप में दर्ज था। इसकी सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष एक्सक्लूसिव कोर्ट-13 (मकोका) में हुई।
न्यायाधीश गौरव राव की अदालत ने 4 नवंबर 2026 को पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया। मामले में अभियोजन पक्ष की दलीलें 31 अक्टूबर 2026 को पूरी हुई थीं।
दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (क्राइम) एच.जी.एस. धालीवाल, आईपीएस ने इस कार्रवाई को पुलिस और अभियोजन पक्ष के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया।


