बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी, कोयला खदान, इस्पात कारखाने और बंदरगाह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इनमें से किसी एक प्रतिष्ठान की गतिविधियां लंबे समय तक बाधित होने से बिजली आपूर्ति, औद्योगिक उत्पादन और माल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
ऐसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के पास है। यह बल देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। अब CISF ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था के प्रशासनिक और पर्यवेक्षण ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। 1 नवंबर 2026 से बल ने भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर चल रही सेक्टर व्यवस्था की जगह प्रतिष्ठानों की प्रकृति के अनुसार फंक्शनल कमांड प्रणाली लागू की है।
इस बदलाव का मकसद अलग-अलग उद्योगों की सुरक्षा चुनौतियों के अनुसार विशेषज्ञ नेतृत्व उपलब्ध कराना और सुरक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।
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CISF क्या है और इसकी जिम्मेदारी क्या है?
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (Central Industrial Security Force) देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक सुविधाओं की सुरक्षा करने वाला केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है। CISF की जिम्मेदारी ऐसे प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना है, जिनका संचालन देश की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक गतिविधियों और सार्वजनिक सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
इनमें बिजली संयंत्र, कोयला खदान, इस्पात संयंत्र, पेट्रोलियम प्रतिष्ठान, बंदरगाह, सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक और मेट्रो जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में प्रवेश नियंत्रण, निगरानी, गश्त, सुरक्षा जांच और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई जैसी जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण होती हैं।
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महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा क्यों जरूरी है?
किसी बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी या बंदरगाह में सुरक्षा संबंधी बड़ी चूक का असर उस प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं रह सकता।
उदाहरण के लिए:
- बिजली संयंत्र में व्यवधान से बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
- तेल और गैस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में सेंध से उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
- बंदरगाह पर गतिविधियां बाधित होने से माल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
- कोयला खदानों और इस्पात संयंत्रों में काम रुकने से औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
आज सुरक्षा संबंधी खतरों में ड्रोन के जरिए निगरानी या हमला, साइबर हमले, औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों (OT/ICS) को निशाना बनाना और सुनियोजित तोड़फोड़ जैसी आशंकाएं भी शामिल हैं। इसलिए हर औद्योगिक प्रतिष्ठान की जरूरत के अनुसार सुरक्षा योजना और विशेषज्ञ नेतृत्व महत्वपूर्ण हो जाता है।
CISF की नई फंक्शनल कमांड व्यवस्था क्या है?
पहले CISF में सेक्टर मुख्यालयों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर तय होती थी। एक सेक्टर मुख्यालय को अपने क्षेत्र में आने वाले कई तरह के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संबंधी निगरानी करनी पड़ती थी। इस व्यवस्था में एक ही नेतृत्व के अंतर्गत कोयला खदान, बिजली संयंत्र और बंदरगाह जैसे अलग-अलग प्रकृति के प्रतिष्ठान आ सकते थे।
लेकिन इनकी सुरक्षा जरूरतें एक जैसी नहीं होतीं। बिजली संयंत्र की तकनीकी सुरक्षा, बंदरगाह की निगरानी और कोयला खदान की सुरक्षा के लिए अलग तरह की विशेषज्ञता की जरूरत पड़ती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए CISF ने 1 नवंबर 2026 से फंक्शनल कमांड प्रणाली लागू की है।
नई व्यवस्था में सेक्टर मुख्यालयों का निर्धारण भौगोलिक सीमा के बजाय प्रतिष्ठानों की प्रकृति के अनुसार किया गया है। इससे संबंधित उद्योग की सुरक्षा जरूरतों को समझने और उसके अनुरूप निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
CISF के नए फंक्शनल सेक्टर कौन-कौन से हैं?
नई व्यवस्था के तहत देश में अलग-अलग औद्योगिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संबंधी निगरानी के लिए निम्नलिखित सेक्टर बनाए गए हैं।
| सेक्टर | मुख्यालय |
|---|---|
| पावर-I | नई दिल्ली |
| पावर-II | कोलकाता |
| कोल | रांची |
| स्टील | भिलाई |
| पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस | गुवाहाटी |
| पोर्ट, वेस्ट कोस्ट | मुंबई |
| पोर्ट, ईस्ट कोस्ट | चेन्नई |
| सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक एवं मेट्रो (GBMM & MRTS) | नई दिल्ली |
इस व्यवस्था में बिजली, कोयला, इस्पात, पेट्रोलियम और बंदरगाह जैसे प्रतिष्ठानों के लिए अलग-अलग नेतृत्व की व्यवस्था की गई है।
क्या CISF की पुरानी सुरक्षा जांच और गश्त में बदलाव होगा?
CISF की नई फंक्शनल कमांड व्यवस्था लागू होने का मतलब यह नहीं है कि आम लोगों या प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सुरक्षा जांच की प्रक्रिया बदल जाएगी। CISF की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जमीनी स्तर पर सुरक्षा की मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs), गश्त और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) की तैनाती पहले की तरह जारी रहेगी।
बदलाव मुख्य रूप से वरिष्ठ अधिकारियों के पर्यवेक्षण और कमांड व्यवस्था में किया गया है।
इसका उद्देश्य यह है कि संबंधित सेक्टर के अधिकारी अपने अधीन आने वाले प्रतिष्ठानों की तकनीकी और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें। किसी आपात स्थिति में वे संबंधित उद्योग के लिए निर्धारित आकस्मिक योजना को लागू करने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।
CISF में पहले से कहां लागू थी फंक्शनल कमांड प्रणाली?
CISF के लिए यह व्यवस्था पूरी तरह नई नहीं है।
बल का एविएशन सेक्टर वर्ष 2001 से फंक्शनल मॉडल पर काम कर रहा है। इसी तरह परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग (DAE & DoS) से जुड़े प्रतिष्ठानों के लिए वर्ष 2018 से फंक्शनल व्यवस्था लागू है।
अब इसी मॉडल को अन्य प्रमुख औद्योगिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों तक विस्तारित किया गया है।
CISF की नई व्यवस्था से क्या फायदा होगा?
CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन के अनुसार, नई कमांड व्यवस्था से प्रतिष्ठानों के प्रबंधन और सुरक्षा बल के बीच तालमेल बेहतर होगा।
पहले अलग-अलग प्रतिष्ठानों को अपने क्षेत्रीय सेक्टर मुख्यालय के साथ सुरक्षा संबंधी मामलों में समन्वय करना पड़ता था। नई व्यवस्था में संबंधित उद्योग के लिए अलग कमांड होने से प्रतिष्ठान प्रबंधन को एक निर्धारित संपर्क अधिकारी उपलब्ध होगा।
इससे तीन प्रमुख फायदे हो सकते हैं:
- बेहतर समन्वय: प्रतिष्ठान प्रबंधन और CISF के बीच सुरक्षा संबंधी संवाद अधिक सीधा होगा।
- तेज निर्णय: संबंधित उद्योग की जानकारी रखने वाले अधिकारी सुरक्षा संबंधी मामलों में अधिक सटीक निर्णय ले सकेंगे।
- आपातकालीन तैयारी: अलग-अलग प्रतिष्ठानों के लिए उनकी जरूरत के अनुसार आकस्मिक योजनाएं तैयार करने और लागू करने में मदद मिलेगी।
CISF महानिदेशक ने इस बदलाव को बहु-हितधारक वातावरण में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि इससे बल की कार्यक्षमता, पेशेवर दृष्टिकोण और जवाबदेही को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
भारत की औद्योगिक सुरक्षा में CISF की नई व्यवस्था क्यों महत्वपूर्ण है?
देश की अर्थव्यवस्था बिजली, ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक उत्पादन जैसी आवश्यक सेवाओं पर निर्भर करती है। इन सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक का असर बड़े स्तर पर पड़ सकता है। CISF की नई फंक्शनल कमांड प्रणाली का उद्देश्य इन्हीं प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को उनकी जरूरतों के अनुसार व्यवस्थित करना है।
इसमें उद्योग आधारित नेतृत्व, बेहतर समन्वय और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को प्राथमिकता दी गई है। आने वाले समय में ड्रोन, साइबर हमले और औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों से जुड़े खतरों को देखते हुए महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञ नेतृत्व की भूमिका और बढ़ेगी।
इस लिहाज से CISF की नई कमांड व्यवस्था भारत के महत्वपूर्ण औद्योगिक ढांचे की सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव है।

