निगम चुनाव से ठीक पहले दिल्ली में एक दर्जन पिस्टल बरामद

दिल्ली में निगम चुनाव से ठीक पहले पुलिस ने एक दर्जन पिस्टल बरामद किया है। इस सिलसिले में एसीपी अतर सिंह की देखरेख में इंस्पेक्टर कर्मवीर सिंह और पवन कुमार की टीम ने आर्म्स सिंडीकेट का भंडाफोड़ किया है। इस सिलसिले में सेठा बघेल नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है।

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दिल्ली में निगम चुनाव से ठीक पहले पुलिस ने एक दर्जन पिस्टल बरामद किया है। इस सिलसिले में एसीपी अतर सिंह की देखरेख में इंस्पेक्टर कर्मवीर सिंह और पवन कुमार की टीम ने आर्म्स सिंडीकेट का भंडाफोड़ किया है। इस सिलसिले में सेठा बघेल नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 12 सेमी अटोमेटिक पिस्टल बरामद किए गए हैं।

स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाह के मुताबिक चुनाव के मद्देनजर, मध्य प्रदेश के आग्नेयास्त्र आपूर्तिकर्ताओं पर विशेष सेल की टीमों द्वारा निगरानी बढ़ा दी गई थी, जो पूर्व में दिल्ली/एनसीआर में आग्नेयास्त्रों और गोला-बारूद भेजने में शामिल पाए गए थे।

गिरफ्तार हथियार सप्लायर के पास से 12 सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल बरामद की गई है. वह एमपी स्थित खरगोन के हथियार निर्माताओं-सह-आपूर्तिकर्ताओं से आग्नेयास्त्रों की खेप प्राप्त करता था। आरोपी 05 साल से अधिक समय से हथियारों की तस्करी में लिप्त है।

दिल्ली/एनसीआर में एमपी आधारित अवैध आग्नेयास्त्र तस्करों के खिलाफ विशेष सेल द्वारा शुरू किए गए निरंतर अभियान के क्रम में, इन सिंडिकेट के सदस्यों की पहचान करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे थे। स्पेशल सेल इससे पहले भी कई अंतरराज्यीय हथियार सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने में सफल रही थी।

पृष्ठभूमि और आपराधिक इतिहास

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी ने खुलासा किया कि उसे मध्य प्रदेश के खरगोन के एक हथियार निर्माता-सह-आपूर्तिकर्ता से पिस्तौल की खेप मिली थी. आरोपी ने आगे बताया कि वह पिछले 05 वर्षों से दिल्ली/एनसीआर और आसपास के अन्य राज्यों में अवैध आग्नेयास्त्रों और गोला-बारूद की आपूर्ति में लिप्त है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि वह पिछले 5 साल के दौरान दिल्ली/एनसीआर में 400 से ज्यादा असलहों की सप्लाई कर चुका है. उसने यह भी खुलासा किया है कि वह मध्य प्रदेश से 8000 रुपये में एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल खरीदता था और फिर उसे दिल्ली/एनसीआर और अन्य राज्यों में अपराधियों को 25-30000 रुपये में बेचता था।

गिरफ्तार अभियुक्त ने आगे बताया है कि पहले वह अपने गांव में कपड़े की दुकान चलाता था. गांव के निवासियों में से एक ने उन्हें जल्दी पैसा कमाने के लिए आग्नेयास्त्रों की तस्करी में शामिल होने का लालच दिया। शुरुआत में उसने उक्त व्यक्ति के वाहक के रूप में काम किया, लेकिन एक साल बाद उसने अपना नेटवर्क विकसित किया और अपने दम पर आग्नेयास्त्रों की आपूर्ति शुरू कर दी।

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